Kishore Kumar Death Anniversary: हिंदी सिनेमा के महान पार्श्वगायक, अभिनेता और फिल्म निर्माता किशोर कुमार की आज 39वीं पुण्यतिथि है। अपनी अनोखी आवाज, शानदार अभिनय और बेबाक अंदाज से करोड़ों दिलों में जगह बनाने वाले किशोर दा का निधन 13 अक्टूबर 1987 को मुंबई में हुआ था। उस समय उनकी उम्र महज 58 साल थी। आज भी उनके गाने हर पीढ़ी के संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं। लेकिन पर्दे पर हमेशा हंसाने वाले किशोर कुमार की जिंदगी का एक बेहद भावुक पहलू भी था, जिसके बारे में उनके बेटे अमित कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया था।
अमित कुमार के मुताबिक, एक बार किशोर दा मशहूर गायक मुकेश का गाना ‘आ अब लौट चलें’ सुनकर बच्चों की तरह रोने लगे थे। यह गीत सुनते ही उन्हें अपना जन्मस्थान खंडवा याद आ गया और उन्होंने वापस लौटने की इच्छा जताई। अपने बेटे की नजरों में किशोर कुमार बड़े सितारे होने के बावजूद दिल से एक साधारण इंसान थे।
Kishore Kumar Death Anniversary: मुकेश का गाना सुनकर क्यों रो पड़े?
किशोर कुमार के बेटे और गायक अमित कुमार ने फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में अपने पिता से जुड़ा दिलचस्प किस्सा साझा किया था।
अमित कुमार ने बताया कि उनके पिता को रेडियो सुनना बहुत पसंद था। जब रेडियो पर दूसरे गायकों की तुलना में किशोर कुमार के गाने अधिक बजते थे, तो वे बच्चों की तरह खुश हो जाते थे।
लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने उनके परिवार को भी भावुक कर दिया।
Kishore Kumar Death Anniversary, उस दिन किशोर कुमार रेडियो पर फिल्म जिस देश में गंगा बहती है का गीत ‘आ अब लौट चलें’ सुन रहे थे। इस गीत को मुकेश ने अपनी आवाज दी थी।
गाने के बोल और उसकी भावनाओं का किशोर कुमार पर इतना गहरा असर पड़ा कि उनकी आंखों से आंसू निकल आए। अमित कुमार के अनुसार, किशोर दा ने उसी समय अपने जन्मस्थान खंडवा वापस जाने की इच्छा जाहिर की।
उनके लिए खंडवा केवल एक शहर नहीं, बल्कि बचपन की यादों और अपनी जड़ों से जुड़ा स्थान था। यही वजह थी कि इतनी सफलता हासिल करने के बाद भी उनका मन अपने पुराने शहर में बसने को करता था।
Kishore Kumar Death Anniversary: मुंबई में शोहरत मिली, लेकिन खंडवा से नहीं टूटा रिश्ता
किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था। उनका वास्तविक नाम आभास कुमार गांगुली था।
खंडवा में बचपन बिताने के बाद वे फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए मुंबई पहुंचे। यहां उन्होंने गायन, अभिनय, संगीत निर्देशन और फिल्म निर्माण जैसे कई क्षेत्रों में काम किया।
Kishore Kumar Death Anniversary, लेकिन सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने के बावजूद उनका अपने जन्मस्थान से लगाव बना रहा।
अमित कुमार ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता खंडवा को बहुत याद करते थे।
किशोर कुमार स्वयं भी अपने जीवन के अंतिम दौर में मुंबई छोड़कर खंडवा लौटने की इच्छा जता चुके थे।
उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर को खंडवा ले जाया गया और वहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया। आज यह शहर किशोर कुमार की सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है।
Kishore Kumar Death Anniversary: एक बंगाली गाने के लिए लेने से मना कर दी थी फीस
किशोर कुमार को लेकर अक्सर तरह-तरह के किस्से सुनने को मिलते हैं। लेकिन बेटे अमित कुमार ने अपने पिता के एक ऐसे फैसले के बारे में बताया था, जो उनके संवेदनशील स्वभाव को सामने लाता है।
अमित कुमार के अनुसार, एक बार किशोर दा बंगाली गीत ‘एई तो जीवन’ की रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इस गीत को प्रसिद्ध गीतकार गौरी प्रसन्न मजूमदार ने लिखा था।
गाने में जीवन की सच्चाई और मृत्यु के बाद इंसान के अहंकार, ईर्ष्या तथा दुश्मनी के समाप्त हो जाने की बात कही गई थी।
गीत की भावनाओं ने किशोर कुमार को गहराई तक प्रभावित किया।
अमित कुमार ने बताया कि रिकॉर्डिंग के दौरान वे इतने भावुक हो गए कि उन्होंने गाने के लिए पारिश्रमिक लेने से ही इनकार कर दिया।
यह किस्सा इसलिए भी चर्चित है क्योंकि किशोर कुमार अपने काम के बदले समय पर भुगतान लेने को लेकर बेहद सजग माने जाते थे।
हालांकि, बेटे के मुताबिक वे जरूरतमंद लोगों की सहायता भी करते थे और कई अवसरों पर बिना फीस लिए कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे।
Kishore Kumar Death Anniversary: स्टारडम के दिखावे से रहते थे दूर
