Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान में पंचायती राज चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के बाद सरपंच पद के उम्मीदवारों के सामने एक अलग तरह की चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक पंच और सरपंच प्रत्याशियों का नामांकन, जांच, नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन मतदान से ठीक एक दिन पहले होगा। ऐसे में अंतिम चुनाव चिह्न मिलने के बाद प्रत्याशी के पास उसे मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए 24 घंटे से भी कम समय रहेगा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने 3 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम घोषित किया है। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के लिए चार चरणों में चुनाव होंगे। 4.03 करोड़ से ज्यादा मतदाता इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने के पात्र हैं और 45,384 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।
कार्यक्रम घोषित होते ही संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।
Rajasthan Panchayat Election: सरपंचों को क्यों मिलेगी सिर्फ एक रात?
पहले चरण का उदाहरण इस व्यवस्था को सबसे आसानी से समझाता है।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए पहले चरण का मतदान 23 अक्टूबर को होगा। इसके अगले दिन यानी 24 अक्टूबर को संबंधित ग्राम पंचायतों में पंच और सरपंच पद के लिए नामांकन से लेकर scrutiny, नाम वापसी और अंतिम चुनाव चिह्न आवंटन तक की प्रक्रिया पूरी होगी।
इसके अगले ही दिन 25 अक्टूबर सुबह 7 बजे मतदान शुरू हो जाएगा।
इसका मतलब यह हुआ कि किसी उम्मीदवार को अंतिम रूप से “बल्ला”, “प्रेशर कुकर”, “कैमरा”, “ट्रक” या आयोग की सूची में उपलब्ध कोई दूसरा चुनाव चिह्न मिलने के बाद उसे उसी निशान के साथ मतदाताओं तक पहुंचने के लिए केवल कुछ घंटे मिलेंगे।
सरपंच चुनाव राजनीतिक दलों के अधिकृत पार्टी symbols पर नहीं लड़े जाते। उम्मीदवारों को राज्य निर्वाचन आयोग की free-symbol list से चुनाव चिह्न आवंटित होते हैं।
Rajasthan Panchayat Election: कुल प्रचार और ‘सिंबल वाला प्रचार’ अलग-अलग
यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा।
यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि सरपंच प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार के लिए केवल एक दिन ही मिलेगा।
गांवों में संभावित उम्मीदवार चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद अपने नाम, चेहरे, सामाजिक संपर्क और स्थानीय मुद्दों के आधार पर पहले से जनसंपर्क कर सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने भी कहा कि आरक्षण स्पष्ट होने के बाद संभावित दावेदार पहले से “हल्का-फुल्का” प्रचार कर रहे होते हैं।
लेकिन प्रत्याशी का नामांकन स्वीकार होने, नाम वापसी की अवधि खत्म होने और official symbol मिलने के बाद उसके पास उस चुनाव चिह्न के साथ प्रचार करने का समय बेहद कम रहेगा।
यही इस चुनाव कार्यक्रम को लेकर उठ रहे व्यावहारिक सवाल की मुख्य वजह है।
Rajasthan Panchayat Election: आयोग ने जानबूझकर क्यों रखा इतना कम समय?
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने इस व्यवस्था के पीछे धनबल और मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव को रोकने का तर्क दिया है।
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरपंच चुनावों में काफी पैसा खर्च होने, मतदाताओं को प्रलोभन देने और उन पर अनुचित प्रभाव डालने की शिकायतें सामने आती हैं। इसी वजह से आयोग ने ऐसी व्यवस्था रखी है जिसमें एक दिन nomination process और अगले दिन मतदान हो।
आयुक्त के मुताबिक जो व्यक्ति गांव में पहले से सक्रिय है, जिसकी छवि साफ है और जिसका व्यवहार लोगों के बीच अच्छा है, उसे लंबे प्रचार अभियान की जरूरत अपेक्षाकृत कम होगी।
यानी आयोग इस छोटे gap को चुनावी कमजोरी के बजाय money power नियंत्रित करने के उपाय के तौर पर देख रहा है।
Rajasthan Panchayat Election: पहले चरण का पूरा गणित
पहले चरण में जिला निर्वाचन अधिकारी की लोक सूचना 8 अक्टूबर को जारी होगी।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का मतदान 23 अक्टूबर को होगा।
इसके बाद पंच और सरपंच उम्मीदवारों से संबंधित nomination और अंतिम candidature की प्रक्रिया 24 अक्टूबर को होगी।
सरपंच-पंच मतदान 25 अक्टूबर को होगा और वोटिंग समाप्त होने के तुरंत बाद संबंधित ग्राम पंचायत मुख्यालय पर मतगणना शुरू होगी। उपसरपंच का चुनाव 26 अक्टूबर को होगा।
Rajasthan Panchayat Election: चारों चरणों में यही पैटर्न
Rajasthan Panchayat Election में यही pattern चारों चरणों में अपनाया जाएगा।
| चरण | जिला परिषद/पंचायत समिति मतदान | पंच-सरपंच प्रक्रिया | पंच-सरपंच मतदान |
|---|---|---|---|
| पहला | 23 अक्टूबर | 24 अक्टूबर | 25 अक्टूबर |
| दूसरा | 29 अक्टूबर | 30 अक्टूबर | 31 अक्टूबर |
| तीसरा | 4 नवंबर | 5 नवंबर | 6 नवंबर |
| चौथा | 14 नवंबर | 15 नवंबर | 16 नवंबर |
पंच और सरपंच चुनाव ballot paper से होंगे, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य चुनाव में EVM का इस्तेमाल किया जाएगा।
Rajasthan Panchayat Election: गांवों में चुनाव चिह्न क्यों इतना महत्वपूर्ण?
