Barmer Panchayat Election 2026: राजस्थान में पंचायती राज चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही बाड़मेर में गांव की सत्ता के लिए BJP और कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। BJP वार्ड स्तर पर जिम्मेदारियां बांटकर संगठन को सक्रिय करने में जुटी है, जबकि कांग्रेस सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, बायतु विधायक हरीश चौधरी और जिला संगठन के जरिए अपने पुराने ग्रामीण प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने राजस्थान में पंचायत चुनाव चार चरणों में कराने की घोषणा की है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को होगा, जबकि पंच और सरपंच के चुनाव 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को होंगे। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव की मतगणना 20 नवंबर को होगी। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है।
Barmer Panchayat Election 2026: BJP ने वार्ड स्तर पर बढ़ाई सक्रियता
बाड़मेर में BJP ने जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर चुनावी संगठन तैयार करना शुरू कर दिया है। अलग-अलग वार्डों में पार्टी पदाधिकारियों और स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी देकर कार्यकर्ताओं से संपर्क, संभावित प्रत्याशियों की पहचान और स्थानीय समीकरणों पर फीडबैक जुटाने की तैयारी की जा रही है।
पार्टी का फोकस इस बार केवल जिला परिषद तक सीमित नहीं है। पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर तक संगठन सक्रिय करने की रणनीति है, ताकि उम्मीदवार चयन से पहले वार्डवार राजनीतिक स्थिति का आकलन किया जा सके।
हालांकि किसी वार्ड में कौन उम्मीदवार होगा, इसका अंतिम फैसला टिकट घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
कांग्रेस भी गांवों में बढ़ा रही संगठनात्मक गतिविधियां
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी बाड़मेर में बैठकों और वरिष्ठ नेताओं के क्षेत्रीय दौरों के जरिए पंचायत चुनाव की तैयारी बढ़ाई है।
बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और बायतु विधायक हरीश चौधरी हाल के महीनों में जिले में राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। 3 अक्टूबर को बाड़मेर कांग्रेस कार्यालय में हुए कार्यक्रम में हरीश चौधरी, उम्मेदाराम बेनीवाल और जिला कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा एक साथ मौजूद थे।
कांग्रेस के लिए चुनावी तैयारी के साथ स्थानीय स्तर पर पुराने मतभेदों को नियंत्रित रखना भी अहम होगा।
Barmer Panchayat Election 2026: क्यों कहा जाता है बाड़मेर को कांग्रेस का मजबूत ग्रामीण क्षेत्र?
बाड़मेर की जिला परिषद राजनीति में कांग्रेस का लंबे समय तक प्रभाव रहा है। 2020 के पंचायत चुनाव में BJP ने पहली बार जिला परिषद सीटों की संख्या में कांग्रेस की बराबरी कर इस पुराने समीकरण को कड़ी चुनौती दी थी।
उस चुनाव में कुल 37 जिला परिषद सीटों में कांग्रेस को 18, BJP को 18 और RLP को एक सीट मिली थी। किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था।
उस समय Times of India ने भी बाड़मेर को कांग्रेस का पारंपरिक मजबूत क्षेत्र बताते हुए लिखा था कि BJP ने 18 सीटें जीतकर कांग्रेस की बराबरी की, जो जिले की ग्रामीण राजनीति में बड़ा बदलाव माना गया था।
Barmer Panchayat Election 2026: 2020 में Cross-Voting ने पलट दिया था खेल
2020 का जिला प्रमुख चुनाव आज भी बाड़मेर की राजनीति में चर्चा का विषय है।
कांग्रेस और BJP के पास 18-18 सदस्य थे और RLP का एक सदस्य निर्णायक स्थिति में था। संख्या के हिसाब से BJP-RLP समीकरण को बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन मतदान में cross-voting हुई और कांग्रेस उम्मीदवार महेंद्र चौधरी 21 वोट हासिल कर जिला प्रमुख बने।
यही वजह है कि इस बार BJP के लिए केवल सीटें जीतना ही नहीं, बल्कि निर्वाचित सदस्यों को नेतृत्व पदों के चुनाव तक एकजुट रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
हालांकि 2020 में BJP के कितने सदस्यों ने cross-voting की थी, इसे लेकर पुरानी मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण मिलते हैं। इसलिए किसी निश्चित संख्या को स्थापित तथ्य की तरह लिखने के बजाय इतना कहना अधिक सटीक है कि cross-voting ने BJP की जिला प्रमुख बनाने की संभावना को प्रभावित किया था।
इस बार भी बाड़मेर जिला परिषद में 37 वार्ड
2026 के लिए उपलब्ध चुनावी संरचना में बाड़मेर जिला परिषद के 37 वार्ड सूचीबद्ध हैं।
हालांकि 2020 में भी चुनाव 37 सीटों पर हुआ था, बीच के वर्षों में बाड़मेर-बालोतरा की प्रशासनिक सीमाओं और पंचायती राज संस्थाओं का पुनर्गठन हुआ है। इसलिए केवल सीटों की संख्या समान होने का अर्थ यह नहीं है कि 2020 और 2026 का भौगोलिक या राजनीतिक नक्शा बिल्कुल समान है।
31 दिसंबर 2025 के बाद बाड़मेर और बालोतरा की सीमाओं में बदलाव हुआ। गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल किया गया, जबकि बायतु को बाड़मेर में रखा गया। इससे पंचायत और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में भी बदलाव आया है।
BJP के सामने पुराना रिकॉर्ड बदलने की चुनौती
Barmer Panchayat Election 2026 में BJP का बड़ा लक्ष्य जिला परिषद में अपना संगठनात्मक आधार मजबूत करना होगा।
2020 में पार्टी कांग्रेस की बराबरी तक पहुंच गई थी, लेकिन जिला प्रमुख नहीं बना सकी। इस बार वार्ड प्रभारियों की समय से नियुक्ति और संभावित उम्मीदवारों पर पहले से मंथन को इसी संगठनात्मक तैयारी के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।
इसे “2020 का हिसाब बराबर करने” की BJP की आधिकारिक घोषणा नहीं कहा जा सकता, लेकिन पिछले परिणाम की पृष्ठभूमि इस मुकाबले को राजनीतिक रूप से ज्यादा दिलचस्प जरूर बनाती है।
कांग्रेस के सामने गढ़ बचाने की चुनौती
कांग्रेस के लिए चुनौती अलग है। जिले की ग्रामीण राजनीति में लंबे प्रभाव को बरकरार रखने के साथ उसे नए परिसीमन और बदले स्थानीय समीकरणों में प्रत्याशी चयन करना होगा।
सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, हरीश चौधरी और जिला अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा जैसे नेताओं की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि पंचायत चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार, जातीय-सामाजिक समीकरण और गांव स्तर का संगठन अक्सर बड़े राजनीतिक चेहरों से ज्यादा निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
फिलहाल दोनों दल अपने-अपने संगठन को मैदान में उतार चुके हैं। 2020 में बराबरी पर पहुंचा मुकाबला और जिला प्रमुख चुनाव में हुआ उलटफेर इस बार भी बाड़मेर को राजस्थान पंचायत चुनाव के सबसे दिलचस्प जिलों में शामिल करता है।
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