भारतीय रेलवे तेजी से डीजल से बिजली की ओर बढ़ चुका है। मार्च 2026 तक देश के कुल 70,142 रूट किलोमीटर ब्रॉड गेज नेटवर्क में से करीब 69,873 रूट किलोमीटर का विद्युतीकरण पूरा हो चुका था। यानी भारतीय रेलवे का लगभग 99.6% ब्रॉड गेज नेटवर्क इलेक्ट्रिक हो गया है। इसके बावजूद रेलवे अभी डीजल इंजनों को पूरी तरह अलविदा नहीं कह रहा।
सवाल उठता है कि जब Railway Electrification लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच चुका है तो आखिर डीजल इंजन की जरूरत क्यों है? इसका जवाब केवल बचे हुए गैर-विद्युतीकृत रूट नहीं हैं। आपदा, बिजली सप्लाई बाधित होने, OHE खराब होने, शंटिंग और राहत कार्यों में डीजल इंजन आज भी रेलवे के लिए जरूरी बैकअप हैं। रेल मंत्रालय ने खुद डीजल लोकोमोटिव को अपने crisis management plan के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
99.6% तक पहुंचा Railway Electrification
भारत में Railway Electrification ने पिछले एक दशक में बहुत तेज रफ्तार पकड़ी है। रेल मंत्रालय के मुताबिक 2014 में करीब 21,801 रूट किलोमीटर ब्रॉड गेज लाइन इलेक्ट्रिफाइड थी। मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 69,873 RKM पहुंच गया।
इस तरह कुल 70,142 RKM ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग 99.6 प्रतिशत हिस्सा बिजली के दायरे में आ चुका है। बाकी हिस्सों पर भी विद्युतीकरण का काम जारी है।
सरकार का लक्ष्य शेष ब्रॉड गेज नेटवर्क को भी जल्द इलेक्ट्रिफाइड करना है।
आखिर RKM क्या होता है?
RKM यानी Route Kilometre रेलवे नेटवर्क की लंबाई मापने का तरीका है।
मान लीजिए दो शहरों के बीच रेलवे रूट की दूरी 100 किलोमीटर है। अगर उस रूट पर दो, तीन या चार समानांतर ट्रैक भी हों, तब भी route kilometre की गणना मुख्य रूप से उन दोनों स्थानों के बीच की रूट दूरी से की जाती है।
इसी आधार पर भारतीय रेलवे अपने Railway Electrification के आंकड़े जारी करता है।
डीजल की खपत में भारी गिरावट
तेजी से हुए Railway Electrification का सबसे बड़ा असर डीजल की खपत पर पड़ा है।
रेल मंत्रालय के अनुसार 2015-16 में रेलवे ट्रैक्शन के लिए करीब 293 करोड़ लीटर डीजल इस्तेमाल करता था। 2024-25 तक यह घटकर करीब 108 करोड़ लीटर रह गया।
यानी करीब नौ वर्षों में डीजल की खपत लगभग 185 करोड़ लीटर कम हुई है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता और कार्बन उत्सर्जन दोनों घटे हैं।
PIB के एक अन्य सरकारी आकलन के मुताबिक विद्युतीकरण के कारण 2024-25 में करीब 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई और इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन को डीजल की तुलना में काफी अधिक किफायती बताया गया है।
जब लगभग सब इलेक्ट्रिक है तो डीजल इंजन क्यों?
यहीं Railway Electrification की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।
रेलवे नेटवर्क पर बिजली पहुंच जाना और डीजल इंजन की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाना दो अलग बातें हैं।
इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को चलने के लिए ऊपर लगे Overhead Equipment यानी OHE से लगातार बिजली चाहिए। अगर किसी वजह से बिजली सप्लाई बंद हो जाए या OHE क्षतिग्रस्त हो जाए तो इलेक्ट्रिक इंजन उस सेक्शन में आगे नहीं बढ़ सकता।
डीजल इंजन के साथ यह समस्या नहीं होती। वह अपना ईंधन साथ लेकर चलता है और बाहरी बिजली सप्लाई पर निर्भर नहीं रहता।
1. आपदा के समय सबसे बड़ा बैकअप
डीजल इंजन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका emergency और disaster management में है।
रेल मंत्रालय ने मार्च 2026 में साफ कहा था कि diesel locomotives Indian Railways के crisis management plan के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके रखरखाव और reliability पर इसलिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
तूफान, बाढ़, रेल दुर्घटना या किसी दूसरी प्राकृतिक आपदा में OHE टूट सकता है। ऐसे समय में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव उस हिस्से में बेकार हो सकता है, लेकिन डीजल इंजन राहत ट्रेन या फंसी हुई ट्रेन को खींच सकता है।
इसलिए 100 प्रतिशत Railway Electrification के बाद भी कुछ डीजल इंजन standby रखना व्यावहारिक जरूरत बनी रहेगी।
