Alwar Ravan Effigy Market में दशहरे से पहले रावण के पुतलों की मांग बढ़ गई है। राजस्थान के अलवर में कारीगर 5 फीट से लेकर 51 फीट तक के रावण तैयार कर रहे हैं। इनकी कीमत 1,500 रुपये से शुरू होकर 40 हजार रुपये तक पहुंच रही है। खास बात यह है कि इस काम में एक-दो दिन नहीं, बल्कि करीब तीन महीने की मेहनत लगती है। कारीगर अजीत और उनका पूरा परिवार पुश्तैनी हुनर को आगे बढ़ाने में जुटा है।
दशहरे पर रावण दहन की परंपरा के बीच अलवर का यह बाजार कारीगरों की मेहनत, पारंपरिक कला और परिवार की आजीविका की कहानी भी बयां कर रहा है। छोटे पुतलों से लेकर विशालकाय रावण तक, ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग आकार के पुतले बनाए जा रहे हैं।
Alwar Ravan Effigy Market: 5 से 51 फीट तक के पुतले
अलवर में रावण के पुतले बनाने वाले कारीगर अजीत के मुताबिक, उनके यहां अलग-अलग आकार के पुतले तैयार किए जाते हैं। इनमें 5 फीट, 10 फीट, 15 फीट और 50 से 51 फीट तक के विशालकाय रावण शामिल हैं।
ग्राहक अपने आयोजन और जरूरत के अनुसार पुतले का आकार तय कर सकते हैं। छोटे पुतलों की कीमत कम होती है, जबकि बड़े पुतलों को तैयार करने में ज्यादा सामग्री, समय और मेहनत लगती है। इसी वजह से इनकी कीमत भी आकार के अनुसार बढ़ती जाती है।
Alwar Ravan Effigy Market: बांस-बल्ली, अखबार और रंगीन कागज से बनता है रावण
रावण का पुतला तैयार करने के लिए सबसे पहले बांस और बल्लियों से उसका ढांचा बनाया जाता है। इसके बाद तार की मदद से संरचना को मजबूती दी जाती है। अखबार, लेई और रंग-बिरंगे कागजों से पुतले को आकार देकर आकर्षक रूप दिया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया में कारीगरों को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। पुतले की ऊंचाई जितनी ज्यादा होती है, उसके ढांचे को तैयार करने और मजबूती देने में उतनी ही अधिक मेहनत लगती है।
कारीगर अजीत ने बताया कि पुतले बनाने के लिए जरूरी सामान दिल्ली से मंगवाया जाता है। सामग्री जुटाने से लेकर ढांचा तैयार करने और अंतिम सजावट तक हर चरण में समय लगता है।
Alwar Ravan Effigy Market: 1,500 से 40 हजार रुपये तक कीमत
अलवर के रावण बाजार में हर ग्राहक के लिए अलग-अलग बजट के विकल्प मौजूद हैं। कारीगर अजीत के अनुसार, 5 फीट के रावण की कीमत करीब 1,500 रुपये है, जबकि 51 फीट के विशालकाय पुतले की कीमत लगभग 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती है।
| पुतले की ऊंचाई | अनुमानित कीमत |
|---|---|
| 5 फीट | 1,500 रुपये |
| 10 फीट | आकार और ऑर्डर के अनुसार |
| 15 फीट | आकार और ऑर्डर के अनुसार |
| 50–51 फीट | 40,000 रुपये तक |
बड़े पुतलों को बनाने में सामग्री की मात्रा और ढांचे की जटिलता बढ़ जाती है। इसलिए उनकी कीमत छोटे पुतलों की तुलना में काफी अधिक होती है। वास्तविक कीमत ग्राहक के ऑर्डर और पुतले की बनावट के अनुसार तय की जाती है।
Alwar Ravan Effigy Market: तीन महीने से जुटा पूरा परिवार
रावण के पुतले बनाने का काम केवल एक कारीगर तक सीमित नहीं है। अजीत के मुताबिक, उनका पूरा परिवार पिछले करीब तीन महीने से इस काम में लगा हुआ है। दशहरे से पहले मिलने वाले ऑर्डर समय पर पूरे करने के लिए सभी सदस्य मिलकर मेहनत करते हैं।
एक पुतले को तैयार करने में कई चरण होते हैं। पहले ढांचा बनता है, फिर उसे आकार दिया जाता है और आखिर में रंगीन कागजों से सजाया जाता है। बड़े पुतलों में यह प्रक्रिया और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
त्योहार के नजदीक आने के साथ कारीगरों के लिए समय पर ऑर्डर पूरा करना महत्वपूर्ण हो जाता है। महीनों की मेहनत के बाद तैयार पुतले दशहरे के आयोजनों का हिस्सा बनते हैं।
दादा-परदादा से मिली हुनर की विरासत
अजीत के परिवार के लिए रावण बनाना केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है। उन्होंने बताया कि उनके दादा-परदादा बांस का काम करते थे। परिवार ने इसी हुनर को आगे बढ़ाया और अब रावण के पुतले तैयार कर अपनी पहचान बनाए हुए है।
बदलते समय के बावजूद परिवार ने अपने पारंपरिक काम को जारी रखा है। दशहरे के मौके पर यह हुनर उन्हें काम और आमदनी का अवसर देता है। परिवार के सदस्य मिलकर इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसे सीख सकें।
दशहरे की रौनक बढ़ा रहे कारीगर
अलवर में तैयार हो रहे रावण के पुतले दशहरे की तैयारियों का अहम हिस्सा हैं। एक ओर लोग रावण दहन के आयोजन की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कारीगर महीनों की मेहनत से पुतलों को अंतिम रूप दे रहे हैं।
इन पुतलों के पीछे बांस, कागज और रंगों से कहीं ज्यादा एक परिवार का अनुभव, मेहनत और परंपरा जुड़ी है। अलवर का यह रावण बाजार दिखाता है कि त्योहारों की रौनक बढ़ाने में स्थानीय कारीगरों और उनके पुश्तैनी हुनर की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
अलवर से प्रदीप गोयल की रिपोर्ट
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