Vishvendra Singh Resign Update: राजस्थान कांग्रेस में पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह को लेकर शुक्रवार, 2 अक्टूबर को तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच नया मोड़ आ गया है। सुबह उनके सोशल मीडिया संदेश को कांग्रेस से इस्तीफे के रूप में देखा गया और कई मीडिया संस्थानों ने उनके पार्टी छोड़ने की खबर प्रकाशित कर दी। लेकिन कुछ ही देर बाद खुद विश्वेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि कांग्रेस आलाकमान को लिखे पत्र के जरिए अपने इस्तीफे के संकेत दिए हैं।
विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से भी बातचीत हुई है और उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपनी बात बता दी है। उनके इस स्पष्टीकरण के बाद अब सवाल यह है कि उनका पत्र औपचारिक resignation letter है या पार्टी नेतृत्व को दिया गया राजनीतिक अल्टीमेटम।
फिलहाल उपलब्ध उनके ताजा बयान के आधार पर दूसरा विकल्प ज्यादा स्पष्ट दिखाई देता है—यानी उन्होंने कांग्रेस छोड़ने की चेतावनी जरूर दी है, लेकिन औपचारिक इस्तीफे की पुष्टि नहीं की।
Vishvendra Singh Resign Update: ‘मैंने त्यागपत्र के संकेत दिए हैं’
मीडिया से बातचीत में विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को पत्र के जरिए अपनी नाराजगी और इस्तीफे के संकेत बता दिए हैं।
उन्होंने कहा, “मैंने अपने त्यागपत्र के संकेत दिए हैं।”
विश्वेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि उनकी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से बातचीत हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मुंबई में होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को स्थिति की जानकारी है।
इस बयान का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि कुछ घंटे पहले तक मीडिया रिपोर्टों में उनके पत्र को औपचारिक इस्तीफा बताया जा रहा था। Indian Express समेत कई संस्थानों ने भी इसे कांग्रेस से उनके exit के तौर पर रिपोर्ट किया।
लेकिन स्वयं नेता की बाद की स्पष्ट टिप्पणी के बाद खबर को उनके नवीनतम बयान के आधार पर अपडेट करना जरूरी है।
Vishvendra Singh Resign Update: ‘कल आए लोग मुझे नहीं चला सकते’
विश्वेंद्र सिंह ने स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व पर अपना हमला भी जारी रखा।
उन्होंने कहा कि हाल में पार्टी में आए नेता उन्हें निर्देश नहीं दे सकते और न ही उनके खिलाफ रिपोर्ट देकर उनकी राजनीतिक भूमिका तय कर सकते हैं।
उनका बयान था कि “कल आए लोग मुझे नहीं चला सकते… वो क्या मेरे खिलाफ रिपोर्ट देंगे?”
यह टिप्पणी भरतपुर और डीग में नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद शुरू हुई कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान से जुड़ी है। पिछले कुछ दिनों से विश्वेंद्र सिंह भरतपुर और डीग जिला कांग्रेस नेतृत्व पर टिकट वितरण में पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से भी इस्तीफे की मांग की थी।
ये विश्वेंद्र सिंह के राजनीतिक आरोप हैं। स्थानीय कांग्रेस नेताओं और डोटासरा ने उनके आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
Vishvendra Singh Resign Update: ‘भरतपुर में लोकसभा चुनाव किसने जिताया?’
विश्वेंद्र सिंह ने बातचीत के दौरान 2024 के भरतपुर लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया।
उन्होंने सवाल किया कि सभी जानते हैं कि भरतपुर में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव किसने जिताया और सांसद संजना जाटव की जीत के पीछे किसने मेहनत की।
उनका यह दावा राजनीतिक योगदान से जुड़ा उनका अपना आकलन है। चुनाव का प्रमाणित तथ्य यह है कि 2024 के भरतपुर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की संजना जाटव ने 5,79,890 वोट हासिल कर BJP के रामस्वरूप कोली को 51,983 वोट से हराया था।
किस एक नेता का उस जीत में कितना योगदान था, इसका कोई आधिकारिक चुनावी आंकड़ा नहीं होता।
Vishvendra Singh Resign Update: सचिन पायलट का भी किया जिक्र
विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि 2023 विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को भरतपुर में जीत मिली और उनके मुताबिक उस दौरान सचिन पायलट के अलावा पार्टी का कोई बड़ा नेता प्रचार के लिए नहीं आया था।
इसी बीच Patrika ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि सचिन पायलट ने विश्वेंद्र सिंह से फोन पर बात की और उन्हें मनाने की कोशिश की। हालांकि इस फोन कॉल की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सचिन पायलट की ओर से फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए इसे पुष्ट तथ्य के बजाय सूत्र-आधारित रिपोर्ट के तौर पर ही लिखना उचित होगा।
विश्वेंद्र सिंह और सचिन पायलट 2020 के राजस्थान कांग्रेस संकट के दौरान भी एक ही राजनीतिक खेमे में दिखाई दिए थे।
Vishvendra Singh Resign Update: आखिर उनके पत्र में ऐसा क्या था कि इस्तीफे की खबर फैल गई?
