Poddar School Protest: जयपुर के राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर विद्यालय की व्यवस्थाओं और सरकारी स्कूलों में प्रवेश व मीडिया कवरेज से जुड़े नए नियम को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को विरोध तेज कर दिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक और पार्टी नेता सुबह स्कूल पहुंचे। जूली को स्कूल परिसर में प्रवेश से रोके जाने के बाद कांग्रेस विधायक दल ने वहां से राजस्थान विधानसभा तक पैदल मार्च शुरू किया।
कांग्रेस ने इस विरोध को शिक्षा व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की सरकारी संस्थानों तक पहुंच से जोड़ा है। वहीं शिक्षा विभाग का पक्ष है कि स्कूलों में अनधिकृत प्रवेश और बिना अनुमति बच्चों की फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी को नियंत्रित करने का उद्देश्य विद्यार्थियों की निजता और पढ़ाई के माहौल की सुरक्षा करना है।

Poddar School Protest: स्कूल के गेट से शुरू हुआ विरोध
Poddar School Protest गुरुवार सुबह उस समय तेज हो गया जब टीकाराम जूली आनंदीलाल पोद्दार स्कूल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक नए शिक्षा विभागीय निर्देशों का हवाला देते हुए उन्हें स्कूल के अंदर जाने से रोका गया। इसके बाद कांग्रेस विधायक भी मौके पर पहुंच गए और पार्टी ने स्कूल से विधानसभा तक मार्च निकालने का फैसला किया।
जूली ने आरोप लगाया कि वे करीब 15 दिन पहले भी स्कूल आए थे, जब विद्यार्थियों की ओर से बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। उस समय व्यवस्थाओं में सुधार का भरोसा दिया गया था। कांग्रेस का कहना है कि वह अब यह जानना चाहती थी कि उन शिकायतों पर कितना काम हुआ है।
Poddar School Protest: पोद्दार स्कूल में पहले क्यों हुआ था छात्रों का प्रदर्शन?
मौजूदा Poddar School Protest की पृष्ठभूमि अगस्त की शुरुआत में हुए विद्यार्थियों के विरोध से जुड़ी है।
5 अगस्त को राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर प्रदर्शन किया था। छात्रों ने unsafe infrastructure, खराब sanitation, पर्याप्त सुविधाओं की कमी और trained teaching staff से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
विद्यार्थियों की शिकायतों में मुख्य गेट पर बारिश का पानी जमा होना, hostel और classroom की स्थिति, toilets तथा दूसरे basic infrastructure से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं।
इसके बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल पहुंचे और सुविधाओं की जांच के लिए समिति गठित की गई।
Poddar School Protest: प्रिंसिपल पर भी हुई थी कार्रवाई
विद्यार्थियों के विरोध के बाद शिक्षा विभाग ने तत्कालीन principal भारत जोशी को पद से हटाने की कार्रवाई की थी। Vice-principal को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके साथ ही विभाग ने sanitation, building condition, drinking water और दूसरी सुविधाओं की जांच के लिए committee बनाने की जानकारी दी थी।
स्कूल प्रशासन के एक अधिकारी ने उस समय बताया था कि infrastructure maintenance के लिए ₹25 लाख sanction किए गए हैं।
इसलिए वर्तमान विवाद केवल गुरुवार को हुई entry रोकने की घटना तक सीमित नहीं है। कांग्रेस पुराने छात्र आंदोलन और उसके बाद हुए सुधारों की स्थिति को भी मुद्दा बना रही है।
शिक्षा सचिव ने भी किया था स्कूल का निरीक्षण
छात्रों के प्रदर्शन के अगले दिन Additional Chief Secretary, School Education राजेश यादव ने स्कूल का surprise inspection किया था।
उन्होंने classrooms, toilets, drinking water, sanitation, hostels और food quality जैसी सुविधाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को academic quality और infrastructure की नियमित monitoring के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
इससे साफ है कि विभाग ने विद्यार्थियों की शिकायतों के बाद कुछ प्रशासनिक कदम उठाए थे। हालांकि कांग्रेस का सवाल अब यह है कि इन निर्देशों का ground level पर कितना असर हुआ।
Poddar School Protest में मीडिया नियम भी बड़ा मुद्दा
Poddar School Protest में दूसरा बड़ा विवाद राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों और मीडिया की entry से जुड़े नए निर्देश को लेकर है।
हाल में जारी व्यवस्था के तहत कोई व्यक्ति या media representative बिना अनुमति स्कूल परिसर में जाकर बच्चों की photography, videography या interview नहीं कर सकता।
विपक्ष ने इसे मीडिया पर प्रतिबंध बताया है।
लेकिन शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस interpretation को खारिज किया है। उनके मुताबिक मीडिया को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया गया है। उनका कहना है कि minor students की privacy और dignity की रक्षा के लिए अभिभावक या institution head की अनुमति जरूरी की गई है।
Poddar School Protest: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का क्या है पक्ष?
