Ashok Gehlot: जोधपुर के उदयमंदिर आसन क्षेत्र में पुलिस कार्रवाई के दौरान एक युवक की मौत का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया है कि पुराने मारपीट के मामले में पुलिस किस परिस्थिति में युवक को पकड़ने उसके घर पहुंची और कार्रवाई के दौरान आखिर क्या हुआ।
पुलिस के अनुसार सद्दाम नामक युवक के खिलाफ मारपीट के एक मामले में वारंट लंबित था। बुधवार शाम नागौरी गेट थाना पुलिस की टीम उसे पकड़ने उदयमंदिर आसन स्थित उसके घर पहुंची। पुलिस का कहना है कि वह तीसरी मंजिल से गिरा और नीचे मौजूद बिजली के तारों की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
वहीं परिवार के कुछ सदस्यों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर अलग आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि पुलिसकर्मी सद्दाम के पीछे ऊपर तक गए थे और कुछ लोगों ने उसे धक्का दिए जाने का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों की अभी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
Ashok Gehlot ने क्यों मांगी उच्चस्तरीय जांच?
अशोक गहलोत ने कहा कि उदयमंदिर आसन में पुलिस दबिश के दौरान युवक की मौत “अत्यंत दुखद और गंभीर” घटना है।
गहलोत ने सवाल उठाया कि यदि मामला कई साल पुराना और सामान्य मारपीट से जुड़ा था, तो ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि पुलिस को इस तरह घर पर कार्रवाई करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई की जानकारी नहीं थी, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस टीम वहां किस आदेश या सूचना के आधार पर पहुंची। उन्होंने परिवार की ओर से महिलाओं से कथित बदसलूकी के आरोप का भी उल्लेख किया और इसकी जांच की मांग की।
ये सभी आरोप और सवाल जांच का विषय हैं। फिलहाल पुलिस की ओर से यह कहा गया है कि युवक के खिलाफ वारंट था और टीम उसे गिरफ्तार करने गई थी।
Ashok Gehlot: पुलिस और परिवार के बयान में अंतर
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घटना को लेकर दो अलग-अलग संस्करण सामने आ रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक सद्दाम टीम को देखकर छत की ओर चला गया और तीसरी मंजिल से गिरकर बिजली के तारों में उलझ गया। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
दूसरी ओर परिजनों और कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी उसके पीछे छत तक पहुंचे और पुलिस कार्रवाई के कारण स्थिति बिगड़ी। Hindustan Times की रिपोर्ट में परिवार की ओर से यह आरोप भी दर्ज है कि युवक को बालकनी से धक्का दिया गया।
इसलिए घटना को दुर्घटना, छलांग या धक्का दिए जाने के रूप में अंतिम रूप से तय करना अभी जल्दबाजी होगी। जांच के बाद ही वास्तविक घटनाक्रम स्पष्ट हो सकेगा।
Ashok Gehlot: पुलिस के मुताबिक वारंट था लंबित
नागौरी गेट थाना पुलिस का कहना है कि सद्दाम के खिलाफ मारपीट के मामले में वारंट था और वह पुलिस के सामने पेश नहीं हो रहा था।
पुलिस को उसके घर पर मौजूद होने की जानकारी मिली, जिसके बाद दो पुलिसकर्मी और चेतक टीम वहां पहुंची। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और युवक तीसरी मंजिल से नीचे गिर गया।
अशोक गहलोत ने इसी कार्रवाई की आवश्यकता और तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि इतनी पुरानी शिकायत में पुलिस टीम किस आधार पर अचानक वहां पहुंची।
Ashok Gehlot: मौत के बाद भड़का गुस्सा
सद्दाम की मौत की खबर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचे।
घटना के दौरान गुस्साई भीड़ ने एक पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की और एक कांस्टेबल के साथ मारपीट का आरोप भी सामने आया। घायल पुलिसकर्मी को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
स्थिति को देखते हुए अस्पताल और आसपास के इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
Ashok Gehlot: परिजनों ने रखीं मुआवजा और नौकरी की मांग
परिवार और स्थानीय लोगों ने पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की ओर से परिवार को 1 करोड़ रुपए मुआवजा, सरकारी नौकरी और कथित रूप से जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग भी रखी गई है।
अशोक गहलोत ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में बात की है और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पीड़ित परिवार की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की है।
Ashok Gehlot: महिलाओं से बदसलूकी का भी आरोप
परिवार की ओर से यह भी दावा किया गया है कि पुलिस ने घर पहुंचने के बाद महिलाओं और अन्य परिजनों से कथित तौर पर गलत व्यवहार किया।
स्थानीय रिपोर्टों में परिवार की ओर से पुलिस पर पैसे लेने और इसके बावजूद गिरफ्तारी के लिए पहुंचने जैसे आरोप भी सामने आए हैं। ये आरोप अभी प्रमाणित नहीं हैं और पुलिस की ओर से इनके संबंध में कोई अंतिम जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
गहलोत ने इन्हीं आरोपों को देखते हुए स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई है।
Ashok Gehlot: शव को लेकर जारी रहा प्रदर्शन
घटना के अगले दिन भी परिजन और समाज के लोग महात्मा गांधी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करते रहे।
रिपोर्टों के अनुसार परिवार ने अपनी मांगें पूरी होने तक शव लेने से इनकार करने की बात कही। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति सामान्य करने की कोशिश कर रहे थे।
1 अक्टूबर शाम तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में किसी अंतिम समझौते या जांच निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई थी।
Ashok Gehlot ने जवाबदेही तय करने की मांग की
Ashok Gehlot ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि पुलिस कार्रवाई में कोई नियम उल्लंघन या लापरवाही हुई या नहीं।
उनका कहना है कि जांच में यदि किसी पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और परिवार को न्याय मिलना चाहिए। यह गहलोत की राजनीतिक और प्रशासनिक मांग है; दोष या जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही हो सकता है।
फिलहाल मामले में कई सवाल खुले हैं—पुलिस टीम किस आदेश पर पहुंची, वारंट की स्थिति क्या थी, सद्दाम तीसरी मंजिल से कैसे गिरा, क्या मौके पर CCTV या अन्य प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद हैं और परिवार के पुलिस पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
इन सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच और उपलब्ध तकनीकी व प्रत्यक्ष साक्ष्यों से ही सामने आ सकेंगे।
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