उंगलियों में बंधी विरासत! Raju Bhatt की डोर पर आज भी नाचती Kathputli | Rajasthan Tourism | TNC |
राजस्थान की पहचान महलों और किलों से आगे उसकी जीवंत लोककलाओं में भी बसती है। ऐसी ही एक विरासत है कठपुतली कला, जिसकी डोर राजू भाट के परिवार में तीन पीढ़ियों से संभाली जा रही है। दादा भूरा भाट से पिता कन्हैयालाल और अब राजू तक पहुंची यह परंपरा नागौर-मारवाड़ की लोकभूमि से जयपुर तक अपना सफर तय कर चुकी है। मोबाइल और डिजिटल मनोरंजन के दौर में भी कठपुतली का जीवंत आकर्षण कायम है। कलाकारों के घर आज भी कार्यशाला हैं, परिवार के बड़े गुरु हैं और पर्यटन इस कला को नए दर्शकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। देखिए Rajasthan Folk Culture की यह खास कहानी The News Canvas पर।
