Kota Railway: दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर कोटा के नजदीक गुड़ला रेलवे स्टेशन से बुधवार सुबह दो ट्रेनों की टक्कर की खबर सामने आते ही हड़कंप मच गया। शुरुआती सूचना में बताया गया कि एक यात्री ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई है, दो कोच पटरी से उतर गए हैं और यात्रियों के घायल होने की आशंका है। रेलवे का इमरजेंसी सायरन बजा, मेडिकल और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू हो गया।
लेकिन राहत की बात यह रही कि यह कोई वास्तविक दुर्घटना नहीं थी। पूरा घटनाक्रम पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल की ओर से आयोजित Full Scale Disaster Management Mock Exercise का हिस्सा था। रेलवे ने आपात स्थिति में अपनी तैयारी, response time और अलग-अलग एजेंसियों के बीच coordination को परखने के लिए यह काल्पनिक दुर्घटना तैयार की थी।
Kota Railway: क्या था काल्पनिक हादसे का Scenario?
मॉक ड्रिल के लिए ऐसा दृश्य तैयार किया गया, जैसे तेज रफ्तार Mumbai-Amritsar special passenger train गुड़ला स्टेशन की लाइन नंबर 4 पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई हो।
इस काल्पनिक दुर्घटना में passenger train के S-1 और S-2 कोच को derail होकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़ा हुआ दिखाया गया। शुरुआती mock information में दो लोगों की मौत और चार यात्रियों के गंभीर घायल होने जैसी स्थिति भी बनाई गई, ताकि रेस्क्यू टीमों की प्रतिक्रिया वास्तविक दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में जांची जा सके।
NDTV Rajasthan ने भी पुष्टि की है कि गुड़ला स्टेशन पर ट्रेन हादसे का simulation किया गया था और दो coaches के derail होने की स्थिति बनाकर rescue response की जांच की गई।
Kota Railway: सुबह 8:55 बजे बजा Emergency Siren
रेलवे की मॉक ड्रिल सुबह करीब 8:55 बजे शुरू हुई।
रेलवे कंट्रोल रूम में emergency siren बजने के साथ ही संबंधित अधिकारियों और राहत टीमों को दुर्घटना की सूचना भेजी गई।
इसके बाद डॉक्टरों, रेलवे अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और disaster-response agencies को मौके के लिए रवाना किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 20 मिनट बाद सुबह 9:15 बजे Accident Relief Medical Vehicle घटनास्थल पर पहुंच गया।
NDRF-SDRF समेत कई एजेंसियां पहुंचीं
Kota Railway Mock Drill में केवल रेलवे की टीम ही शामिल नहीं थी।
अभ्यास में NDRF, SDRF, Civil Defence, स्थानीय पुलिस, RPF और रेलवे की मेडिकल व राहत-बचाव टीमों ने हिस्सा लिया।
काल्पनिक रूप से दुर्घटनाग्रस्त coaches में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का अभ्यास किया गया। जरूरत पड़ने पर coach काटकर व्यक्ति को निकालने जैसी परिस्थितियों के लिए gas cutters और दूसरे rescue equipment का भी इस्तेमाल किया गया।
डॉक्टरों की टीम ने mock injured passengers का प्राथमिक उपचार करने और गंभीर घायलों को आगे के इलाज के लिए भेजने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया।
Kota Railway: Kota समेत कई स्टेशनों पर बनाए Emergency Help Desk
अभ्यास को वास्तविक दुर्घटना जैसा बनाने के लिए रेलवे ने communication response को भी जांचा।
कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी और भरतपुर रेलवे स्टेशनों पर emergency help desks सक्रिय किए गए। इसका उद्देश्य यह देखना था कि किसी बड़ी वास्तविक दुर्घटना में यात्रियों के परिवारों और संबंधित लोगों को कितनी जल्दी सही जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
रेल हादसों के दौरान गलत सूचना और अफवाह बड़ी चुनौती होती है। इस वजह से communication और passenger-information system को भी disaster preparedness का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

Kota Railway: सुबह 10:26 बजे खत्म हुई Mock Drill
करीब डेढ़ घंटे चले अभ्यास के बाद सुबह 10:26 बजे वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी पुरुषोत्तम मीणा ने mock drill समाप्त होने की घोषणा की।
इसके बाद Kota DRM अनिल कालरा, NDRF और SDRF अधिकारियों ने पूरे operation की समीक्षा की। Rescue teams के पहुंचने के समय, अलग-अलग विभागों के coordination और emergency procedures को लेकर feedback लिया गया।
रेलवे के Kota Division Disaster Management Plan में भी mock drills के दौरान rescue equipment, पहले व्यक्ति को निकालने में लगे समय और अलग-अलग विभागों की प्रतिक्रिया को record और review करने का प्रावधान है। अभ्यास के बाद deficiencies की पहचान कर उन्हें सुधारने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
Kota Railway: Mock Drill क्यों करता है रेलवे?
रेलवे समय-समय पर इस तरह के अभ्यास इसलिए करता है ताकि असली हादसे की स्थिति में कर्मचारियों और अन्य agencies को मौके पर पहुंचने के बाद प्रक्रिया समझने में समय न लगे।
Mock drill के जरिए मुख्य रूप से यह जांचा जाता है कि दुर्घटना की सूचना कितनी जल्दी control room तक पहुंचती है, Accident Relief Train या medical team को तैयार होने में कितना समय लगता है, फंसे लोगों को कितनी तेजी से बाहर निकाला जा सकता है और रेलवे, NDRF, SDRF, पुलिस व चिकित्सा विभाग आपस में कितना प्रभावी coordination कर पाते हैं।
Kota Railway: सोशल मीडिया पर हादसा समझकर न फैलाएं अफवाह
Kota Railway Mock Drill के दौरान तैयार किया गया दृश्य वास्तविक हादसे जैसा था, इसलिए तस्वीर या वीडियो बिना संदर्भ के सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने पर भ्रम पैदा हो सकता है।
गुड़ला स्टेशन पर 7 अक्टूबर को सामने आया घटनाक्रम किसी वास्तविक passenger train accident का नहीं था। इसमें किसी वास्तविक यात्री की मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं है, क्योंकि दुर्घटना का पूरा scenario प्रशिक्षण और disaster-management exercise का हिस्सा था।
Kota Railway, ऐसे में “गुड़ला में दो ट्रेनें टकराईं” जैसी तस्वीर या वीडियो दिखे तो उसके साथ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह रेलवे की मॉक ड्रिल थी।
रेलवे के लिए इस अभ्यास का मकसद भी यही था कि भविष्य में किसी वास्तविक दुर्घटना की स्थिति पैदा होने पर राहत-बचाव टीमों का response तेज हो और अलग-अलग agencies मिलकर कम से कम समय में यात्रियों तक मदद पहुंचा सकें।
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