नेपाल और चीन के तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी इलाके में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। Nepal Flood में मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। गुरुवार, 27 अगस्त को नेपाल पुलिस ने बताया कि देश में अब तक 270 शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं चीन की तरफ तिब्बत में भी तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इस तरह दोनों तरफ मिलाकर कम से कम 273 लोगों की जान जाने की बात सामने आ रही है। राहत और बचाव अभियान जारी होने के कारण मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।
इस आपदा में सबसे चिंताजनक स्थिति लापता लोगों की है। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार नेपाल और तिब्बत में 1,300 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों और कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं की भी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अलग-अलग एजेंसियों के अपडेट और सत्यापन के समय में अंतर होने के कारण लापता लोगों की संख्या बदल सकती है।
Nepal Flood में 270 शव बरामद, लगातार बढ़ रहा आंकड़ा
Nepal Flood का असर नेपाल के Rasuwa, Nuwakot और उससे नीचे नदी के रास्ते में आने वाले कई क्षेत्रों में दिखाई दिया है। तेज रफ्तार पानी, कीचड़, पत्थर और मलबे का सैलाब कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले गया। सड़कें, पुल, मकान और बिजली से जुड़ा बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
नेपाल पुलिस के मुताबिक गुरुवार तक 270 शव बरामद किए जा चुके थे। इससे पहले गुरुवार सुबह तक उपलब्ध आंकड़ों में मौतों की संख्या करीब 165 बताई जा रही थी, लेकिन सर्च ऑपरेशन बढ़ने के साथ लगातार नए शव बरामद हुए। इससे साफ है कि हालात बेहद गंभीर हैं और प्रभावित इलाकों में अभी भी बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चल रहा है।
1300 से ज्यादा लापता, नेपाल में 826 लोगों का पता नहीं
Nepal Flood के बाद सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश है। नेपाल की National Disaster Risk Reduction and Management Authority के आंकड़ों के मुताबिक 826 लोग लापता बताए गए थे। इनमें स्थानीय नागरिक, सुरक्षाकर्मी और सैकड़ों पर्यटक शामिल हैं।
चीन के सरकारी प्रसारक CCTV के अनुसार तिब्बत के Gyirong क्षेत्र में 558 लोग लापता बताए गए। इनमें 260 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों को देखें तो लापता लोगों की संख्या 1,300 से ऊपर पहुंच जाती है।
हालांकि अधिकारी यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि अलग-अलग सूची में कुछ लोगों के दोबारा दर्ज होने या बाद में संपर्क स्थापित होने से आंकड़ों में बदलाव संभव है।
177 भारतीय भी लापता
भारत के लिए Nepal Flood से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता वहां लापता भारतीय नागरिक हैं। Nepal Tourism Board के मुताबिक नेपाल में संपर्क से बाहर बताए जा रहे विदेशी पर्यटकों में सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है।
ताजा उपलब्ध सूची के अनुसार 177 भारतीय नागरिक लापता बताए गए हैं। इसके बाद अमेरिका के 63, ऑस्ट्रेलिया के 34, ब्रिटेन के 33 और कनाडा के 25 नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
कई विदेशी नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा और दूसरे धार्मिक या पर्यटन समूहों के साथ इस इलाके में पहुंचे थे। बाढ़ आने के बाद सड़क संपर्क, बिजली और दूरसंचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण कई समूहों से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।
कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं पर भी आफत
Nepal Flood के समय बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर की ओर यात्रा कर रहे थे। Mount Kailash हिंदू, बौद्ध, जैन और तिब्बती Bon परंपरा के अनुयायियों के लिए बेहद पवित्र स्थल माना जाता है।
आपदा प्रभावित क्षेत्र नेपाल-तिब्बत सीमा के उस मार्ग के आसपास है, जिसका इस्तेमाल कई तीर्थयात्री करते हैं। AP के मुताबिक लापता विदेशियों में 30 से ज्यादा देशों के नागरिक शामिल हैं और इनमें बड़ी संख्या तीर्थयात्रियों की है।
सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि उनके संगठन से जुड़े कई तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि उन्होंने जो कुछ व्यक्तिगत आंकड़े बताए हैं, उनमें से सभी की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आखिर कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?
शुरुआत में Nepal Flood के साथ दर्ज हुई seismic activity के कारण आशंका जताई गई थी कि कहीं भूकंप ने इस आपदा को जन्म तो नहीं दिया। लेकिन बाद की जांच में तस्वीर अलग सामने आई।
US Geological Survey और वैज्ञानिकों के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक यह seismic signal वास्तव में एक विशाल glacial collapse और debris flow से जुड़ा था। माना जा रहा है कि हिमालय में ग्लेशियर और चट्टान का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा, जिसने नदी में अचानक भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर, पानी और मलबा पहुंचा दिया। इससे बेहद शक्तिशाली flash flood पैदा हुई।
वैज्ञानिकों के अनुसार घटना की शुरुआत नेपाल के Langtang Lirung क्षेत्र के उत्तरी हिस्से से हुई ice-rock avalanche से होने की संभावना है, जिसका मलबा तिब्बत की तरफ Lhende Khola नदी में पहुंचा। इसके बाद पानी और मलबे की विनाशकारी लहर नीचे की तरफ बढ़ती चली गई।
Climate Change ने बढ़ाया खतरा?
