Bihar Student Protest: बिहार में जुलाई के छात्र प्रदर्शनों के दौरान सिवान में पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट के सामने विस्तार से पहुंच गया है। बिहार सरकार ने अदालत में दाखिल जवाब में कहा है कि 25 जुलाई को सिवान के JP चौक के पास हालात बिगड़ने के दौरान कांस्टेबल अभिषेक कुमार भीड़ के बीच फंस गया था। इसके बाद उसने AK-47 से चार गोलियां हवा में चलाईं। राज्य सरकार का दावा है कि इन चार गोलियों से कोई प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ।
हालांकि इसी दिन सिवान में पुलिस कार्रवाई के दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली firearm injuries होने की बात भी सरकार ने स्वीकार की है। सरकार का कहना है कि ये चोटें AK-47 से नहीं लगीं और घायल प्रदर्शनकारी उस स्थान पर मौजूद भी नहीं थे जहां AK-47 चलाई गई थी। हथियार, गोली चलने की दूरी और कोण जैसी चीजों की ballistic जांच जारी है।

राज्य ने सुप्रीम कोर्ट को बिहार के अलग-अलग जिलों में हुए प्रदर्शनों और हिंसक घटनाओं का भी विस्तृत ब्यौरा दिया है। 22 से 25 जुलाई के बीच राज्य में 69 FIR और 500 गिरफ्तारियां होने की जानकारी दी गई है। इनमें से 222 ऐसे छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया जिनका कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, जबकि 75 नाबालिगों को Juvenile Justice Board के जरिए रिहा किया गया।
Bihar Student Protest: सिवान में आखिर AK-47 क्यों चली?
Bihar Student Protest के दौरान सबसे ज्यादा विवाद सिवान में AK-47 के इस्तेमाल पर हुआ था। घटना के वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर देशभर में सवाल उठे थे।
बिहार सरकार के मुताबिक 25 जुलाई को सिवान में तैनात पुलिस बल स्थिति के मुकाबले पर्याप्त नहीं था और अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को बुलाना पड़ा। JP चौक के पास कांस्टेबल अभिषेक कुमार कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ में घिर गया। राज्य का कहना है कि खुद को बाहर निकालने के दौरान उसने AK-47 से चार राउंड हवा में फायर किए।
घटना के तुरंत बाद भी वरिष्ठ बिहार पुलिस अधिकारी ने Reuters को बताया था कि AK-47 का इस तरह इस्तेमाल गलत था और इसके लिए संबंधित कांस्टेबल को निलंबित किया गया। बाद के सुप्रीम कोर्ट हलफनामे में भी सरकार ने कार्रवाई और departmental proceedings शुरू होने की पुष्टि की है।
AK-47 सामान्य law and order duty का हथियार नहीं: सरकार
इस मामले में बिहार सरकार की सबसे महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति हथियार के इस्तेमाल को लेकर है।
हलफनामे में AK-47 को platoon-level weapon बताया गया है, जिसका उपयोग special operations में किया जाता है, न कि सामान्य law-and-order duty में। राज्य DGP ने इसके बाद AK-47 के इस्तेमाल को लेकर निर्देश भी जारी किए हैं।
यही कारण है कि कांस्टेबल अभिषेक कुमार को “undesired conduct” के आधार पर निलंबित किया गया और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
तीन प्रदर्शनकारी घायल हुए, लेकिन AK-47 से नहीं: राज्य का दावा
Bihar Student Protest के दौरान पुलिस firing से तीन प्रदर्शनकारियों के घायल होने को लेकर भी काफी विवाद हुआ।
बिहार सरकार ने अदालत में माना कि तीन प्रदर्शनकारियों को minor firearm injuries हुईं। लेकिन राज्य ने कहा कि ये चोटें AK-47 से नहीं थीं। सरकार के अनुसार घायल लोग उस जगह पर भी मौजूद नहीं थे जहां अभिषेक कुमार ने AK-47 चलाई थी।
सिवान के ही हाथी चौक के पास Assistant Sub-Inspector निलेश कुमार सिंह ने भी भीड़ को हटाने के लिए 9mm pistol से दो राउंड फायर किए थे। हालांकि तीन घायलों को कौन-सी गोली लगी, इसे अंतिम रूप से निर्धारित करने के लिए ballistic examination जारी है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि तीनों को निश्चित रूप से 9mm pistol की गोली ही लगी थी।
