Starlink India Row: भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक की सेवाएं शुरू होने में देरी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एलन मस्क और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच हुई बातचीत के बाद केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। सिंधिया ने कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को खुद स्पष्ट नहीं है कि उसे किस दिशा में जाना है।
नई दिल्ली। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर चल रही बहस अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के 10वें संस्करण में स्टारलिंक से जुड़े विवाद पर सरकार का पक्ष रखा।
सिंधिया ने कहा कि केंद्र सरकार किसी एक कंपनी को विशेष लाभ देने के पक्ष में नहीं है। भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को पहले ही लाइसेंस दिए जा चुके हैं। सभी कंपनियों को परिचालन शुरू करने से पहले आवश्यक सुरक्षा मानकों और नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा।
Starlink India Row: कांग्रेस पर सिंधिया का पलटवार
स्टारलिंक विवाद पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी के रुख पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को शायद यह भी नहीं पता कि उसे बाईं तरफ जाना है या दाईं तरफ। उनका कहना था कि पहले कांग्रेस किसी विशेष व्यक्ति को लाइसेंस दिए जाने का विरोध कर रही थी, लेकिन अब उसी व्यक्ति को अनुमति मिलने में देरी पर सवाल उठा रही है।
सिंधिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियों में स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी कभी एक मुद्दे का विरोध करती है और बाद में उसी मुद्दे को लेकर अलग रुख अपना लेती है।
केंद्रीय मंत्री के इस बयान को राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच हालिया सोशल मीडिया बातचीत पर राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
Starlink India Row: तीन कंपनियों को मिल चुके हैं लाइसेंस
Starlink India Row के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए सरकार की नीति स्पष्ट की।
उन्होंने बताया कि देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में किसी एक कंपनी का एकाधिकार नहीं है। सरकार ने तीन कंपनियों को आवश्यक लाइसेंस जारी किए हैं।
Starlink India Row, इनमें एलन मस्क की स्टारलिंक, रिलायंस जियो की सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी और भारती समूह से जुड़ी यूटेलसैट वनवेब शामिल हैं।
सिंधिया के मुताबिक, कंपनियों को अपनी सेवाएं शुरू करने से पहले स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
सरकार का कहना है कि सभी कंपनियों के लिए समान नियम लागू हैं और किसी एक कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
Starlink India Row: एलन मस्क ने भारत में मंजूरी को लेकर उठाए सवाल
स्टारलिंक विवाद की शुरुआत एलन मस्क के सोशल मीडिया पोस्ट से हुई थी। उन्होंने दावा किया कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुके हैं, लेकिन भारत में कई वर्षों तक आवश्यक नियमों का पालन करने के बावजूद कंपनी की सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं।
मस्क ने आरोप लगाया कि भारत में कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके बाद उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि क्या भारत में वास्तविक नियंत्रण उन्हीं के हाथों में है।
मस्क के इन आरोपों ने सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा, सरकारी मंजूरी और कारोबारी प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी।
हालांकि, केंद्र सरकार ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि स्टारलिंक सहित सभी कंपनियों की मंजूरी की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार चल रही है।
Starlink India Row: राहुल गांधी ने एलन मस्क को क्या जवाब दिया?
एलन मस्क के बयान के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस विवाद में शामिल हो गए।
राहुल गांधी ने एक्स पर मस्क को भारत आने का स्वागत संदेश देते हुए इशारों में एक अन्य प्रभावशाली व्यक्ति का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि मस्क को अभी एक और व्यक्ति के बारे में जानना बाकी है।
राहुल गांधी के इस बयान को केंद्र सरकार और देश के बड़े उद्योगपतियों के बीच संबंधों पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा गया।
इसके जवाब में एलन मस्क ने राहुल गांधी को धन्यवाद दिया और स्थिति को चिंताजनक बताया।
दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत के बाद स्टारलिंक की मंजूरी का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बन गया।
Starlink India Row: सुरक्षा मंजूरी के बिना शुरू नहीं होगी स्टारलिंक सेवा
Starlink India Row पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए केवल शुरुआती लाइसेंस प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है।
सभी कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित जांच और आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
संचार मंत्रालय के मुताबिक, स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और यूटेलसैट वनवेब की सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया चल रही है।
सरकार का कहना है कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित कंपनियां आगे की नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी कर सकेंगी।
सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं में डेटा सुरक्षा, नेटवर्क निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से सरकार ने अंतिम मंजूरी देने से पहले निर्धारित मानकों को पूरा करना अनिवार्य बताया है।
Starlink India Row: भारत में स्टारलिंक से क्या बदलेगा?
स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का सबसे बड़ा लाभ उन क्षेत्रों में हो सकता है, जहां फाइबर ब्रॉडबैंड या मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है।
भारत के दूरदराज ग्रामीण इलाकों, पहाड़ी क्षेत्रों और सीमावर्ती स्थानों में सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्टिविटी का एक अतिरिक्त विकल्प बन सकता है।
एलन मस्क भी दावा कर चुके हैं कि स्टारलिंक का उद्देश्य उन लोगों तक इंटरनेट पहुंचाना है, जिन्हें मौजूदा दूरसंचार नेटवर्क से पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
हालांकि, भारत में सेवा शुरू होने की तारीख, उपभोक्ताओं के लिए कीमतें और इंटरनेट प्लान की आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
इसलिए स्टारलिंक भारतीय ग्राहकों के लिए कितना किफायती विकल्प साबित होगा, यह व्यावसायिक सेवाएं शुरू होने के बाद ही पता चल सकेगा।
Starlink India Row: स्टारलिंक विवाद पर आगे क्या होगा?
Starlink India Row में अब सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन का है।
केंद्र सरकार का कहना है कि सभी कंपनियों के लिए नियामकीय व्यवस्था समान है और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
दूसरी ओर, एलन मस्क ने मंजूरी में देरी पर सवाल उठाए हैं, जबकि राहुल गांधी ने इस विवाद को लेकर सरकार पर राजनीतिक कटाक्ष किया है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के ताजा बयान से यह मामला और गरमा गया है। आने वाले समय में देखना होगा कि स्टारलिंक सहित अन्य सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों को भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की अंतिम मंजूरी कब तक मिलती है।
दूसरी खबरों के लिए The News Canvas पढ़ें।

