Rajasthan Congress में भरतपुर-डीग नगर निकाय चुनाव के बाद शुरू हुआ अंदरूनी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने एक बार फिर डीग जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव चौधरी को निशाने पर लिया है। इस बार उन्होंने डीग नगर परिषद में कांग्रेस के टिकट पर लड़े पांच उम्मीदवारों को मिले वोटों का हवाला देते हुए टिकट वितरण और जिला संगठन की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
विश्वेंद्र सिंह का आरोप है कि गलत उम्मीदवार चयन के कारण कांग्रेस को डीग नगर परिषद में नुकसान उठाना पड़ा। उनके बयान में इस्तेमाल “शर्मनाक परिणाम” राजनीतिक टिप्पणी है; चुनावी आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस ने डीग नगर परिषद के 40 में से सिर्फ पांच वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे और किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली।
Rajasthan Congress: पांच उम्मीदवारों को कितने वोट मिले?
विश्वेंद्र सिंह ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में जिन पांच वार्डों का उल्लेख किया, उनके वोटों की संख्या उपलब्ध चुनावी आंकड़ों से मेल खाती है।
वार्ड-1 में कांग्रेस के हेमराज सैनी को 243 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर निर्दलीय सोमनाथ अरोड़ा 333 वोट लेकर विजयी हुए।
वार्ड-10 में कांग्रेस प्रत्याशी प्रियंकेश को केवल 14 वोट मिले। निर्दलीय पायल कुमारी ने 290 वोट के साथ जीत दर्ज की, जबकि दूसरे स्थान पर रही शीला को 285 वोट मिले।
वार्ड-12 में कांग्रेस के बच्चू सिंह मीणा को 56 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। यहां निर्दलीय विजेंद्र मीणा ने चुनाव जीता।
वार्ड-34 में कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद कासोटिया को 86 वोट मिले और वे चौथे स्थान पर रहे। इस वार्ड से निर्दलीय पुष्पेंद्र कुमार विजयी हुए।
वहीं वार्ड-37 में कांग्रेस के सोहन लाल को 10 वोट मिले। BJP के धर्मेंद्र 268 वोट लेकर विजयी रहे।
इन पांचों उम्मीदवारों के मत जोड़ें तो कांग्रेस को कुल 409 वोट मिले।

Rajasthan Congress: विश्वेंद्र सिंह ने राजीव चौधरी पर क्या आरोप लगाए?
Rajasthan Congress में विश्वेंद्र सिंह का आरोप है कि डीग जिला संगठन ने योग्य और पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया और टिकट चयन सही तरीके से नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि डीग नगर परिषद के 40 वार्डों में कांग्रेस ने जिन पांच प्रत्याशियों को अधिकृत उम्मीदवार बनाया, उनके परिणामों पर पार्टी संगठन को आत्ममंथन करना चाहिए।
यह विश्वेंद्र सिंह का संगठनात्मक और राजनीतिक आकलन है। केवल चुनावी हार से यह अपने-आप सिद्ध नहीं होता कि उम्मीदवारों का चयन गलत था या इसके लिए अकेले जिला अध्यक्ष जिम्मेदार थे।
चुनावी रिकॉर्ड से इतना जरूर स्पष्ट है कि डीग नगर परिषद के 40 वार्डों में कांग्रेस का कोई उम्मीदवार विजयी नहीं हुआ। निर्दलीयों ने 24 और BJP ने 16 सीटें जीतीं।
Rajasthan Congress: पहले भी राजीव चौधरी से रहा है विवाद
विश्वेंद्र सिंह और डीग जिला कांग्रेस संगठन के बीच विवाद नया नहीं है।
अगस्त 2026 में नगर निकाय चुनाव से पहले भी विश्वेंद्र सिंह ने जिला संगठन की ओर से जारी वार्ड प्रभारियों की सूची पर नाराजगी जताई थी। उनका आरोप था कि सूची में उनका नाम लिखने के बजाय सिर्फ “कांग्रेस प्रत्याशी विधानसभा डीग-कुम्हेर” लिखा गया। उन्होंने इसे अपने राजनीतिक कद का अपमान बताया था।
जून में भी उन्होंने भरतपुर जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा और डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी की संगठनात्मक कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक सवाल उठाए थे।
इस तरह मौजूदा विवाद निकाय चुनाव परिणाम के बाद अचानक शुरू हुआ टकराव नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से स्थानीय कांग्रेस संगठन में चली आ रही असहमति का हिस्सा है।

Rajasthan Congress: यशवीर सूरा ने भी उठाए विश्वेंद्र सिंह की भूमिका पर सवाल
विश्वेंद्र सिंह की आलोचना के बाद कांग्रेस के भीतर से उनके खिलाफ भी सवाल उठे हैं।
कांग्रेस नेता यशवीर सूरा की ओर से सामने आए प्रतिवाद में यह तर्क दिया गया कि भरतपुर-डीग की हार की पूरी जिम्मेदारी केवल जिलाध्यक्षों पर नहीं डाली जा सकती और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर भी चर्चा होनी चाहिए।