किशोर कुमार के व्यक्तित्व का एक दिलचस्प पहलू यह भी था कि वे फिल्मी पार्टियों और दिखावे से अक्सर दूरी बनाए रखते थे।
अमित कुमार ने बताया था कि उनके बड़े भाई अशोक कुमार अपने दौर के प्रसिद्ध अभिनेता थे। मुंबई के वर्ली स्थित उनके घर पर अक्सर बड़ी हस्तियों का आना-जाना लगा रहता था।
जब किशोर कुमार अपने करियर के शुरुआती दौर में थे, तब वे भी इन आयोजनों का हिस्सा बनते थे।
लेकिन उन्हें शराब पीने या देर रात तक पार्टियों में समय बिताने का शौक नहीं था।
अमित के मुताबिक, ऐसे अवसरों पर उनके पिता कई बार हाजी अली के पास जाकर समय बिताते थे और सुबह तक वहीं आराम करते थे।
उनकी जीवनशैली भी अपेक्षाकृत अनुशासित थी। वे सुबह जल्दी उठना और रात में जल्दी सोना पसंद करते थे।
खाने के मामले में उन्हें पारंपरिक बंगाली व्यंजन पसंद थे। इनमें पूरी-तरकारी, आलू-गोभी, मटन करी और मछली से बने व्यंजन शामिल थे।
Kishore Kumar Death Anniversary: हॉलीवुड फिल्मों के इतने शौकीन कि खर्च कर दिए 8 हजार डॉलर
किशोर कुमार केवल संगीत और अभिनय के ही दीवाने नहीं थे। उन्हें हॉलीवुड की फिल्में देखने और उनका संग्रह तैयार करने का भी जबरदस्त शौक था।
अमित कुमार ने फिल्मफेयर को बताया था कि उनके पिता के पास जेम्स बॉन्ड, अल्फ्रेड हिचकॉक और पुरानी हॉलीवुड फिल्मों का शानदार संग्रह था।
वे घर पर 16 एमएम प्रोजेक्टर की मदद से भी फिल्में देखा करते थे।
एक बार परिवार के साथ अमेरिका की यात्रा के दौरान किशोर कुमार एक वीडियो स्टोर पर पहुंचे। वहां फिल्मों का विशाल संग्रह देखकर वे इतने उत्साहित हुए कि लगातार फिल्मों की रिकॉर्डिंग खरीदते चले गए।
अमित कुमार के मुताबिक, इस खरीदारी पर लगभग 8,000 डॉलर खर्च हुए थे।
किशोर कुमार को पुरानी हॉलीवुड फिल्मों और कलाकारों से विशेष लगाव था। गैरी कूपर उनके पसंदीदा अभिनेताओं में शामिल थे, जबकि मार्लन ब्रैंडो के अभिनय के वे बड़े प्रशंसक थे।
Kishore Kumar Death Anniversary: अपनी शर्तों पर जीते थे किशोर कुमार
किशोर कुमार को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में कई दिलचस्प कहानियां मशहूर हैं। कुछ निर्माता उन्हें बेहद अलग स्वभाव का कलाकार मानते थे, लेकिन अमित कुमार के अनुसार, उनके पिता अपने काम और सिद्धांतों को लेकर स्पष्ट सोच रखते थे।
अमित ने बताया था कि उनके पिता को कलाकारों के आर्थिक संघर्ष का अनुभव था। इसीलिए वे अपने पारिश्रमिक को लेकर सतर्क रहते थे।
इसके बावजूद किशोर कुमार ने जरूरतमंद लोगों के लिए कई कार्यक्रम किए। उन्होंने सैनिकों और कैंसर मरीजों की सहायता के लिए बिना फीस लिए प्रस्तुतियां भी दी थीं।
उनकी निजी जिंदगी में गंभीरता और हास्य दोनों मौजूद थे। यही विशेषता उनके अभिनय और संगीत में भी दिखाई देती थी।
Kishore Kumar Death Anniversary: 58 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उस समय वे मुंबई स्थित अपने घर पर थे।
अमित कुमार ने अपने पिता के अंतिम दिन को याद करते हुए बताया था कि उस समय वे टोरंटो में थे और कुछ दिनों बाद भारत लौटने वाले थे।
Kishore Kumar Death Anniversary, घर पर किशोर कुमार फर्नीचर की जगह बदल रहे थे। इसी दौरान उन्हें तकलीफ महसूस हुई और वे बिस्तर पर लेट गए।
उनकी पत्नी लीना चंदावरकर ने डॉक्टर को बुलाने की बात कही थी। अमित के अनुसार, किशोर कुमार ने उस समय भी अपने चिरपरिचित अंदाज में मजाक किया था।
लेकिन कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया।
संयोग से 13 अक्टूबर उनके बड़े भाई अशोक कुमार का जन्मदिन भी था। इस घटना ने भारतीय फिल्म और संगीत जगत को गहरा सदमा दिया।
Kishore Kumar Death Anniversary: 39 साल बाद भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं किशोर दा
किशोर कुमार ने हिंदी सिनेमा में एक गायक, अभिनेता, संगीतकार, निर्माता और निर्देशक के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
उनकी आवाज में रोमांस, दर्द, मस्ती और जीवन की भावनाओं को व्यक्त करने की अनोखी क्षमता थी। उन्होंने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन और कई अन्य बड़े अभिनेताओं के लिए यादगार गीत गाए।
आज उनकी 39वीं पुण्यतिथि पर मुकेश का गीत सुनकर भावुक होने और बंगाली गीत के लिए फीस छोड़ देने जैसे किस्से उनके व्यक्तित्व का मानवीय पक्ष सामने लाते हैं।
किशोर कुमार भले ही 13 अक्टूबर 1987 को इस दुनिया से विदा हो गए, लेकिन उनकी गायकी, फिल्मों और यादों की विरासत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच जीवित है।
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