Sachin Pilot: मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रविवार, 4 अक्टूबर को जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने दावा किया कि देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम electoral rolls से हटाए गए हैं और आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में मतदाताओं को “टारगेट” करके सूची से बाहर किया गया।
पायलट ने चुनाव आयोग की आंतरिक decision-making पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने दूसरे दो चुनाव आयुक्तों को किनारे कर SIR से जुड़े कई फैसले अपने स्तर पर लिए और Electoral Registration Officers यानी ERO की शक्तियों को केंद्रीकृत किया।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि SIR समेत आयोग के सभी अंतिम फैसले Full Commission की सर्वसम्मति से हुए हैं और अधिकारियों के लिखित नोट या अलग विचार institutional decision-making की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
Sachin Pilot ने कहा- नोटबंदी के बाद अब ‘वोटबंदी’
सचिन पायलट ने SIR विवाद को लेकर केंद्र और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए “वोटबंदी” शब्द का इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि पहले देश ने नोटबंदी देखी और अब लोगों को “वोटबंदी” का सामना करना पड़ रहा है।
पायलट ने कहा कि मतदान करना नागरिक का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अधिकार है और यदि योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से हटता है तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों में चुनिंदा मतदाताओं को निशाना बनाया गया।
ये कांग्रेस नेता के आरोप हैं। किसी अदालत या स्वतंत्र जांच ने अभी यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि देशव्यापी SIR का इस्तेमाल किसी विशेष राजनीतिक दल के फायदे के लिए योजनाबद्ध तरीके से किया गया।
Sachin Pilot: क्या वास्तव में 13 करोड़ लोगों के नाम काटे गए?
इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा करीब 13 करोड़ है।
देशभर में SIR के दौरान तैयार की गई draft electoral rolls से करीब 13.37 करोड़ नाम बाहर रहे या हटाए गए। इनमें ऐसे मतदाता शामिल थे जिन्हें Absent, Shifted, Dead या Duplicate यानी ASDD categories में रखा गया।
इसलिए दो बातों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
करीब 13.37 करोड़ नाम draft rolls से बाहर होना एक वास्तविक और बड़ा आंकड़ा है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि इन सभी लोगों का वोट देने का अधिकार हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
Draft roll अंतिम electoral roll नहीं होती। कोई जीवित और पात्र मतदाता यदि गलत तरीके से बाहर हो गया है तो वह inclusion के लिए दावा कर सकता है।
इसी विवाद के बीच Election Commission ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को “left-out” eligible voters की पहचान कर उन्हें दोबारा enroll कराने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। BLOs को ऐसे मतदाताओं तक पहुंचने और registration में मदद करने के लिए कहा गया है।
ERO की शक्तियों को लेकर पायलट ने क्या आरोप लगाया?
Sachin Pilot ने सबसे गंभीर आरोपों में से एक electoral roll management के केंद्रीकरण को लेकर लगाया।
उन्होंने कहा कि कानून के तहत किसी मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में Electoral Registration Officer यानी ERO की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन उनका आरोप है कि कई निर्णय दिल्ली में केंद्रीकृत हो गए और local ERO की भूमिका कमजोर हुई।
यह सवाल पूरी तरह राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं है।
The Indian Express की जांच में सामने आया था कि Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने पिछले करीब दस महीनों में कम से कम 14 बार अलग-अलग फैसलों पर लिखित आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज कीं।
इनमें Form 6 में बदलाव, electoral-roll database के केंद्रीकृत access, voter deletion appeals और कुछ अन्य प्रक्रिया संबंधी मुद्दे शामिल थे।
Sachin Pilot: चुनाव आयोग बोला- अंतिम फैसले सर्वसम्मति से
इन रिपोर्टों के बाद Election Commission ने 23 सितंबर को आधिकारिक बयान जारी किया।
आयोग ने कहा कि लिखित observations, technical suggestions और internal checks multi-member constitutional body में सामान्य institutional process का हिस्सा हैं।
ECI ने साफ कहा कि SIR समेत सभी official decisions Full Commission के unanimous decisions हैं और सभी आदेश कानूनी एवं निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी हुए हैं।
26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार, Election Commissioner S.S. Sandhu और Vivek Joshi की बैठक के बाद कुछ procedural changes भी घोषित किए गए।
अब SIR के दौरान unmapped या logical discrepancy वाले मतदाताओं को हर मामले में ERO/AERO office बुलाने के बजाय BLO उनके घर जाकर documents collect कर सकता है। आयोग ने ECINet system की समीक्षा के लिए भी कदम उठाए हैं।
Sachin Pilot: Form 6 पर क्यों उठा विवाद?
