Kharge on Gyanesh Kumar: मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष का हमला और तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है और आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यह कांग्रेस और विपक्ष का राजनीतिक आरोप है, जिसे चुनाव आयोग और BJP खारिज कर चुके हैं।
खरगे ने हाल की कांग्रेस कार्यसमिति और INDIA ब्लॉक की बैठकों में SIR, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, EVM और चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराने और pre-SIR electoral rolls को बहाल करने की मांग भी रखी।
Kharge on Gyanesh Kumar: CEC को हटाने की मांग क्यों?
कांग्रेस अध्यक्ष ने हाल में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को मोदी सरकार का “puppet” बताते हुए कहा कि उन्हें पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी CEC पर दबाव डालने का आरोप लगाया और नैतिक आधार पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की। ये कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक आरोप हैं; इनके समर्थन में कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
विवाद की पृष्ठभूमि The Indian Express की उस रिपोर्ट से जुड़ी है जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब दस महीनों में SIR और electoral-roll प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं।
Kharge on Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग का पक्ष क्या है?
चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर कहा है कि उसके भीतर लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और internal checks सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
आयोग की 23 सितंबर की आधिकारिक प्रतिक्रिया के मुताबिक SIR सहित सभी अंतिम निर्णय पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ECI ने कहा कि उसके सभी official orders और administrative directions कानून तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी किए गए।
26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने SIR प्रक्रिया में कुछ बदलाव भी किए। नोटिस पाने वाले unmapped या logical discrepancy वाले मतदाताओं के दस्तावेज BLO उनके घर जाकर एकत्र कर सकते हैं और सामान्य तौर पर उन्हें ERO/AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा।
Kharge on Gyanesh Kumar: 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च
Kharge on Gyanesh Kumar विवाद के बीच INDIA ब्लॉक ने SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ साझा आंदोलन कार्यक्रम घोषित किया है।
विपक्षी दल 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में जिला स्तर पर “Save Democracy March” आयोजित करेंगे। इसके बाद 6 अक्टूबर को लोकसभा और राज्यसभा के विपक्षी सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे।
विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय भी मांगेंगे और चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची को लेकर अपनी चिंताएं उनके सामने रखने की योजना बना रहे हैं।
इसके अलावा अक्टूबर-नवंबर में पांच बड़ी रैलियां करने की तैयारी है। इनमें 1 नवंबर को दिल्ली में एक बड़ी रैली भी प्रस्तावित है।
Kharge on Gyanesh Kumar: बैलेट पेपर की मांग पर सभी विपक्षी दल सहमत
INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद खरगे ने कहा कि बैठक में शामिल नेताओं के बीच EVM की जगह paper ballot से चुनाव कराने की मांग पर सहमति बनी।
उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था में भरोसा बढ़ाने के लिए भविष्य के चुनावों में बैलेट पेपर की व्यवस्था वापस लाई जानी चाहिए। यह विपक्ष की राजनीतिक मांग है। चुनाव आयोग लगातार EVM व्यवस्था का बचाव करता रहा है।
Kharge on Gyanesh Kumar: जयराम रमेश का 14 करोड़ मतदाताओं वाला दावा
गुरुवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर हमला तेज किया।
रमेश ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त O.P. Rawat की टिप्पणियों का हवाला देते हुए दावा किया कि SIR के कारण करीब 14 करोड़ मतदाता disenfranchise हुए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।
लेकिन यहां एक जरूरी तथ्यात्मक अंतर है। “करीब 14 करोड़ मतदाता अपने वोट से हमेशा के लिए वंचित हो गए” कहना अभी सही नहीं होगा।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक SIR के दौरान लगभग 13 करोड़ नाम electoral rolls से हटे या बाहर रहे, लेकिन कई नाम appeals और verification के बाद वापस भी जोड़े गए हैं और सभी चरणों का अंतिम consolidated आंकड़ा अभी प्रकाशित नहीं हुआ है। इसलिए 14 करोड़ को अंतिम permanent deletion मानना भ्रामक हो सकता है।
Kharge on Gyanesh Kumar: O.P. Rawat ने क्या सवाल उठाए?
पूर्व CEC O.P. Rawat ने SIR से जुड़े विवाद पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने रिपोर्ट किए गए Form-6 बदलावों को “absolutely wrong and illegal” कहा और आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों को “very serious” और “unfortunate” बताया।
Rawat ने electoral-roll software के केंद्रीकरण और field officials की authority को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसके अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और SIR प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है।
Kharge on Gyanesh Kumar: Supreme Court तक भी पहुंचा विवाद
CEC और SIR से जुड़ा विवाद अब अदालत तक भी पहुंच चुका है।
Supreme Court एक अलग याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हुआ है जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और आयोग के collective decision-making process पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में SIR से जुड़े फैसलों की वैधता पर भी प्रश्न उठाए गए हैं।
वहीं INDIA ब्लॉक 2023 के उस कानून को भी Supreme Court में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है जो Chief Election Commissioner और अन्य Election Commissioners की नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित है।
Kharge on Gyanesh Kumar: SIR विवाद में आगे क्या?
Kharge on Gyanesh Kumar विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। विपक्ष ने सड़क पर आंदोलन, संसद सदस्यों का चुनाव आयोग मार्च, राष्ट्रपति से मुलाकात और कानूनी रास्ते—चारों स्तर पर कार्रवाई की योजना बनाई है।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग का आधिकारिक रुख है कि SIR और उससे जुड़े अंतिम फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं। आयोग ने voter verification आसान करने और ECINet से जुड़ी प्रक्रिया की समीक्षा के लिए भी कदम घोषित किए हैं।
ऐसे में आगे की तस्वीर 6 अक्टूबर के विपक्षी मार्च, Supreme Court में होने वाली सुनवाई और SIR के अंतिम voter-roll आंकड़े सामने आने के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी।
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