आसलपुर पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में सरला कुमावत, भाजपा की प्रत्याशी के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी कर रही हैं। आसलपुर की पूर्व सरपंच और झोटवाड़ा मंडल अध्यक्ष सरला कुमावत ने गांव के अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने और आसलपुर को आदर्श गांव बनाने का संकल्प जताया है। उनका कहना है कि सरपंच के रूप में पांच साल तक गांव के विकास के लिए काम किया और अब पंचायत समिति के स्तर पर विकास की इस यात्रा को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगी।
‘वादे नहीं, काम की बात’ को अपनी कार्यशैली का आधार बताने वाली सरला कुमावत का कहना है कि पेयजल, सीसी सड़क, पक्की नालियों और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में काम हुए हैं, लेकिन अभी कई कार्य पूरे होने बाकी हैं। पंचायत समिति सदस्य के लिए भाजपा का टिकट मिलने के बाद उन्होंने इन्हीं अधूरे कार्यों को अपनी प्राथमिकता बताया है।
पंचायत समिति सदस्य चुनाव में विकास पर फोकस
आसलपुर में सरपंच के रूप में अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए सरला कुमावत ने कहा कि गांव में मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई काम किए गए। हालांकि, उनके अनुसार विकास की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि गांव को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने का जो सपना देखा था, उसे पूरा करने के लिए अब एक और अवसर मिला है। उनका लक्ष्य है कि विकास का लाभ गांव की हर गली और हर घर तक पहुंचे।
सरला कुमावत के मुताबिक, विकास कार्यों में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। हर वर्ग और हर मोहल्ले की जरूरतों को समझकर समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करना जरूरी है।
‘वादे नहीं, काम की बात’ को बनाएंगी पहचान
सरला कुमावत ने अपनी राजनीतिक सोच को काम और जनसेवा से जोड़ते हुए कहा कि केवल वादे करने के बजाय जमीन पर परिणाम देने की कोशिश होनी चाहिए।
उनका कहना है कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनके समाधान के लिए प्रयास करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने सम्मान, समानता और विकास को अपनी कार्यशैली के महत्वपूर्ण आधार बताया।
पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में उनकी ओर से गांव और क्षेत्र के विकास को प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने रखा जा रहा है।
रोजगार से लेकर मां आशापुरा मंदिर तक विकास की योजना
सरला कुमावत ने आसलपुर के विकास को लेकर कई प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। इनमें रोजगार के अवसर बढ़ाना, मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना और धार्मिक स्थल मां आशापुरा मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना शामिल है।
उनका कहना है कि गांव की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और अधूरी योजनाओं को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आसलपुर को ऐसी पहचान दिलाना उनका सपना है, जहां बेहतर सुविधाएं और विकास के अवसर उपलब्ध हों। पंचायत समिति के स्तर पर जिम्मेदारी मिलने पर इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों तक क्षेत्र की समस्याएं पहुंचाई जाएंगी।
डबल इंजन सरकार से विकास की उम्मीद
सरला कुमावत ने प्रदेश की भाजपा सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने से विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं हैं। उन्होंने पंचायतीराज से जुड़ी घोषणाओं को भी क्षेत्र के विकास की उम्मीदों से जोड़ा।
उनके अनुसार पंचायत समिति क्षेत्र में जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देना जरूरी होगा। स्थानीय जरूरतों के आधार पर समस्याओं की पहचान कर उन्हें संबंधित स्तर पर उठाया जाएगा।
हालांकि, विकास योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन बजट, प्रशासनिक मंजूरी और संबंधित विभागों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
सरपंच से पंचायत समिति सदस्य के चुनाव तक का सफर
आसलपुर की सरपंच के रूप में पांच साल तक जिम्मेदारी निभाने के बाद सरला कुमावत अब पंचायत समिति सदस्य के चुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक भूमिका आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। भाजपा से टिकट मिलने के बाद उनके सामने स्थानीय विकास के अनुभव को व्यापक क्षेत्रीय जरूरतों से जोड़ने की चुनौती होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पद और जिम्मेदारी बदल सकती है, लेकिन जनसेवा का संकल्प कायम रहेगा। उनके मुताबिक, आसलपुर के विकास से जुड़े अधूरे कार्यों को पूरा करने और गांव को आदर्श स्वरूप देने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
सरला कुमावत का संदेश स्पष्ट है—‘वादे नहीं, काम की बात।’ अब चुनाव में उनके विकास संबंधी संकल्प और स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।
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