Dungarpur Ward Reservation: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच डूंगरपुर नगर परिषद के वार्ड आरक्षण को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। नगर परिषद के 40 वार्डों की आरक्षण लॉटरी पूरी होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कुछ SC और ST आरक्षित वार्डों पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन के सामने आपत्ति दर्ज कराई है। भाजपा नेताओं का दावा है कि जिन कुछ वार्डों को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया है, वहां संबंधित वर्ग की आबादी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
भाजपा नेताओं ने जिला कलेक्टर देशलदान के सामने विरोध दर्ज कराते हुए वार्डवार वर्गीय जनसंख्या का रिकॉर्ड सामने रखने, आरक्षण प्रक्रिया की समीक्षा कराने और जरूरत पड़ने पर संबंधित वार्डों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराने की मांग की। पार्टी नेताओं ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ तो वे न्यायालय का रुख कर सकते हैं।
दूसरी ओर जिला प्रशासन का कहना है कि आरक्षण की प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर की गई है। कलेक्टर ने भाजपा की ओर से उठाए गए सवालों की जांच कराने की बात भी कही है।

Dungarpur Ward Reservation: 40 वार्डों की निकली आरक्षण लॉटरी
डूंगरपुर नगर परिषद के आगामी चुनाव के लिए जिला परिषद के EDP सभागार में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया आयोजित की गई। नगर परिषद में कुल 40 वार्ड हैं और इन्हीं के लिए अलग-अलग वर्गों तथा महिलाओं का आरक्षण निर्धारित किया गया।
लॉटरी प्रक्रिया शुरू होने से पहले जिला कलेक्टर देशलदान और एडीएम प्रकाशचंद्र रैगर ने उपस्थित लोगों को आरक्षण की प्रक्रिया तथा उससे जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी। इसके बाद SC, ST, OBC और महिला आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
लॉटरी समाप्त होने के बाद ही भाजपा के कुछ नेताओं ने आरक्षित किए गए वार्डों की जनसंख्या संरचना पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
SC के लिए वार्ड 6, 7 और 8 आरक्षित
Dungarpur Ward Reservation में अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग के लिए नगर परिषद के वार्ड नंबर 6, 7 और 8 आरक्षित किए गए हैं। इसके बाद इन्हीं आरक्षित सीटों में महिला आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि इनमें से कुछ वार्डों में संबंधित वर्ग की वास्तविक आबादी और आरक्षण के आधार की दोबारा जांच होनी चाहिए।
पार्टी का कहना है कि अगर आरक्षण का आधार जनसंख्या है तो प्रशासन को वार्डवार आंकड़े सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
Dungarpur Ward Reservation ST के लिए इन 5 वार्डों का हुआ आरक्षण
नगर परिषद में ST यानी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए वार्ड नंबर 3, 11, 23, 25 और 28 आरक्षित किए गए। इसके बाद इनमें महिला वर्ग के लिए भी लॉटरी निकाली गई।
इसी हिस्से को लेकर भाजपा की ओर से सबसे ज्यादा सवाल उठाए गए हैं।
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा नेताओं ने विशेष तौर पर वार्ड नंबर 7, 23 और 25 का उल्लेख करते हुए इनकी वर्गवार आबादी की दोबारा जांच कराने की मांग की है।
BJP का सवाल- आबादी नहीं तो आरक्षण का आधार क्या?
Dungarpur Ward Reservation के विरोध के दौरान भाजपा नेताओं का मुख्य सवाल आरक्षित वर्ग की आबादी को लेकर रहा।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ वार्डों में जिस वर्ग के लिए आरक्षण किया गया है, उस वर्ग की पर्याप्त आबादी नहीं है। ऐसे में प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि उन वार्डों को आरक्षित करने के लिए कौन-से जनसंख्या आंकड़े इस्तेमाल किए गए।
यह भाजपा का आरोप है। प्रशासन ने अभी यह नहीं माना है कि आरक्षण प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई है।
कलेक्टर की ओर से स्पष्ट किया गया कि वार्ड आरक्षण जनसंख्या के आधार पर किया गया है और भाजपा द्वारा उठाई गई आपत्तियों की जांच कराई जाएगी।
Dungarpur Ward Reservation: वार्ड 23 और 25 को लेकर खास आपत्ति
भाजपा नेताओं की ओर से वार्ड नंबर 23 और 25 को लेकर भी विशिष्ट सवाल उठाए गए।
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा का दावा है कि वार्ड 23 में OBC और वार्ड 25 में SC आबादी है, जबकि दोनों वार्ड ST श्रेणी में आरक्षित किए गए हैं। पार्टी ने प्रशासन से इन दावों का जनसंख्या रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन करने की मांग की है।
यह दावा फिलहाल भाजपा की ओर से किया गया है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उपलब्ध आधिकारिक जनसंख्या रिकॉर्ड में इन वार्डों की वास्तविक स्थिति क्या है।
Dungarpur Ward Reservation: विधायक शंकर डेचा ने भी जताई आपत्ति
सागवाड़ा से भाजपा विधायक शंकरलाल डेचा भी आरक्षण प्रक्रिया को लेकर पार्टी नेताओं के साथ सामने आए। उन्होंने प्रशासन से आरक्षण के आधार को स्पष्ट करने और आपत्तियों का समाधान करने की मांग का समर्थन किया।
डेचा सागवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान भाजपा विधायक हैं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि वार्ड आरक्षण किसी भी उम्मीदवार के पूरे चुनावी समीकरण को बदल देता है, इसलिए प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
BJP जिलाध्यक्ष अशोक पटेल समेत नेता पहुंचे कलेक्टर के पास
लॉटरी के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल, विधायक शंकर डेचा, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या, पूर्व नगर परिषद उपसभापति सुदर्शन जैन सहित कई नेता जिला कलेक्टर के पास पहुंचे और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने आरक्षण प्रक्रिया की समीक्षा की मांग करते हुए ज्ञापन भी सौंपा।
उनका कहना था कि संबंधित वार्डों की वर्गवार जनसंख्या का सत्यापन कराए बिना चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने पर विवाद और बढ़ सकता है।
Dungarpur Ward Reservation में दोबारा भौतिक सत्यापन की मांग
भाजपा ने प्रशासन के सामने केवल लॉटरी दोबारा कराने की मांग नहीं रखी, बल्कि उससे पहले संबंधित वार्डों की वास्तविक आबादी का physical verification कराने की भी मांग की है।
पार्टी का कहना है कि प्रशासन पहले यह सुनिश्चित करे कि SC-ST और अन्य वर्गों की वार्डवार आबादी के आंकड़े वास्तविक स्थिति से मेल खाते हैं।
इसके बाद यदि किसी तरह की विसंगति सामने आती है तो आरक्षण को संशोधित करते हुए नई प्रक्रिया अपनाई जाए।
Dungarpur Ward Reservation कलेक्टर देशलदान ने क्या कहा?