इस पूरे भ्रम की वजह विश्वेंद्र सिंह का सोशल मीडिया पर जारी संदेश है।
उन्होंने पत्र में लिखा कि कुछ नेताओं के बयानों से उनके कार्यकर्ता नाराज हैं और वह स्वयं भी आहत हैं। उन्होंने कांग्रेस की मौजूदा कार्यसंस्कृति और कथित “चापलूसी की परंपरा” पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह अपने सम्मान और सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकते।
पत्र के अंत में उन्होंने पार्टी नेतृत्व को “अलविदा” कहने और उसकी “रीति-नीति” के साथ कदमताल न कर पाने जैसी भाषा इस्तेमाल की।
इसी भाषा के कारण इसे तत्काल resignation letter माना गया। बाद में विश्वेंद्र सिंह ने इसे “इस्तीफे के संकेत” बताया।
क्या कांग्रेस उनके खिलाफ कार्रवाई करने वाली थी?
Vishvendra Singh Resign Update में यह दूसरा बड़ा सवाल है।
हाल के दिनों में विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर और डीग जिलाध्यक्षों तथा PCC अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर सार्वजनिक हमले किए थे। इसके बाद उनके बयानों की संगठनात्मक स्तर पर रिपोर्ट तैयार किए जाने की खबरें सामने आईं।
लेकिन अभी तक कांग्रेस की ओर से सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई show-cause notice, suspension order या expulsion order सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि पार्टी ने विश्वेंद्र सिंह को निकालने का अंतिम फैसला कर लिया था।
इसलिए “निष्कासन से पहले इस्तीफे की तैयारी” जैसी बात को राजनीतिक चर्चा या सूत्रों के दावे से आगे नहीं ले जाना चाहिए।
Vishvendra Singh Resign Update: डोटासरा से क्यों बढ़ा विवाद?
इस विवाद की जड़ हालिया भरतपुर-डीग नगर निकाय चुनाव के नतीजों में है।
विश्वेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि दोनों जिलों में गलत टिकट वितरण और कार्यकर्ताओं की अनदेखी के कारण कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा। इसके बाद उन्होंने सीधे प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर हमला किया और उनसे पद छोड़ने की मांग कर दी।
उन्होंने डोटासरा के परिवार से जुड़े पुराने RAS, OBC certificate और भर्ती मामलों की जांच की मांग भी उठाई।
ये आरोप पहले भी राजस्थान की राजनीति में उठते रहे हैं, लेकिन इन्हें किसी अंतिम दोषसिद्धि या स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
Vishvendra Singh Resign Update: अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि विश्वेंद्र सिंह ने अपने नवीनतम सार्वजनिक बयान में कांग्रेस से औपचारिक इस्तीफा देने से इनकार किया है।
उनका कहना है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को इस्तीफे के संकेत दिए हैं और अपनी नाराजगी साफ कर दी है।
ऐसे में उनकी कांग्रेस सदस्यता की स्थिति पर अंतिम तस्वीर तब स्पष्ट होगी जब या तो विश्वेंद्र सिंह औपचारिक resignation letter जारी करें, या कांग्रेस नेतृत्व उनकी सदस्यता/अनुशासनात्मक कार्रवाई पर कोई आधिकारिक फैसला सार्वजनिक करे।
इस बीच उनका ताजा बयान साफ करता है कि मामला फिलहाल पूर्ण राजनीतिक अलगाव से ज्यादा कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनाने और संगठन के भीतर चल रहे विवाद का रूप लिए हुए है।
अब निगाह विश्वेंद्र सिंह की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस नेतृत्व की अगली प्रतिक्रिया पर रहेगी।
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