शिक्षा मंत्री का कहना है कि किसी पत्रकार या बाहरी व्यक्ति को अचानक स्कूल में प्रवेश कर बच्चों के interview या videos रिकॉर्ड करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उनके मुताबिक बच्चों की privacy, safety और classroom environment को ध्यान में रखते हुए prior permission की व्यवस्था रखी गई है।
यानी सरकार का पक्ष यह है कि आदेश media censorship नहीं बल्कि regulated access से जुड़ा है।
दूसरी तरफ कांग्रेस का तर्क है कि पूर्व अनुमति की अनिवार्यता से सरकारी स्कूलों में कमियां उजागर करना मुश्किल हो सकता है।
Poddar School Protest: जूली बोले- हमें स्कूल के अंदर नहीं जाने दिया
टीकाराम जूली ने मौके पर सरकार के आदेश का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों को सरकारी संस्थानों की स्थिति देखने से नहीं रोका जाना चाहिए।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की मौजूदगी में कांग्रेस नेताओं को school grounds में प्रवेश से रोका गया। इसके बाद मौके पर राजनीतिक गतिरोध पैदा हुआ।
कांग्रेस का आरोप है कि अगर विधायक और मीडिया स्कूलों में जाकर वास्तविक स्थिति नहीं देख पाएंगे तो सरकारी संस्थानों की जवाबदेही कमजोर हो सकती है।
यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है। शिक्षा विभाग इसे बच्चों की निजता और परिसर में व्यवस्थित प्रवेश से जुड़ी policy बता रहा है।
Poddar School Protest: विधानसभा तक पैदल मार्च
स्कूल गेट पर विवाद के बाद कांग्रेस ने वहीं से राजस्थान विधानसभा तक पैदल मार्च शुरू किया।
ताजा रिपोर्ट में इसे कांग्रेस विधायक दल का “सविनय अवज्ञा मार्च” बताया गया है। मार्च का नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली कर रहे हैं।
कांग्रेस विधायक शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रवेश नियम को विधानसभा में भी उठाने की तैयारी में हैं।
यह घटनाक्रम उसी दिन हुआ जब राजस्थान विधानसभा का छठा सत्र शुरू हुआ है। आधिकारिक विधानसभा पोर्टल के मुताबिक सत्र 20 अगस्त से शुरू हुआ है।
विधानसभा में गूंज सकता है पोद्दार स्कूल मामला
Poddar School Protest अब केवल स्कूल स्तर का मुद्दा नहीं रह गया है।
कांग्रेस विधायक दल के विधानसभा तक मार्च के बाद शिक्षा व्यवस्था, दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधाएं और मीडिया/जनप्रतिनिधियों की सरकारी स्कूलों तक पहुंच सदन में विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।
जूली ने 5 अगस्त को स्कूल के छात्रों के आंदोलन के दौरान भी कहा था कि इस मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा।
ऐसे में मानसून सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस ने अपने पुराने मुद्दे को सड़क से सदन तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई है।
दिव्यांग छात्रों ने किन सुविधाओं की मांग की थी?
पहले हुए छात्र आंदोलन में केवल एक-दो सुविधाओं की शिकायत नहीं थी।
रिपोर्टों के मुताबिक विद्यार्थियों ने:
- भवन और classrooms की स्थिति
- hostel facilities
- sanitation
- toilets
- drinking water
- school entrance पर waterlogging
- पर्याप्त basic amenities
- sign language जानने वाले trained teachers
जैसे मुद्दे उठाए थे।
Poddar School Protest इसी विरोध के बाद प्रशासन और सरकार पर व्यवस्था सुधारने का दबाव बढ़ा था।
Poddar School Protest की बड़ी बातें
- कांग्रेस विधायक दल ने पोद्दार मूक-बधिर स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च निकाला।
- मार्च का नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने किया।
- जूली को नए entry rules के चलते स्कूल के अंदर जाने से रोके जाने की रिपोर्ट है।
- कांग्रेस ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और media access का मुद्दा उठाया।
- 5 अगस्त को इसी स्कूल के विद्यार्थियों ने खराब infrastructure और basic facilities को लेकर प्रदर्शन किया था।
- प्रदर्शन के बाद principal के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
- शिक्षा विभाग ने inspection committee बनाई थी।
- infrastructure maintenance के लिए ₹25 लाख sanction किए जाने की जानकारी स्कूल प्रशासन ने दी थी।
- Additional Chief Secretary ने अगले दिन स्कूल का inspection किया और regular monitoring के निर्देश दिए थे।
- शिक्षा मंत्री के मुताबिक मीडिया पर blanket ban नहीं है।
- बच्चों की फोटो, वीडियो या interview के लिए permission की व्यवस्था रखी गई है।
- कांग्रेस इसे transparency और जनप्रतिनिधियों की निगरानी से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
- मामला विधानसभा में भी उठने के आसार हैं।
अब सड़क से सदन तक पहुंचा मामला
कुल मिलाकर Poddar School Protest ने राजस्थान में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और उनमें public oversight को लेकर नई राजनीतिक बहस खड़ी कर दी है।
विद्यार्थियों की शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग principal पर कार्रवाई, committee गठन, senior officer inspection और infrastructure सुधार जैसे कदम उठा चुका है।
लेकिन कांग्रेस का कहना है कि वह ground reality की दोबारा जांच करना चाहती थी और जनप्रतिनिधियों को school entry से रोकना उचित नहीं है। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि बच्चों की privacy और safety को देखते हुए अनधिकृत प्रवेश तथा recording को regulate करना जरूरी है।
अब नजर राजस्थान विधानसभा पर रहेगी, जहां कांग्रेस इस मामले को शिक्षा व्यवस्था और सरकारी transparency के बड़े मुद्दे के रूप में उठा सकती है।
राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग की आधिकारिक जानकारी के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग, राजस्थान देखें।
विधानसभा की कार्यवाही के लिए Rajasthan Legislative Assembly – NeVA देख सकते हैं।
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