Bihar Student Protest: बिहार सरकार बोली- पुलिस ने बरता अधिकतम संयम
सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार ने आरोपों का विरोध करते हुए कहा है कि पुलिस और दूसरी राज्य एजेंसियों ने प्रदर्शन के दौरान अधिकतम संयम बरता और प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाने के लिए “disproportionate force” का इस्तेमाल नहीं किया गया।
राज्य का आरोप है कि कुछ स्थानों पर “असामाजिक तत्व” प्रदर्शनकारी भीड़ में शामिल हो गए और उन्होंने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ पुलिस अधिकारियों पर हमला किया। ये बिहार सरकार के आरोप हैं और अदालत में अभी इन पर अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।
पटना में 24 FIR, 808 लोगों को बनाया आरोपी
Bihar Student Protest के दौरान हुई घटनाओं का राज्य सरकार ने district-wise ब्यौरा भी सुप्रीम कोर्ट को दिया है।
हलफनामे के अनुसार 22 जुलाई को पटना के गांधी मैदान से लोक भवन की ओर AISA की तरफ से मार्च निकाला गया था। राज्य का दावा है कि प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया। इस घटना से जुड़े मामलों में 24 FIR दर्ज की गईं, 808 लोगों को आरोपी बनाया गया और 65 लोगों की गिरफ्तारी हुई।
बिहार सरकार ने 24 जुलाई को जहानाबाद में जिला मजिस्ट्रेट के आवास पर प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित हमले की जानकारी भी दी और कहा कि इस घटना में 18 अधिकारी घायल हुए।
Bihar Student Protest: छपरा, भागलपुर से किशनगंज तक हिंसा का दावा
राज्य सरकार के अनुसार हिंसक घटनाएं केवल पटना, सिवान और जहानाबाद तक सीमित नहीं थीं।
हलफनामे में छपरा, पटना, सीतामढ़ी, भागलपुर, औरंगाबाद, कटिहार और किशनगंज समेत कई स्थानों का उल्लेख किया गया है। सरकार ने दावा किया कि कुछ जगह भीड़ ने पुलिस पर पथराव और सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ की।
छपरा में 25 जुलाई को दोपहर तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने के बाद स्थिति बिगड़ने का दावा किया गया है। सरकार के अनुसार वहां अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें भी आईं।
69 FIR, 500 गिरफ्तारियां; 222 छात्र रिहा
Bihar Student Protest से जुड़े सबसे बड़े आंकड़े 22 से 25 जुलाई के बीच दर्ज मामलों और गिरफ्तारियों के हैं।
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इन चार दिनों में पूरे राज्य में:
- 69 FIR दर्ज हुईं
- 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया
- 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर छोड़ा गया
- 75 नाबालिगों को Juvenile Justice Board ने रिहा किया
- 157 पुलिसकर्मी घायल हुए
- 7 अन्य सरकारी कर्मचारियों के घायल होने का दावा किया गया
सरकार ने यह भी कहा कि जिन छात्र प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ coercive action नहीं लिया जा रहा है।
CJP को लेकर हलफनामे में क्या कहा गया?
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है।
जुलाई के राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन में Cockroach Janta Party यानी CJP प्रमुख संगठनों में रही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की थी। प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया था।
लेकिन बिहार सरकार के सुप्रीम कोर्ट हलफनामे में राज्य के भीतर हुई हिंसक घटनाओं के लिए मुख्य रूप से AISA और RYA के protest calls का उल्लेख किया गया है। साथ ही राज्य ने कहा कि CJP की ओर से 24 जुलाई को दिए गए protest call का बिहार में कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं दिखा।
इसलिए बिहार की हर हिंसक घटना को सीधे CJP के नेतृत्व वाला प्रदर्शन कहना सटीक नहीं होगा।
Supreme Court ने 28 जुलाई को क्या आदेश दिया था?
