Om Prakash Mathur को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केरलम का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। इससे पहले वे सिक्किम के राज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी घोषणा में छह राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल की जानकारी दी गई। इस फैसले के तहत ओम प्रकाश माथुर को केरलम और केरलम के तत्कालीन राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नई नियुक्तियां संबंधित राज्य में पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होंगी। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, सिक्किम के लिए दुश्यंत गौतम को नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
राजस्थान के पाली जिले के बेडल गांव में जन्मे माथुर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संगठन की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हुए राज्यसभा सांसद और सिक्किम के राज्यपाल बने। अब उनकी नई नियुक्ति उन्हें केरलम के राजभवन तक ले जा रही है।
Om Prakash Mathur का शुरुआती जीवन और शिक्षा
ओम प्रकाश माथुर का जन्म 2 जनवरी 1952 को राजस्थान के पाली जिले की बाली तहसील के बेडल गांव में हुआ था। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। आधिकारिक जीवनी के अनुसार, वे 1972 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रचारक के रूप में जुड़े और शुरुआती वर्षों में राजस्थान के अलग-अलग जिलों में संगठनात्मक कार्य किया।
उनका शुरुआती राजनीतिक सफर संगठन के जमीनी काम से जुड़ा रहा। वर्ष 1979 से 1989 के बीच उन्होंने किसान संघ में संगठन मंत्री की जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान संगठन में सक्रिय हुए। उनकी राजनीतिक यात्रा में संगठन निर्माण, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क और अलग-अलग राज्यों में पार्टी की जिम्मेदारियां प्रमुख रहीं।
Om Prakash Mathur: राजस्थान BJP से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
ओम प्रकाश माथुर ने भाजपा में कई स्तरों पर काम किया। आधिकारिक जीवनी के अनुसार, वे 1989 से 2002 तक राजस्थान भाजपा में संगठन महामंत्री रहे। वर्ष 2004 में उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारी मिली। उन्होंने राष्ट्रीय सचिव और राष्ट्रीय महामंत्री जैसे पदों पर काम किया। वर्ष 2008 में वे राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने।
माथुर को गुजरात समेत विभिन्न राज्यों में संगठन और चुनाव प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी दी गईं। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने काम किया। इन भूमिकाओं के दौरान उनका काम मुख्य रूप से पार्टी संगठन और चुनावी तैयारियों से जुड़ा रहा।
Om Prakash Mathur: दो बार राज्यसभा सांसद रहे ओम प्रकाश माथुर
ओम प्रकाश माथुर संसद के उच्च सदन राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, वे 2008 से 2014 और फिर 2016 से 2022 तक राज्यसभा सांसद रहे। इस तरह उन्होंने राजस्थान से राष्ट्रीय राजनीति तक अपनी भूमिका निभाई।
राज्यसभा सदस्य रहने से पहले और बाद में भी उनकी पहचान भाजपा के संगठनात्मक काम से जुड़ी रही। पार्टी में अलग-अलग जिम्मेदारियों का उनका अनुभव आगे चलकर राज्यपाल के संवैधानिक पद तक पहुंचने की पृष्ठभूमि बना।
Om Prakash Mathur सिक्किम के राज्यपाल कब बने?
राष्ट्रपति की नियुक्ति के बाद ओम प्रकाश माथुर ने 31 जुलाई 2024 को सिक्किम के 18वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। सिक्किम राजभवन की आधिकारिक जानकारी में उनके शपथ ग्रहण की तारीख और पद का उल्लेख है।
सिक्किम में अपने कार्यकाल के दौरान वे राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल रहे। जुलाई 2026 में सिक्किम सरकार ने उनके कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम भी आयोजित किया था।

Om Prakash Mathur: केरलम के राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी
12 अक्टूबर 2026 को घोषित फेरबदल में ओम प्रकाश माथुर को केरलम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इसी आदेश के तहत केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु भेजा गया और दुश्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया।
Om Prakash Mathur, राज्यपाल का पद संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। नए राज्य में पदभार ग्रहण करने के बाद माथुर की भूमिका संविधान के प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार और विधानसभा से संबंधित कार्यों में होगी। राष्ट्रपति भवन के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नियुक्तियां संबंधित राज्य में पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होंगी।
Om Prakash Mathur, राजस्थान के पाली जिले के बेडल गांव से शुरू हुआ ओम प्रकाश माथुर का सार्वजनिक जीवन अब एक नई जिम्मेदारी के चरण में पहुंचा है। संघ के प्रचारक, भाजपा संगठन के पदाधिकारी, राज्यसभा सांसद और सिक्किम के राज्यपाल के रूप में काम करने के बाद उनकी नियुक्ति केरलम के राज्यपाल के पद पर हुई है।
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