Form 6 नए मतदाता के enrolment के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
Indian Express की जांच के मुताबिक ECINet पर Form 6 में SIR से जुड़ा declaration जोड़े जाने पर दोनों Election Commissioners ने आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इसे unauthorized बताते हुए हटाने और जरूरत होने पर सरकार के जरिए statutory process अपनाने की बात कही थी।
चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि internal objections और suggestions अंतिम policy decision के समान नहीं होते और आयोग के final decisions सामूहिक रूप से लिए गए।
इसी बीच ECI ने left-out voters के enrolment को आसान बनाने के लिए भी निर्देश दिए हैं।
Sachin Pilot: मामला Supreme Court तक पहुंचा
SIR और CEC की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में कुछ फैसले बाकी दो Election Commissioners की सहमति के बिना लिए गए और ऐसी decisions तथा software modifications को unconstitutional घोषित करने की मांग की गई है।
इसी याचिका में करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के मामले की Special Investigation Team यानी SIT से जांच कराने की मांग भी की गई है। यह याचिकाकर्ता की मांग है; Supreme Court ने अभी इन आरोपों को सही नहीं माना है।
इसके अलावा एक अन्य petition में nationwide SIR की वैधता और CEC की functioning को चुनौती दी गई है, जिस पर Supreme Court ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है।
Sachin Pilot: मोदी-शाह को लेकर सचिन पायलट ने क्या कहा?
SIR विवाद में सचिन पायलट पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही का मुद्दा उठा चुके हैं।
24 सितंबर को उनके एक राजनीतिक बयान में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के साथ प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जवाबदेही तय करने की बात कही गई थी। पायलट ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग और BJP-RSS की कथित मिलीभगत से लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंच रहा है।
कांग्रेस Working Committee ने भी बाद में SIR विवाद को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री शाह और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूचियों में हुई गड़बड़ियों की राजनीतिक जवाबदेही शीर्ष स्तर तक जाती है।
BJP और चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
Sachin Pilot: चुनाव आयोग पर भरोसे को लेकर पायलट का सवाल
पायलट ने कहा कि Election Commission जैसी constitutional institution की सबसे बड़ी ताकत जनता का भरोसा है।
उनका आरोप है कि जब voter registration, deletion और election process को लेकर लगातार सवाल उठें और आयोग के अंदर से भी अलग-अलग views की खबरें सामने आएं तो संस्था की credibility प्रभावित होती है।
हालांकि आयोग का कहना है कि internal disagreements constitutional institutions में checks and balances का सामान्य हिस्सा हैं और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि final decisions अवैध या unilateral थे।
Sachin Pilot: 13 करोड़ के विवाद का असली सवाल क्या है?
Sachin Pilot का “13 करोड़ नाम काटे गए” वाला आंकड़ा पूरी तरह हवा में नहीं है—nationwide SIR draft rolls से करीब 13.37 करोड़ नाम बाहर रहे थे।
लेकिन इसे यह कहकर पेश करना कि सभी 13 करोड़ लोगों का मताधिकार स्थायी रूप से समाप्त हो गया, तथ्यात्मक रूप से अधूरा होगा।
असल विवाद यह है कि इन 13.37 करोड़ में कितने नाम सही कारणों से हटे—जैसे मृत्यु, स्थान परिवर्तन या duplicate entry—और कितने eligible voters procedural या data errors की वजह से गलत तरीके से बाहर हो गए।
इसी सवाल को लेकर विपक्ष आंदोलन कर रहा है, Election Commission left-out voters को दोबारा जोड़ने के लिए special drive चला रहा है और अलग-अलग petitions Supreme Court तक पहुंच चुकी हैं।
इसलिए इस विवाद पर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। एक तरफ कांग्रेस और सचिन पायलट इसे targeted voter deletion बता रहे हैं, दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि SIR electoral rolls को accurate बनाने की वैधानिक प्रक्रिया है और eligible voters को गलत तरीके से बाहर रहने से रोकने के लिए corrective measures लिए जा रहे हैं।
दूसरी खबरों के लिए The News Canvas पढ़ें।

