Jantar Mantar Protest Ban: दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता विजय रेड्डी ने दिल्ली पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर पार्टी को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से रोका गया। विजय रेड्डी ने दिल्ली पुलिस से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी मार्च का आह्वान किया जा सकता है।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर की जगह तीन नए प्रदर्शन स्थल निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं। पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर यह बदलाव किया है।
Jantar Mantar Protest Ban पर विजय रेड्डी का बड़ा आरोप
सीजेपी नेता विजय रेड्डी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं।
रेड्डी के मुताबिक, उनकी पार्टी लंबे समय से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए जगह मांग रही है। उनका कहना है कि जंतर-मंतर देश की जनता का स्थान है और वहां नागरिकों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने CJP को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया।
हालांकि, अमित शाह की ओर से CJP के प्रदर्शन को रोकने का कोई व्यक्तिगत निर्देश दिए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस के प्रकाशित आदेश में प्रदर्शन स्थल बदलने का आधार गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों को बताया गया है।
Jantar Mantar Protest Ban: दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम
विजय रेड्डी ने दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति के संबंध में स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।
उनके अनुसार, पुलिस की ओर से प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करने की शर्त बताई गई थी। उन्होंने कहा कि CJP इस प्रक्रिया का पालन करने को तैयार है, लेकिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख और अनुमति को लेकर स्पष्ट निर्णय होना चाहिए।
रेड्डी ने बताया कि इस संबंध में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में औपचारिक पत्र सौंपा गया है।
उन्होंने पुलिस प्रशासन को 24 घंटे में जवाब देने का अल्टीमेटम दिया। उनका कहना है कि अगर निर्धारित समय में कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो पार्टी आगे आंदोलन की रणनीति तय करेगी।
Jantar Mantar Protest Ban: देशव्यापी मार्च की चेतावनी
CJP नेता विजय रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठाना चाहती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सकारात्मक फैसला नहीं करती है, तो देशभर के लोगों से दिल्ली की ओर मार्च करने की अपील की जा सकती है।
रेड्डी के मुताबिक, यह विवाद केवल एक राजनीतिक संगठन को प्रदर्शन की अनुमति मिलने या नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। इसका संबंध नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार से भी है।
हालांकि, देशव्यापी मार्च की औपचारिक तारीख, मार्ग या विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
Jantar Mantar Protest Ban: जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से क्यों हटाया गया?
दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया।
पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए वैकल्पिक स्थानों का अध्ययन करने हेतु एक समिति गठित की थी।
समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर की जगह तीन नए स्थल निर्धारित किए गए।
यह आदेश 28 अप्रैल 2022 के पुराने स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक बदलाव करता है। दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि नए प्रदर्शन स्थलों के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP अलग से जारी की जाएगी।
Jantar Mantar Protest Ban: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए कौन-से नए स्थल तय हुए?
दिल्ली पुलिस ने राजधानी में विरोध प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए निम्न स्थान अधिकृत किए हैं:
- रामलीला मैदान: मध्य दिल्ली का प्रमुख सार्वजनिक आयोजन स्थल।
- बुराड़ी मैदान: उत्तरी दिल्ली में बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध स्थान।
- सीबीडी ग्राउंड: पूर्वी दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र में स्थित मैदान।
इन स्थलों को अधिकृत करने के पीछे बड़े प्रदर्शन आयोजित करने के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का उद्देश्य बताया गया है।
दूसरी तरफ विरोध करने वाले संगठनों का सवाल है कि जंतर-मंतर जैसे केंद्रीय स्थान से प्रदर्शन हटाने का असर उनकी बात सरकार और संबंधित संस्थानों तक पहुंचाने पर पड़ सकता है।
Jantar Mantar Protest Ban: 13 अक्टूबर को CJP कार्यकर्ताओं की हिरासत से विवाद बढ़ा
Jantar Mantar Protest Ban को लेकर विवाद के बीच मंगलवार, 13 अक्टूबर को CJP के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, CJP से जुड़े प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर क्षेत्र में पहुंचे थे।
इनमें आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे सहित अन्य प्रदर्शनकारियों का उल्लेख किया गया है।
प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में संशोधन और कथित वोट कटौती के मुद्दे पर विरोध जता रहे थे। चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है।
इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और नागरिक अधिकारों को लेकर चल रही चर्चा को और तेज कर दिया है।
Jantar Mantar Protest Ban: INDIA गठबंधन के मार्च पर अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च पर भी प्रतिक्रिया दी है।
दीपके ने कहा कि वह विपक्षी गठबंधन के प्रदर्शन को महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार, मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े सवालों को लेकर विपक्षी दलों का एकजुट होकर आवाज उठाना जरूरी है।
12 अक्टूबर को राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के संशोधन के विरोध में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, जबकि चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए गए पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
Jantar Mantar Protest Ban: मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़ी CJP
अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन को जारी रखने की बात कही।
उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।
दीपके ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के मामले में पर्याप्त जवाबदेही नहीं दिखाई गई।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मामलों में समय पर न्यायिक हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है।
हालांकि, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के संबंध में लगाए गए आरोप अभी विवादित हैं। चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
Jantar Mantar Protest Ban: प्रदर्शन करने का अधिकार और कानून-व्यवस्था का सवाल
Jantar Mantar Protest Ban ने नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य निर्धारित आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
पुलिस प्रशासन के पास यातायात, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी होती है।
दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी संगठनों का तर्क है कि विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान ऐसे होने चाहिए, जहां जनता अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से सामने रख सके।
जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के फैसले के बाद अब इसी संतुलन को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं।
Jantar Mantar Protest Ban की बड़ी बातें
- दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया।
- CJP नेता विजय रेड्डी ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने पर नाराजगी जताई।
- रेड्डी ने अमित शाह के निर्देश पर प्रदर्शन रोके जाने का आरोप लगाया, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
- CJP ने दिल्ली पुलिस से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा।
- मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी मार्च की चेतावनी दी गई।
- रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड नए अधिकृत प्रदर्शन स्थल बनाए गए।
- अभिजीत दीपके ने INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया।
- CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।
Jantar Mantar Protest Ban: अब दिल्ली पुलिस के जवाब पर नजर
Jantar Mantar Protest Ban को लेकर CJP और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है।
एक तरफ पुलिस प्रशासन ने गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए नए प्रदर्शन स्थल निर्धारित किए हैं। दूसरी तरफ CJP जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग पर कायम है।
Jantar Mantar Protest Ban, विजय रेड्डी के 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद अब पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
साथ ही यह देखना भी अहम होगा कि CJP का प्रस्तावित देशव्यापी मार्च केवल चेतावनी तक सीमित रहता है या संगठन कोई औपचारिक आंदोलन कार्यक्रम घोषित करता है।
फिलहाल जंतर-मंतर के मुद्दे ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के अधिकार, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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