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रेलवे की पटरियां सालभर धूप, बारिश और खुले वातावरण में रहती हैं, फिर भी उन पर आम लोहे जैसी मोटी जंग आसानी से दिखाई नहीं देती।
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असल में रेलवे ट्रैक पर भी ऑक्सीडेशन यानी जंग लगने की प्रक्रिया होती है।
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लेकिन यह जंग सामान्य लोहे की चीजों की तरह लंबे समय तक सतह पर जमा नहीं रह पाती।
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रेलवे की पटरियां मजबूत और खास गुणवत्ता वाले स्टील से तैयार की जाती हैं।
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इस स्टील में कार्बन सहित कई तत्वों का अनुपात नियंत्रित रखा जाता है, जिससे पटरी ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनती है।
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रेल की पटरियों को इस तरह बनाया जाता है कि वे भारी वजन, लगातार दबाव और तेज घर्षण को लंबे समय तक सह सकें।
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ट्रेन के पहियों और पटरी के बीच लगातार होने वाला घर्षण भी ट्रैक की ऊपरी सतह को साफ करता रहता है।
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इसी घर्षण के कारण सतह पर बनने वाली हल्की जंग बार-बार हटती रहती है, इसलिए रेलवे ट्रैक चमकदार दिखाई देता है और जंग जमा हुई नजर नहीं आती।
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