Naresh Meena Jaipur March: राजस्थान में DAP-यूरिया की उपलब्धता, खाद की तय कीमत से अधिक वसूली और खाद के साथ कथित रूप से दूसरा सामान खरीदने के लिए मजबूर किए जाने के विरोध में आंदोलन कर रहे नरेश मीणा का जयपुर कूच फिलहाल टल गया है। बुधवार, 7 अक्टूबर को जयपुर की ओर बढ़ रहे उनके काफिले को पुलिस ने शिवदासपुरा-बरखेड़ा चन्दलाई टोल क्षेत्र में रोक दिया। कई घंटे की वार्ता के बाद नरेश मीणा वापस लौट गए, लेकिन उन्होंने साफ किया कि किसानों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन और आमरण अनशन जारी रहेगा।
टोल पर बड़ी संख्या में समर्थकों और पुलिस बल की मौजूदगी के कारण टोंक रोड पर करीब पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया। मौके पर बैरिकेडिंग, वाटर कैनन और भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
Naresh Meena Jaipur March: टोल पर क्यों रोका गया काफिला?
नरेश मीणा पिछले कई दिनों से किसानों से जुड़ी मांगों को लेकर बारां से जयपुर की ओर पदयात्रा कर रहे थे।
उनका कहना है कि किसानों को जरूरत के मुताबिक DAP और यूरिया नहीं मिल रहा, कई स्थानों पर तय कीमत से अधिक राशि वसूली जा रही है और खाद के साथ कीटनाशक, दवाइयां या अन्य कृषि उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है।
7 अक्टूबर को उनका काफिला जयपुर की सीमा के पास पहुंचा तो पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। सुरक्षा के लिए STF, RAC और स्थानीय पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था।
नरेश मीणा ने शुरुआत में कहा था कि वह किसानों की समस्याओं पर मुख्यमंत्री स्तर पर वार्ता चाहते हैं और मांगों का ठोस समाधान होने तक पीछे नहीं हटेंगे।
Naresh Meena Jaipur March: 5 किलोमीटर लंबा जाम, कई घंटे चला घटनाक्रम
काफिला रोके जाने के बाद टोल के आसपास बड़ी संख्या में समर्थक जमा हो गए।
इसके कारण Jaipur-Tonk Road पर यातायात प्रभावित हुआ और करीब पांच किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। पुलिस ने आंदोलनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे और मौके पर वाटर कैनन भी मौजूद था।
स्थिति कई घंटे तक बनी रही। आखिरकार कृषि विभाग और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से बातचीत शुरू की।
Naresh Meena Jaipur March: कृषि विभाग के अधिकारियों से हुई बातचीत
रिपोर्टों के मुताबिक कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने नरेश मीणा और किसान प्रतिनिधियों के साथ खाद की उपलब्धता, तय कीमत पर बिक्री और tagging जैसी शिकायतों पर बातचीत की।
वार्ता के बाद प्रशासन ने खाद की आपूर्ति सुचारु रखने और किसानों की समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद नरेश मीणा ने फिलहाल जयपुर की ओर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया।
नरेश मीणा के मुताबिक मामला CMO स्तर तक पहुंचा और वरिष्ठ अधिकारियों ने तीन से चार दिन में जमीन पर परिणाम दिखाई देने का आश्वासन दिया है। इस दावे की स्वतंत्र सरकारी प्रेस रिलीज फिलहाल सार्वजनिक रूप से नहीं मिली है, इसलिए इसे नरेश मीणा के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
‘कूच खत्म हुआ है, आंदोलन नहीं’
Naresh Meena Jaipur March वापस लेने के बावजूद नरेश मीणा ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार किया है।
उन्होंने कहा कि वह अपने गांव लौटकर भी आमरण अनशन जारी रखेंगे और केवल सरकारी आश्वासन मिलने से आंदोलन खत्म नहीं होगा।
उनका कहना है कि जब तक किसान खुद आकर यह नहीं बताते कि उन्हें पर्याप्त खाद तय कीमत पर मिल रही है और उनकी समस्या वास्तव में खत्म हो गई है, तब तक अनशन जारी रहेगा।
यानी फिलहाल केवल जयपुर कूच रुका है, किसान आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है।

Naresh Meena Jaipur March: बारां से शुरू हुआ था आंदोलन
नरेश मीणा ने खाद और किसानों की दूसरी समस्याओं को लेकर 2 अक्टूबर को बारां में आमरण अनशन शुरू किया था।
इसके बाद उन्होंने जयपुर तक पैदल कूच का ऐलान किया। 4 अक्टूबर से उनकी पदयात्रा आगे बढ़ी और रास्ते में बड़ी संख्या में समर्थक जुड़ते गए। पैदल चलने से पैरों में छाले पड़ने के बाद उनकी ठेले पर यात्रा करते तस्वीरें भी सामने आई थीं।
टोंक पहुंचने के बाद उन्होंने जयपुर में आंदोलन करने और किसानों की मांग सरकार के सामने रखने की घोषणा की थी।
Naresh Meena Jaipur March: किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
नरेश मीणा के आंदोलन में मुख्य रूप से किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त DAP और यूरिया उपलब्ध कराने की मांग है।
इसके साथ ही उनका कहना है कि खाद केवल निर्धारित सरकारी कीमत पर बेचा जाए और किसी किसान को एक बोरी खाद लेने के लिए अतिरिक्त दवा, कीटनाशक या दूसरा उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाए।
खेती के लिए दिन में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने का मुद्दा भी आंदोलन में उठाया गया है।
इस तरह आंदोलन केवल खाद की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि वितरण प्रणाली और कथित overpricing तथा tagging से भी जुड़ा है।
सरकार बोली- राज्य में खाद की कमी नहीं
किसानों की शिकायतों के बीच राज्य सरकार ने अलग तस्वीर पेश की है।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने 7 अक्टूबर को कहा कि राजस्थान में रबी सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हैं। उनके मुताबिक राज्य में करीब 3.72 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.06 लाख मीट्रिक टन DAP, 97 हजार मीट्रिक टन NPK और 2.08 लाख मीट्रिक टन SSP का स्टॉक मौजूद है।
राज्य स्तरीय Fertiliser Distribution Regulatory Task Force ने भी उपलब्धता और वितरण की समीक्षा की है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को किसानों की मांग के अनुसार DAP और यूरिया वितरण तथा केंद्र से आवंटित खाद की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इसलिए मौजूदा विवाद में एक तरफ सरकार पर्याप्त स्टॉक का दावा कर रही है, वहीं आंदोलनकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्धता, वितरण और कीमतों को लेकर शिकायतें उठा रहे हैं।
अब अगले 3-4 दिन अहम
Naresh Meena Jaipur March फिलहाल रुक चुका है, लेकिन किसान आंदोलन का अगला चरण प्रशासन के आश्वासन पर निर्भर करेगा।
नरेश मीणा ने कहा है कि अगर किसानों को जमीन पर राहत दिखाई देती है तो आगे के आंदोलन पर फैसला किया जाएगा। लेकिन खाद की उपलब्धता, निर्धारित कीमत और tagging की शिकायतें बनी रहीं तो आंदोलन फिर तेज किया जा सकता है।
फिलहाल वह अपने गांव लौट गए हैं और उनका कहना है कि आमरण अनशन जारी रहेगा।
ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन अगले तीन-चार दिनों में खाद वितरण को लेकर क्या कदम उठाता है और जिन समस्याओं को लेकर बारां से जयपुर तक आंदोलन हुआ, उनमें किसानों को वास्तविक राहत मिलती है या नहीं।
दूसरी खबरों के लिए The News Canvas पढ़ें।

