CIBIL Score After Marriage: शादी के बाद पति-पत्नी एक-दूसरे के सुख-दुख और आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदार बनते हैं। लेकिन क्या शादी के बाद दोनों का सिबिल स्कोर भी आपस में जुड़ जाता है? अगर पति या पत्नी में से किसी एक का क्रेडिट स्कोर खराब है, तो क्या दूसरे को होम लोन मिलने में परेशानी हो सकती है? यह सवाल उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो शादी के बाद घर खरीदने या बड़ा लोन लेने की योजना बना रहे हैं। दरअसल, शादी करने से पति-पत्नी की क्रेडिट हिस्ट्री एक नहीं होती। दोनों का CIBIL स्कोर अलग-अलग रहता है। हालांकि, जॉइंट होम लोन के लिए आवेदन करने पर बैंक दोनों की आर्थिक स्थिति और क्रेडिट रिकॉर्ड की जांच कर सकता है।
CIBIL Score क्या है और लोन के लिए क्यों जरूरी?
CIBIL स्कोर तीन अंकों की एक संख्या होती है, जो किसी व्यक्ति के पिछले कर्ज और भुगतान के रिकॉर्ड के आधार पर उसकी क्रेडिट प्रोफाइल का संकेत देती है। भारत में सामान्यतः यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है।
बैंक और वित्तीय संस्थान लोन देने से पहले आवेदक के क्रेडिट स्कोर, पुराने कर्ज, ईएमआई भुगतान और अन्य आर्थिक जानकारियों की जांच करते हैं।
आमतौर पर 750 या इससे अधिक CIBIL स्कोर अच्छा माना जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि 750 से कम स्कोर होने पर लोन मिल ही नहीं सकता। बैंक अपनी आंतरिक नीतियों, आवेदक की आय और कर्ज चुकाने की क्षमता को भी ध्यान में रखते हैं।
अच्छा क्रेडिट स्कोर होने से लोन की मंजूरी और कुछ मामलों में बेहतर ब्याज दर मिलने में मदद मिल सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक की वित्तीय जागरूकता सामग्री में भी क्रेडिट हिस्ट्री को लोन मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
CIBIL Score After Marriage: क्या शादी से बदल जाता है स्कोर?
शादी के बाद पति-पत्नी का क्रेडिट स्कोर अलग-अलग ही रहता है। इसका मतलब है कि किसी एक व्यक्ति की खराब क्रेडिट हिस्ट्री से दूसरे का स्कोर अपने आप कम नहीं होता।
उदाहरण के लिए, अगर पति का CIBIL स्कोर 800 है और पत्नी का 620 है, तो शादी के बाद दोनों के स्कोर आपस में नहीं जुड़ेंगे। पति का अच्छा स्कोर पत्नी के पुराने खराब रिकॉर्ड को भी अपने आप नहीं सुधार सकता।
इसी तरह, अगर पत्नी ने शादी से पहले किसी क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर नहीं किया था, तो केवल शादी होने के कारण उसका असर पति की क्रेडिट रिपोर्ट पर नहीं पड़ेगा।
क्रेडिट ब्यूरो ट्रांसयूनियन सिबिल ने भी स्पष्ट किया है कि विवाह करने से पति-पत्नी की व्यक्तिगत क्रेडिट रिपोर्ट और क्रेडिट स्कोर आपस में नहीं मिलते।
CIBIL Score: जॉइंट होम लोन में कब बढ़ सकती है परेशानी?
अगर पति-पत्नी मिलकर घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो जॉइंट होम लोन के दौरान दोनों की क्रेडिट हिस्ट्री महत्वपूर्ण हो सकती है।
बैंक आमतौर पर दोनों आवेदकों की आय, पहले से चल रहे लोन, मासिक ईएमआई, क्रेडिट स्कोर और भुगतान के रिकॉर्ड का मूल्यांकन करता है।
मान लीजिए पति का क्रेडिट स्कोर 780 है, जबकि पत्नी का स्कोर 640 है। ऐसे में बैंक जॉइंट लोन आवेदन का मूल्यांकन करते समय दोनों की क्रेडिट प्रोफाइल को ध्यान में रख सकता है।
यदि किसी एक आवेदक ने पहले लोन की किस्तों का भुगतान नहीं किया है या उस पर बहुत ज्यादा कर्ज है, तो बैंक आवेदन को अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाला मान सकता है।
इसका प्रभाव मिलने वाली लोन राशि, ब्याज दर, मंजूरी की शर्तों या आवेदन के निर्णय पर पड़ सकता है। हालांकि, केवल एक पार्टनर का स्कोर कम होने से हर मामले में लोन खारिज होना जरूरी नहीं है।
CIBIL Score: क्या अकेले होम लोन लेने पर भी पड़ेगा असर?
अगर पति या पत्नी में से कोई एक अपने नाम पर होम लोन लेता है, तो बैंक मुख्य रूप से उसी आवेदक की आय, क्रेडिट हिस्ट्री और भुगतान क्षमता का मूल्यांकन करता है।
उदाहरण के लिए, पत्नी का क्रेडिट स्कोर अच्छा है और उसकी नियमित आय पर्याप्त है, लेकिन पति का क्रेडिट रिकॉर्ड कमजोर है। ऐसी स्थिति में पत्नी अपने नाम से होम लोन के लिए आवेदन कर सकती है।
हालांकि, अगर पति उस लोन में सह-आवेदक या गारंटर बनता है, तो बैंक उसके क्रेडिट रिकॉर्ड और आर्थिक जिम्मेदारियों की जांच भी कर सकता है।
इसके अलावा, कुछ बैंकों में संपत्ति के संयुक्त स्वामित्व, सह-आवेदक और अन्य पात्रता संबंधी शर्तें अलग हो सकती हैं। इसलिए आवेदन से पहले बैंक की नीति समझना जरूरी है।
CIBIL Score After Marriage: जॉइंट लोन की EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा?