इस संदर्भ में भरतपुर नगर निगम के मेयर चुनाव का मुद्दा भी उठाया गया है। भरतपुर के 65 वार्डों में 36 निर्दलीय जीते थे, BJP को 20 और कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं। बाद में निर्दलीय उम्मीदवार विचित्रा सिंह ने मेयर पद से नामांकन वापस ले लिया और BJP की अनुराधा सिंह के निर्विरोध मेयर बनने का रास्ता साफ हो गया।
इस घटनाक्रम की राजनीतिक जिम्मेदारी को लेकर कांग्रेस के अंदर अलग-अलग नेताओं के अलग-अलग दावे हैं।
Rajasthan Congress: एक दिन पहले डोटासरा पर भी बोला था हमला
Rajasthan Congress में विश्वेंद्र सिंह ने एक दिन पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी सीधे निशाने पर लिया था।
उन्होंने भरतपुर और डीग में निकाय चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन के लिए स्थानीय जिलाध्यक्षों के साथ प्रदेश नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाया था। विश्वेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि दोनों जिलाध्यक्षों ने अपने करीबी लोगों को टिकट दिया और पुराने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया।
भरतपुर और डीग के कुल 415 वार्डों में कांग्रेस को सिर्फ 19 सीटें मिली थीं। निर्दलीयों ने 262 और BJP ने 131 सीटें जीती थीं।
Rajasthan Congress: RAS भर्ती का पुराना विवाद भी फिर उठाया
विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा को लेकर RAS-2016 और RAS-2018 से जुड़ा पुराना मुद्दा भी फिर उठाया है।
उन्होंने डोटासरा की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया और उनके भाई-बहन को इंटरव्यू में समान 80-80 अंक मिलने का जिक्र किया। यहां एक नाम को लेकर पुराने और नए विवरण में अंतर है। 2021 की समकालीन रिपोर्टों में प्रतिभा की बहन का नाम ‘प्रभा पूनिया’ लिखा गया था, जबकि मौजूदा राजनीतिक पोस्ट और कुछ नई रिपोर्टों में ‘प्रज्ञा’ लिखा गया है। पुरानी रिपोर्टों के मुताबिक प्रतिभा, गौरव और प्रभा को इंटरव्यू में 80-80 अंक मिले थे।
हालांकि इन अंकों के आधार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। डोटासरा ने उस समय किसी गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा था कि RAS चयन RPSC की प्रक्रिया के तहत होता है और उनके रिश्तेदारों के चयन में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं था। उन्होंने जांच के लिए तैयार होने की बात भी कही थी।
Rajasthan Congress: OBC सर्टिफिकेट को लेकर भी दोहराए आरोप
विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के बेटे अविनाश सिंह के RAS-2016 चयन और OBC non-creamy layer certificate को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
इसी तरह के आरोप जून 2026 में राजस्थान के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने भी लगाए थे और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच तथा FIR की मांग की थी। हालांकि ये आरोप हैं; सार्वजनिक रूप से उपलब्ध किसी अंतिम जांच या न्यायिक निष्कर्ष में इन्हें साबित बताया जाना अभी उचित नहीं होगा।
डोटासरा पहले RAS चयन में अपने परिजनों को लाभ पहुंचाने के आरोपों को खारिज कर चुके हैं।
Rajasthan Congress में पंचायत चुनाव से पहले बढ़ी अंदरूनी खींचतान
Rajasthan Congress का यह विवाद ऐसे समय बढ़ रहा है जब राज्य में पंचायत चुनाव की तैयारी चल रही है।
भरतपुर और डीग में निकाय चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के बाद टिकट वितरण, स्थानीय नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी को लेकर सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप ने संगठन की आंतरिक असहमति को सामने ला दिया है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व भरतपुर-डीग के नतीजों की औपचारिक समीक्षा करता है या नहीं और जिला संगठन में किसी तरह का बदलाव होता है या मौजूदा नेतृत्व के साथ ही पंचायत चुनाव की तैयारी आगे बढ़ती है।
चुनावी आंकड़े डीग नगर परिषद में कांग्रेस की कमजोर स्थिति की पुष्टि करते हैं, लेकिन उस हार के लिए किस नेता या संगठनात्मक फैसले की कितनी जिम्मेदारी थी, यह राजनीतिक बहस का विषय है।
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