2. OHE टूट गया तो क्या होगा?
इलेक्ट्रिक ट्रेन के लिए overhead wire उसकी lifeline है।
अगर तेज तूफान में पेड़ गिर जाए, बिजली का तार टूट जाए या तकनीकी खराबी के कारण OHE supply बंद हो जाए तो उस सेक्शन में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव नहीं चल पाएगा।
ऐसी स्थिति में डीजल इंजन को प्रभावित इलाके में भेजकर ट्रेन को सुरक्षित स्थान तक खींचा जा सकता है।
रेलवे के disaster management documents में भी दुर्घटना राहत ट्रेनों के लिए डीजल लोकोमोटिव की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
3. बिजली ग्रिड फेल होने पर भी काम आएगा डीजल
Railway Electrification का एक स्वाभाविक जोखिम यह है कि व्यवस्था बिजली सप्लाई पर निर्भर होती है।
अगर बड़े इलाके का power grid प्रभावित हो जाए तो रेल नेटवर्क के कई इलेक्ट्रिक सेक्शन एक साथ प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसे मामलों में डीजल इंजन emergency backup के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसलिए रेलवे अपने पूरे diesel fleet को अचानक खत्म करने के बजाय सीमित संख्या में operational condition में रखता है।
4. शंटिंग में भी काम आते हैं डीजल इंजन
रेलवे में हर इंजन केवल लंबी दूरी की ट्रेन खींचने के लिए इस्तेमाल नहीं होता।
स्टेशन, रेल यार्ड, maintenance shed और siding में coaches या wagons को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की प्रक्रिया को shunting कहा जाता है।
इन जगहों पर हर लाइन के ऊपर OHE उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है। कई यार्ड और industrial sidings में operational flexibility के लिए डीजल लोकोमोटिव उपयोगी होते हैं।
रेलवे के disaster management documents में भी local shunting में इस्तेमाल होने वाले diesel locomotives को जरूरत पड़ने पर Accident Relief Train के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था का उल्लेख है।
5. Accident Relief Train के लिए जरूरी
रेल दुर्घटना होने पर रेलवे को तुरंत Accident Relief Train और medical relief units मौके पर भेजने होते हैं।
अगर दुर्घटना की वजह से overhead electric wire क्षतिग्रस्त हो चुका है तो वहां इलेक्ट्रिक इंजन भेजना संभव नहीं होगा।
ऐसी स्थिति में डीजल लोकोमोटिव की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
इसलिए Railway Electrification पूरा होने का अर्थ यह नहीं कि railway disaster response को भी पूरी तरह electric traction पर निर्भर कर दिया जाए।
6. हर रेलवे लाइन Broad Gauge नहीं
99.6 प्रतिशत का आंकड़ा भारतीय रेलवे के Broad Gauge Network से संबंधित है।
भारत में कुछ heritage और छोटी gauge वाली रेल सेवाएं भी मौजूद हैं। इनमें Darjeeling Himalayan Railway, Kalka-Shimla जैसे ऐतिहासिक नेटवर्क शामिल हैं।
इन विशेष नेटवर्क की operating technology सामान्य broad gauge mainline network से अलग हो सकती है।
इसलिए 99.6 प्रतिशत Railway Electrification को पूरे देश की हर प्रकार की रेलवे लाइन पर सीधे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
इलेक्ट्रिक इंजन के फायदे क्या हैं?
भारतीय रेलवे के लिए बिजली पर जाने के कई फायदे हैं।
इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव डीजल के मुकाबले energy efficient हैं। इनमें acceleration बेहतर हो सकता है, haulage capacity बढ़ती है और imported fossil fuel पर निर्भरता घटती है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक रेल के जरिए एक टन माल को एक किलोमीटर ले जाने पर सड़क परिवहन की तुलना में करीब 89 प्रतिशत कम CO₂ emission होता है।
इसी वजह से Railway Electrification को रेलवे के net-zero और green mobility goals का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
बिजली के साथ LNG और Hydrogen पर भी काम
रेलवे केवल conventional electricity और diesel के बीच ही विकल्प नहीं तलाश रहा।
27 सितंबर 2026 को अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली LNG-powered train को हरी झंडी दिखाई गई। सरकार इसे रेल परिवहन में cleaner fuel की दिशा में एक और कदम बता रही है।
इससे पहले जुलाई 2026 में भारत की पहली Hydrogen Fuel Cell Train भी शुरू की गई। रेलवे के मुताबिक इस ट्रेन ने शुरुआती संचालन में 1,200 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर 3,200 लीटर से अधिक डीजल की खपत बचाई।
यानी भविष्य में भारतीय रेलवे का energy mix केवल traditional diesel और overhead electricity तक सीमित नहीं रहने वाला।
क्या आने वाले समय में पूरी तरह खत्म हो जाएगा डीजल?
मुख्य लाइन पर नियमित passenger और freight operations में डीजल की भूमिका लगातार कम होना तय है।
Railway Electrification लगभग पूरा होने के कारण अधिकांश ट्रेनें इलेक्ट्रिक traction से चल सकती हैं। सरकार भी डीजल की खपत लगातार कम करने की दिशा में काम कर रही है।
लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि रेलवे एक निश्चित तारीख पर हर डीजल इंजन को कबाड़ में भेज देगा।
आपदा प्रबंधन, OHE failure, rescue operation, shunting और operational backup जैसे कार्यों के लिए कुछ diesel locomotives की जरूरत बनी रह सकती है।
आसान शब्दों में समझें
भारतीय रेलवे की स्थिति को एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है।
मान लीजिए किसी बड़ी इमारत में 24 घंटे बिजली की शानदार व्यवस्था है। इसके बावजूद वहां emergency generator रखा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि बिजली व्यवस्था कमजोर है, बल्कि generator उस स्थिति के लिए है जब main supply किसी कारण से बंद हो जाए।
भारतीय रेलवे में डीजल इंजन की भूमिका भी कुछ हद तक ऐसी ही होती जा रही है।
Railway Electrification के कारण सामान्य ट्रेनों को चलाने के लिए diesel की जरूरत बहुत कम हो गई है, लेकिन emergency और operational backup के तौर पर यह तकनीक अभी भी उपयोगी है।
इसीलिए भारतीय रेलवे का 99.6 प्रतिशत broad gauge network इलेक्ट्रिक होने के बावजूद डीजल इंजन पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। आने वाले वर्षों में उनकी संख्या और नियमित इस्तेमाल भले ही घटता जाए, लेकिन आपदा, शंटिंग और विशेष परिस्थितियों में उनकी जरूरत फिलहाल बनी रहने वाली है।