जॉइंट लोन लेने के बाद समय पर ईएमआई चुकाना दोनों आवेदकों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
अगर पति-पत्नी दोनों लोन के सह-उधारकर्ता हैं और किस्त का भुगतान समय पर नहीं होता, तो इसकी जानकारी दोनों की क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज हो सकती है।
उदाहरण के लिए, पति-पत्नी ने मिलकर 40 लाख रुपये का होम लोन लिया है। यदि लगातार कई महीनों तक ईएमआई नहीं चुकाई जाती, तो दोनों की क्रेडिट हिस्ट्री प्रभावित होने का जोखिम रहता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि किस्त का भुगतान कौन कर रहा है, इससे अधिक महत्वपूर्ण लोन समझौते में तय जिम्मेदारी होती है।
अगर दोनों सह-उधारकर्ता हैं, तो लोन की शर्तों के अनुसार दोनों पर भुगतान की जिम्मेदारी आ सकती है। इसलिए जॉइंट लोन लेने से पहले EMI और अन्य शर्तों को समझना जरूरी है।
CIBIL Score: क्या शादी के बाद पार्टनर का पुराना कर्ज भी चुकाना होगा?
शादी से पहले पति या पत्नी के नाम पर लिया गया पर्सनल लोन सामान्य तौर पर उसी व्यक्ति की जिम्मेदारी होता है, जिसने कर्ज लिया है।
सिर्फ शादी हो जाने से दूसरा पार्टनर उस लोन का सह-उधारकर्ता नहीं बन जाता।
मान लीजिए पति ने शादी से पहले पांच लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया था। ऐसी स्थिति में पत्नी पर केवल विवाह के आधार पर उस कर्ज की व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं आ जाती।
CIBIL Score, लेकिन अगर पत्नी बाद में उसी लोन में गारंटर या सह-उधारकर्ता बनती है, तो उसके लिए कानूनी जिम्मेदारियां पैदा हो सकती हैं।
किसी विशेष मामले में जिम्मेदारी लोन समझौते, गारंटी, संपत्ति के स्वामित्व और लागू कानूनों पर निर्भर करेगी।
CIBIL Score: पति-पत्नी अपना CIBIL Score कैसे बेहतर रखें?
शादी के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत रखने के लिए दोनों पार्टनर को अपनी क्रेडिट हिस्ट्री के बारे में जानकारी रखनी चाहिए।
- समय पर EMI भरें: पर्सनल लोन, कार लोन और होम लोन की मासिक किस्तों का भुगतान निर्धारित तारीख तक करें।
- क्रेडिट कार्ड का बकाया कम रखें: कार्ड की उपलब्ध लिमिट का बहुत ज्यादा हिस्सा लगातार इस्तेमाल करने से बचें।
- पुराने कर्ज की जानकारी साझा करें: दोनों पार्टनर अपनी मासिक ईएमआई और बकाया कर्ज को ध्यान में रखकर नया लोन लेने का फैसला करें।
- बार-बार लोन के लिए आवेदन न करें: कम समय में कई आवेदन करने से क्रेडिट प्रोफाइल प्रभावित हो सकती है।
- क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करें: रिपोर्ट में किसी गलत एंट्री या अनजान लोन की जानकारी मिलने पर संबंधित बैंक और क्रेडिट ब्यूरो से शिकायत करें।
CIBIL Score: साल में एक बार मुफ्त में चेक कर सकते हैं क्रेडिट रिपोर्ट
भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, क्रेडिट हिस्ट्री रखने वाले व्यक्ति प्रत्येक क्रेडिट सूचना कंपनी से एक कैलेंडर वर्ष में एक बार मुफ्त फुल क्रेडिट रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। इसमें क्रेडिट स्कोर की जानकारी भी शामिल होती है।
भारत में ट्रांसयूनियन सिबिल, एक्सपेरियन, इक्विफैक्स और CRIF हाई मार्क जैसी क्रेडिट सूचना कंपनियां इस सुविधा के अंतर्गत आती हैं।
अगर क्रेडिट रिपोर्ट में कोई गलत जानकारी दिखाई देती है, तो सुधार के लिए संबंधित बैंक या क्रेडिट ब्यूरो से संपर्क किया जा सकता है।
इसलिए शादी के बाद होम लोन की योजना बना रहे पति-पत्नी के लिए बेहतर होगा कि दोनों पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करें और नियमित भुगतान की स्थिति का मूल्यांकन करें।
CIBIL Score: होम लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
शादी के बाद CIBIL Score अलग-अलग रहने के बावजूद साझा आर्थिक फैसलों का प्रभाव दोनों पर पड़ सकता है। इसलिए जॉइंट होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले यह समझना जरूरी है कि परिवार की कुल आय कितनी है, पुराने कर्ज कितने हैं और हर महीने आसानी से कितनी ईएमआई चुकाई जा सकती है।
CIBIL Score, अगर किसी एक पार्टनर का क्रेडिट स्कोर कमजोर है, तो उसके सुधार के लिए समय पर भुगतान करना और बकाया कम करना उपयोगी हो सकता है।
वहीं, अगर दूसरा पार्टनर व्यक्तिगत रूप से लोन लेने की पात्रता पूरी करता है, तो उस विकल्प पर भी बैंक से चर्चा की जा सकती है।
मुख्य बात यह है कि शादी के कारण पार्टनर का खराब क्रेडिट स्कोर आपका स्कोर खराब नहीं करता, लेकिन जॉइंट लोन में दोनों की क्रेडिट हिस्ट्री महत्वपूर्ण हो सकती है।
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