भाजपा नेताओं की आपत्ति पर जिला कलेक्टर देशलदान ने प्रशासन का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि नगर परिषद के वार्डों का आरक्षण जनसंख्या के आधार पर किया गया है। साथ ही भाजपा नेताओं की ओर से उठाए गए सवालों की जांच कराने की बात कही।
देशलदान वर्तमान में डूंगरपुर के जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट हैं। उन्होंने अप्रैल 2026 में इस पद का कार्यभार संभाला था।
ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन जांच में किन जनसंख्या आंकड़ों को आधार बनाता है और क्या किसी वार्ड के आरक्षण में बदलाव की जरूरत सामने आती है।
BJP की चेतावनी- जरूरत पड़ी तो कोर्ट जाएंगे
Dungarpur Ward Reservation विवाद में भाजपा नेताओं ने कानूनी लड़ाई का विकल्प भी खुला रखा है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि अगर प्रशासन ने उनकी आपत्तियों की जांच नहीं की या कथित विसंगतियों को दूर नहीं किया गया तो वे न्यायालय का रुख कर सकते हैं।
हालांकि फिलहाल किसी न्यायालय में याचिका दाखिल किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसे भाजपा की चेतावनी और संभावित अगला कदम माना जाना चाहिए।
निकाय चुनाव से पहले क्यों अहम है वार्ड आरक्षण?
Dungarpur Ward Reservation वार्ड आरक्षण स्थानीय चुनाव में उम्मीदवारों की दावेदारी को सीधे प्रभावित करता है।
किसी वार्ड के General से SC, ST, OBC या महिला आरक्षित होने पर उस सीट से चुनाव लड़ने के पात्र उम्मीदवारों का दायरा बदल जाता है। इसी कारण आरक्षण लॉटरी के बाद राजनीतिक दलों को अपनी प्रत्याशी रणनीति भी बदलनी पड़ती है।
राजस्थान में इस बार नगरीय निकायों की आरक्षण प्रक्रिया जनसंख्या और rotation व्यवस्था के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
डूंगरपुर में विवाद इसी प्रक्रिया के तहत निर्धारित कुछ वार्डों की जनसंख्या संरचना को लेकर सामने आया है।
Dungarpur Ward Reservation की बड़ी बातें
- डूंगरपुर नगर परिषद में कुल 40 वार्ड हैं।
- SC के लिए वार्ड 6, 7 और 8 आरक्षित किए गए हैं।
- ST के लिए वार्ड 3, 11, 23, 25 और 28 आरक्षित हुए हैं।
- OBC के लिए आठ वार्ड आरक्षित किए जाने की जानकारी है।
- भाजपा ने कुछ SC-ST आरक्षित वार्डों की आबादी पर सवाल उठाए हैं।
- पार्टी ने विशेष तौर पर वार्ड 7, 23 और 25 का जिक्र किया है।
- विधायक शंकर डेचा, जिलाध्यक्ष अशोक पटेल समेत भाजपा नेताओं ने कलेक्टर के सामने आपत्ति दर्ज कराई।
- भाजपा ने वर्गवार आबादी का रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
- जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी गई है।
- कलेक्टर देशलदान ने कहा कि आरक्षण जनसंख्या के आधार पर हुआ है।
- प्रशासन ने उठाई गई आपत्तियों की जांच कराने की बात कही है।
जांच के बाद साफ होगी आरक्षण की स्थिति
कुल मिलाकर Dungarpur Ward Reservation ने नगर परिषद चुनाव से पहले स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है। भाजपा ने आरक्षण प्रक्रिया को सीधे खारिज करने के बजाय कुछ वार्डों के वर्गवार जनसंख्या आंकड़ों पर सवाल उठाकर समीक्षा की मांग की है।
वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर की गई है। साथ ही भाजपा की आपत्तियों पर दोबारा जांच का आश्वासन दिया गया है।
अब प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि सरकारी रिकॉर्ड भाजपा के दावों से अलग पाया जाता है तो वर्तमान आरक्षण यथावत रह सकता है। वहीं यदि आंकड़ों में कोई त्रुटि सामने आती है तो आगे प्रशासन को नियमानुसार फैसला करना होगा।
Dungarpur Ward Reservation फिलहाल भाजपा की कोर्ट जाने की बात चेतावनी तक सीमित है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि आरक्षण लॉटरी कानूनी विवाद में पहुंच चुकी है।
डूंगरपुर से सादिक अली की रिपोर्ट
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं के लिए State Election Commission Rajasthan की वेबसाइट देखी जा सकती है।
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