Karnataka SIR: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कांग्रेस पर SIR प्रक्रिया के नाम पर विवाद और अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और कथित वोट चोरी को लेकर सवाल उठाए हैं। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया चर्चा के केंद्र में आ गई है।
विजयेंद्र बोले- SIR के नाम पर अराजकता फैलाने की कोशिश
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी SIR प्रक्रिया को लेकर जानबूझकर विवाद पैदा कर रही है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर राज्य में राजनीतिक टकराव बढ़ाया जा रहा है।
विजयेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पुलिस का इस्तेमाल भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है। उनका कहना है कि SIR मतदाता सूची की जांच और उसमें मौजूद अनियमितताओं को दूर करने की प्रक्रिया है। भाजपा ने इस मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर भी आपत्ति जताई है। ये आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं; इनसे संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
Karnataka SIR: क्या है फॉर्म-7 और क्यों हो रहा विवाद?
Karnataka SIR विवाद को समझने के लिए फॉर्म-7 की भूमिका जानना जरूरी है। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, फॉर्म-7 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या निर्धारित कारणों के आधार पर नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।
आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, आवेदन में संबंधित कारण बताना और आवश्यक जानकारी देना जरूरी है। किसी नाम को हटाने का अनुरोध अपने आप नाम हटाए जाने का अंतिम निर्णय नहीं होता। संबंधित चुनाव अधिकारी को नियमानुसार आवेदन और तथ्यों की जांच करनी होती है।
यही प्रक्रिया अब कर्नाटक में राजनीतिक विवाद का विषय बन गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल करके बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि वैध आवेदन करने वाले लोगों को पुलिस कार्रवाई के जरिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
Karnataka SIR: विजयेंद्र ने डीके शिवकुमार के आरोपों को किया खारिज
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और बीवाई विजयेंद्र के बीच भी इस मुद्दे पर बयानबाजी हुई है। शिवकुमार ने आरोप लगाया था कि फॉर्म-7 के जरिए अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़े वर्गों के मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।
विजयेंद्र ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री से अपने दावों के प्रमाण पेश करने की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि भाजपा पर इतने गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उन्हें साबित किया जाना चाहिए। विजयेंद्र ने SIR को चुनाव आयोग की निगरानी में होने वाली प्रक्रिया बताते हुए कहा कि मतदाता सूची से संबंधित आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
Karnataka SIR: फॉर्म-7 आवेदनों को लेकर दर्ज हुई FIR
विवाद के बीच बेंगलुरु के जयनगर विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 आवेदनों को लेकर पुलिस मामला भी सामने आया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 5 अक्टूबर को 5,698 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए कथित तौर पर फर्जी आवेदन जमा किए जाने की शिकायत के बाद दो कथित भाजपा बूथ-स्तरीय एजेंटों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।
यह मामला कांग्रेस की शिकायत से जुड़ा है। FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों को अदालत में साबित होना नहीं माना जाता। मामले में संबंधित तथ्यों और आरोपों की जांच के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
खरगे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा है और कथित वोट चोरी के मुद्दे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हैं।
खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तथा उनकी सेवा शर्तों से जुड़े 2023 के कानून पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को व्यापक कानूनी संरक्षण दिया गया है। ये कांग्रेस के राजनीतिक और कानूनी दावे हैं; इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
Karnataka SIR: SIR विवाद में आगे क्या होगा?
कर्नाटक में SIR और फॉर्म-7 को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव फिलहाल जारी है। भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस ने मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया है।
इस विवाद में अहम बात यह है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े प्रत्येक आवेदन की जांच निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए। किसी भी राजनीतिक दल के आरोप या जवाब को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय संबंधित दस्तावेजों, चुनाव अधिकारियों की कार्रवाई और जांच के नतीजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।
Karnataka SIR, मतदाता अपनी प्रविष्टि की जानकारी और चुनाव संबंधी सेवाओं के लिए भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
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