सरपंच चुनाव में चुनाव चिह्न की भूमिका खास तौर पर महत्वपूर्ण रहती है।
चूंकि यह पार्टी symbol वाला चुनाव नहीं है, इसलिए उम्मीदवार को मिलने वाला निशान उसकी व्यक्तिगत पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। मतदान के समय ballot paper पर प्रत्याशी के नाम के साथ उसका election symbol मौजूद रहता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में उम्मीदवार अक्सर प्रचार के दौरान इसी चुनाव चिह्न को पोस्टर, पर्चे और व्यक्तिगत जनसंपर्क में प्रमुखता से बताते हैं।
ऐसे में मतदान से एक दिन पहले symbol मिलने से प्रत्याशियों के सामने व्यावहारिक चुनौती जरूर पैदा होती है—खासकर बड़े भूभाग और कई ढाणियों वाली ग्राम पंचायतों में।
Rajasthan Panchayat Election: सोशल मीडिया से मिलेगी कुछ राहत?
WhatsApp, Facebook और दूसरे digital platforms की वजह से अब चुनाव चिह्न की जानकारी पहले की तुलना में तेजी से मतदाताओं तक पहुंचाई जा सकती है।
लेकिन हर ग्राम पंचायत में digital reach समान नहीं होती। बुजुर्ग मतदाताओं, सीमित internet access वाले क्षेत्रों और दूर-दराज की ढाणियों में उम्मीदवारों को व्यक्तिगत संपर्क पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।
इसी वजह से कई दावेदार चुनाव चिह्न मिलने से पहले ही नाम और चेहरे के आधार पर जनसंपर्क शुरू कर चुके हैं।
Rajasthan Panchayat Election: क्या कार्यक्रम कानूनी तौर पर गलत है?
फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर केवल कम समय मिलने की वजह से चुनाव कार्यक्रम को “कानून के खिलाफ” कहना उचित नहीं होगा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्धारित election rules के तहत कार्यक्रम जारी किया है और आयुक्त ने इस व्यवस्था के पीछे स्पष्ट नीति-आधारित कारण भी बताया है।
हां, उम्मीदवारों के लिए official symbol के साथ प्रचार का समय बहुत कम होने के कारण इस पर व्यावहारिक और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवाल जरूर उठाए जा रहे हैं।
अगर किसी संगठन या उम्मीदवार की ओर से इसे अदालत में चुनौती दी जाती है या आयोग से आधिकारिक रूप से schedule modification मांगा जाता है, तभी इस मुद्दे का कानूनी पक्ष अलग से स्पष्ट होगा।
Rajasthan Panchayat Election: क्या आयोग कार्यक्रम बदलेगा?
4 अक्टूबर तक राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से सरपंच nomination और polling के बीच का अंतर बढ़ाने या घोषित schedule में बदलाव करने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
फिलहाल पहला चरण घोषित कार्यक्रम के मुताबिक ही आगे बढ़ रहा है।
इसलिए सरपंच पद के दावेदारों के सामने सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती यह होगी कि वे मतदान से पहले अपना व्यक्तिगत जनसंपर्क मजबूत रखें और चुनाव चिह्न आवंटित होते ही बेहद कम समय में उसकी जानकारी मतदाताओं तक पहुंचाएं।
आयोग का तर्क है कि छोटा समय धनबल और प्रलोभन पर नियंत्रण लगाएगा, जबकि उम्मीदवारों के नजरिए से यही व्यवस्था चुनाव चिह्न के प्रचार को मुश्किल बनाती है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या चुनाव से पहले इस समय-सारणी को लेकर आयोग के सामने कोई औपचारिक आपत्ति आती है या चारों चरण मौजूदा “आज candidature final, कल मतदान” वाले मॉडल पर ही संपन्न होते हैं।
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