Nepal Flood के बाद एक बार फिर हिमालय पर climate change के प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वैज्ञानिक अभी climate change को इस घटना का अकेला और प्रत्यक्ष कारण बताने से बच रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि बढ़ता तापमान ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ और चट्टानों को अस्थिर कर रहा है।
Earth Sciences New Zealand के वैज्ञानिक Simon Cox के मुताबिक climate change ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रहा है, जिनमें ऊंचे पहाड़ों की rock और ice ज्यादा अस्थिर हो सकती है। इससे हिमस्खलन, glacier collapse और इसके बाद होने वाली cascading disasters का खतरा बढ़ जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार नेपाल पिछले तीन दशकों में अपने mountain ice cover का बड़ा हिस्सा खो चुका है और हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से पिघलते ग्लेशियर भविष्य की ऐसी आपदाओं को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं।
5000 से ज्यादा जवान राहत-बचाव अभियान में
Nepal Flood के बाद नेपाल ने बड़े स्तर पर rescue operation शुरू किया है। सेना, नेपाल पुलिस और Armed Police Force के 5,000 से ज्यादा जवानों को राहत और बचाव अभियान में लगाया गया है।
हेलिकॉप्टर के जरिए ऐसे इलाकों में लोगों को खोजा जा रहा है जहां सड़कें टूट चुकी हैं। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक भोजन, पानी और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है। गुरुवार के शुरुआती अपडेट तक 125 लोगों को बचाए जाने की जानकारी सामने आई थी, जिनमें 20 विदेशी नागरिक भी शामिल थे।
हालांकि पहाड़ी भूभाग, भारी मात्रा में जमा मलबा, टूटी सड़कें और खराब संचार व्यवस्था बचाव कार्य को बेहद मुश्किल बना रही हैं।

ब्रिटेन ने किया £5 मिलियन मदद का ऐलान
इस भयावह Nepal Flood के बाद अंतरराष्ट्रीय मदद भी शुरू हो गई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Andy Burnham ने नेपाल के लिए 5 मिलियन पाउंड की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने emergency responders भेजने की पेशकश भी की है और नेपाल में ब्रिटिश नागरिकों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए consular support staff तैनात किए जा रहे हैं। नेपाल की सूची में 33 ब्रिटिश नागरिक लापता बताए गए हैं।
Burnham ने इस तबाही को बेहद विनाशकारी बताते हुए कहा कि ब्रिटेन लापता नागरिकों के परिवारों को हर संभव सहायता देगा।
अमेरिका ने भी दिए 5 लाख डॉलर
अमेरिका ने भी Nepal Flood के बाद नेपाल को emergency assistance के रूप में 5 लाख डॉलर देने की घोषणा की है। इसके साथ एक disaster response adviser को भी भेजा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी राहत सामग्री और personnel भेजे हैं। भारत सहित पड़ोसी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से भी सहायता और समन्वय की प्रक्रिया चल रही है।
क्या अभी दूसरी बाढ़ का भी खतरा है?
इस आपदा के बीच एक और गंभीर खतरा सामने आया है। चीनी अधिकारियों ने Gyirong के ऊपर की तरफ एक अवरुद्ध झील यानी dammed lake की पहचान की है।
मलबे से नदी का रास्ता रुकने पर ऐसी झीलें बन सकती हैं। अगर प्राकृतिक मलबे से बनी यह दीवार अचानक टूटती है तो नीचे के क्षेत्रों में दोबारा तेज पानी और मलबे का सैलाब आ सकता है। इसी कारण Nepal Flood प्रभावित इलाकों में rescue teams अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं।
यह खतरा नेपाल के साथ नदी के नीचे स्थित क्षेत्रों के लिए भी चिंता का कारण बना हुआ है।
Nepal Flood ने दिखाया हिमालय का नया खतरा
27 अगस्त तक सामने आई तस्वीर बताती है कि Nepal Flood हाल के वर्षों की सबसे गंभीर हिमालयी प्राकृतिक आपदाओं में से एक बन चुकी है। नेपाल में 270 शव मिलने, तिब्बत में तीन मौतों और 1,300 से अधिक लोगों के लापता होने के बावजूद अभी भी कई दुर्गम इलाकों तक राहत टीमें पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं।
सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों की सुरक्षित वापसी और संभावित दूसरी बाढ़ के खतरे को लेकर है। वहीं वैज्ञानिक स्तर पर यह आपदा हिमालय में तेजी से बदल रही जलवायु, पिघलते ग्लेशियर और अस्थिर होते पहाड़ी ढलानों को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी बनकर सामने आई है।
Nepal Flood से जुड़े मौत और लापता लोगों के आंकड़े राहत अभियान के साथ तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में आने वाले घंटों में इस आपदा की वास्तविक भयावहता और अधिक स्पष्ट होने की आशंका है।