Bihar Student Protest समेत देश के कई राज्यों में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को अहम अंतरिम आदेश दिया था।
Shailendra Mani Tripathi v. Union of India और उससे जुड़े मामलों में अदालत ने दिल्ली के अलावा बिहार, महाराष्ट्र, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने CCTV footage, drone recordings, body-worn camera footage, wireless communication और PCR records सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों, खासकर छात्रों का personal और digital data सार्वजनिक नहीं किया जाए। FIR की जांच जारी रह सकती है, लेकिन ऐसे छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ coercive action नहीं लिया जाए जिनका गंभीर आपराधिक इतिहास नहीं है।
18 साल से कम उम्र के detained या arrested बच्चों को, यदि उनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, रिहा करने का भी निर्देश दिया गया।
Bihar Student Protest: 3 अगस्त को Supreme Court ने दी एक और राहत
3 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकारें कानून के मुताबिक छात्र प्रदर्शनकारियों से संबंधित FIR को बंद या वापस लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके पहले आदेश में इस्तेमाल “criminal antecedents” का मतलब सामान्य छोटे-मोटे मामलों से नहीं, बल्कि grave and heinous offences से है।
बिहार सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि CJP और केंद्र के बीच हुए समझौते की पृष्ठभूमि को देखते हुए बड़ी संख्या में मामलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ था राष्ट्रीय आंदोलन
जुलाई में देशभर में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए आंदोलनों ने बड़ा राजनीतिक असर डाला था।
25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। इसके बाद CJP ने कहा कि उसकी मांगें स्वीकार कर ली गई हैं और राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा आंदोलन वापस लिया जा रहा है।
Reuters ने भी उस समय रिपोर्ट किया था कि लंबे छात्र आंदोलन और परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद प्रधान का इस्तीफा हुआ।
हालांकि राज्यों में दर्ज FIR, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों का सवाल अलग कानूनी मुद्दा बना रहा और यही विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के सामने है।
Bihar Student Protest में अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
Bihar Student Protest मामले में अब कानूनी बहस केवल यह नहीं है कि AK-47 की गोली से कोई घायल हुआ या नहीं।
बड़ा सवाल यह भी है कि सामान्य crowd-control situation में एक ऐसा हथियार पुलिसकर्मी के पास क्यों था जिसे बिहार सरकार खुद special operations का platoon-level weapon बता रही है।
दूसरा सवाल proportionality का है—यानी प्रदर्शन हिंसक होने की स्थिति में भी पुलिस को किस सीमा तक बल का इस्तेमाल करना चाहिए।
तीसरा मुद्दा प्रदर्शनकारियों की जिम्मेदारी का है। राज्य का दावा है कि कई स्थानों पर पुलिसकर्मी और सरकारी अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। वहीं याचिकाओं में पुलिस पर excessive force इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं।
इन दोनों पक्षों की जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि किस घटना में कौन जिम्मेदार था।
Bihar Student Protest की बड़ी बातें
- 25 जुलाई को सिवान के JP चौक पर कांस्टेबल अभिषेक कुमार ने AK-47 से 4 राउंड हवा में चलाए।
- बिहार सरकार का दावा है कि AK-47 की गोलियों से कोई प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ।
- तीन प्रदर्शनकारियों को minor firearm injuries होने की बात सरकार ने स्वीकार की है।
- उनकी चोटों की ballistic जांच जारी है।
- ASI निलेश कुमार सिंह ने हाथी चौक के पास 9mm pistol से दो राउंड चलाए।
- AK-47 चलाने वाला कांस्टेबल निलंबित है और departmental proceedings जारी हैं।
- बिहार सरकार ने AK-47 को special operations का platoon-level weapon बताया है।
- 22 से 25 जुलाई के बीच राज्य में 69 FIR और 500 गिरफ्तारियां हुईं।
- 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत मिली और 75 नाबालिग रिहा हुए।
- राज्य ने 157 पुलिसकर्मियों और 7 अन्य सरकारी कर्मचारियों के घायल होने का दावा किया है।
- 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने video evidence सुरक्षित रखने और छात्रों के खिलाफ coercive action पर रोक जैसी अंतरिम सुरक्षा दी।
- CJP के राष्ट्रीय आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर नजर
कुल मिलाकर Bihar Student Protest पर बिहार सरकार का हलफनामा दो अलग तस्वीरें सामने रखता है। एक तरफ राज्य यह स्वीकार करता है कि सिवान में AK-47 का इस्तेमाल हुआ और ऐसा हथियार सामान्य कानून-व्यवस्था के लिए नहीं होना चाहिए था। दूसरी तरफ सरकार का दावा है कि उससे किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी और पुलिस ने हालात के मुताबिक संयम बरता।
वहीं सुप्रीम कोर्ट पहले ही पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की कथित हिंसा—दोनों पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जरूरत दर्ज कर चुका है। उसने evidence सुरक्षित रखने और छात्रों व नाबालिगों को अंतरिम सुरक्षा देने के आदेश भी दिए हैं।
इसलिए आगे की सुनवाई में सबसे महत्वपूर्ण सवाल AK-47 के इस्तेमाल, तीन घायल प्रदर्शनकारियों की ballistic report, पुलिस के crowd-control protocol और हिंसक घटनाओं में व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने से जुड़े रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का 28 जुलाई का आधिकारिक आदेश Supreme Court of India के पोर्टल पर उपलब्ध है।
राष्ट्रीय छात्र आंदोलन से जुड़े अन्य तथ्य Reuters और कानूनी घटनाक्रम LiveLaw पर देखे जा सकते हैं।
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