Rajasthan Police Smart Policing: बदलते डिजिटल दौर में साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए राजस्थान पुलिस अब Artificial Intelligence, Cyber Security और OSINT जैसी आधुनिक तकनीकों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। इसी दिशा में कोटा शहर पुलिस और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) कोटा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साइबर सुरक्षा आधारित स्मार्ट पुलिसिंग’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। इस कार्यक्रम में कोटा शहर और कोटा रेंज के 75 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण 17 से 19 अगस्त 2026 तक आयोजित किया गया। इसमें पुलिसकर्मियों को AI tools, cyber crime investigation, digital evidence और Open Source Intelligence यानी OSINT के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। राजस्थान पुलिस ने कार्यक्रम की शुरुआत के दौरान भी बताया था कि इसका उद्देश्य पुलिस अधिकारियों की AI, cyber security, OSINT और दूसरी emerging digital technologies में practical skills बढ़ाना है।

Rajasthan Police Smart Policing में 75 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण
Rajasthan Police Smart Policing कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य traditional policing के साथ नई technology को जोड़ना है।
तीन दिनों के प्रशिक्षण में कोटा शहर और रेंज के कुल 75 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। समापन समारोह में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस वी.के. सिंह ने सफलतापूर्वक training पूरी करने वाले पुलिसकर्मियों को certificates प्रदान किए।
कार्यक्रम में पुलिसकर्मियों को यह समझाया गया कि digital crime की जांच में केवल पारंपरिक investigation पर्याप्त नहीं है। Cyber fraud, social-media based crimes, online financial scams और digital identity से जुड़े मामलों में data analysis और technical investigation तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
AI का पुलिसिंग में कैसे होगा इस्तेमाल?
Artificial Intelligence अब केवल private technology companies तक सीमित नहीं रही। Investigation और data analysis में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
Rajasthan Police Smart Policing प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को AI-based tools के practical applications समझाए गए।
इनका उपयोग संभावित रूप से:
- बड़ी मात्रा में digital data की analysis
- patterns की पहचान
- cyber crime investigation
- suspect profiling में उपलब्ध digital information का analysis
- digital intelligence
- repetitive investigative tasks को तेज करने
जैसे कामों में मददगार हो सकता है।
राजस्थान पुलिस भी AI को policing में शामिल करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर AI in Policing समेत तकनीकी विशेषज्ञता वाले Young Professionals की भर्ती का उल्लेख भी किया गया है।
Cyber Security पर भी रहा खास फोकस
आज criminal activity का बड़ा हिस्सा smartphones, banking apps, social media और online platforms से जुड़ चुका है।
ऐसे में Rajasthan Police Smart Policing में cyber security को training का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
पुलिसकर्मियों को cyber crime investigation के दौरान digital footprints, electronic records और दूसरे technical evidence को समझने की जानकारी दी गई।
Cyber fraud की स्थिति में financial transactions, IP-related information, mobile data और दूसरे digital records जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
राजस्थान पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी Cyber Crime Helpline 1930 को प्रमुखता से उपलब्ध कराया गया है।

OSINT क्या है और पुलिस के लिए क्यों जरूरी?
Training programme का एक महत्वपूर्ण हिस्सा OSINT यानी Open Source Intelligence रहा।
OSINT का अर्थ ऐसी जानकारी के analysis से है जो publicly available sources से प्राप्त हो सकती है।
इनमें websites, public social-media posts, online databases, public records और दूसरे खुले digital sources शामिल हो सकते हैं।
पुलिस investigation में OSINT की मदद से किसी घटना, suspect या digital network के बारे में उपलब्ध public information को व्यवस्थित तरीके से analyse किया जा सकता है।
हालांकि ऐसी technology का इस्तेमाल लागू कानून, privacy और evidentiary rules के अनुसार करना जरूरी होता है।
Digital Evidence पर दिया गया प्रशिक्षण
Rajasthan Police Smart Policing में digital evidence के उपयोग पर भी विशेष जोर रहा।
Cyber crime या technology-enabled crime में physical evidence के साथ-साथ electronic evidence भी महत्वपूर्ण होता है।
Mobile phones, computers, online accounts, transaction records और digital communications जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
Training के दौरान पुलिसकर्मियों को digital information को analyse करने और उसे investigation में scientific तरीके से उपयोग करने से जुड़े विभिन्न aspects समझाए गए।
इसका उद्देश्य investigations को अधिक technology-driven और evidence-based बनाना है।
17 अगस्त को DGP राजीव कुमार शर्मा ने किया था शुभारंभ
Rajasthan Police Smart Policing, तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत 17 अगस्त 2026 को हुई थी।
राजस्थान के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने IIIT Kota परिसर में training programme का शुभारंभ किया था। राजस्थान पुलिस की ओर से साझा जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम 17 से 19 अगस्त तक आयोजित किया गया और इसमें AI, cyber investigation, OSINT तथा smart policing से जुड़े practical sessions शामिल किए गए।
राजीव कुमार शर्मा वर्तमान में राजस्थान के पुलिस महानिदेशक हैं। राजस्थान पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक वे 3 जुलाई 2025 से इस पद पर हैं।
Rajasthan Police Smart Policing: कोटा SP तेजस्वनी गौतम की पहल
Rajasthan Police Smart Policing, कार्यक्रम को कोटा रेंज आईजी हरेंद्र महावर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम की पहल पर IIIT Kota के technical collaboration से यह training programme तैयार किया गया।
इसका उद्देश्य केवल theoretical जानकारी देना नहीं था, बल्कि पुलिसकर्मियों को आधुनिक digital tools का practical understanding देना भी था।
प्रशिक्षण में simulation और practical exercises के जरिए cyber investigation और AI tools के उपयोग से जुड़े पहलुओं को समझाया गया। राजस्थान पुलिस की ओर से कार्यक्रम की शुरुआत पर भी practical exercises और simulations को training का हिस्सा बताया गया था।
ADG वी.के. सिंह ने बांटे प्रमाण-पत्र
कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे ADG वी.के. सिंह ने training पूरी करने वाले 75 police personnel को certificates दिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में policing को technology के साथ जोड़ना जरूरी है।
AI, Cyber Security और OSINT जैसी technologies की understanding से police की investigation और crime-control capabilities को मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने Kota Range IG Harendra Mahawar के technological approach और SP Tejaswini Gautam की initiative की भी सराहना की।
IIIT Kota की तकनीकी भूमिका
Rajasthan Police Smart Policing training programme में IIIT Kota की technical expertise महत्वपूर्ण रही।
IIIT Kota के course coordinator Professor Gyan Singh और उनकी team ने training sessions में सहयोग किया।
Police और technical educational institution की partnership के जरिए personnel को emerging technologies का practical exposure मिला।
यह model भविष्य में दूसरे police ranges या districts के लिए भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि cyber अपराधों की प्रकृति लगातार बदल रही है और investigators को नियमित skill upgradation की जरूरत होती है।
Data-Based Policing की दिशा में कदम
Smart policing में केवल AI tools का इस्तेमाल ही नहीं बल्कि data-based decision making भी महत्वपूर्ण होती है।
Digital data का सही analysis investigation को तेज करने, different cases के बीच patterns पहचानने और cyber crime networks समझने में मदद कर सकता है।
राजस्थान पुलिस पहले से cyber crime और technology-driven policing को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है। जुलाई 2026 में पुलिस की official press-release listing में cyber crime और AI in policing से जुड़ी initiatives तथा विशेषज्ञों की भर्ती भी प्रमुखता से दिखाई गई।
Rajasthan Police Smart Policing की बड़ी बातें
- कोटा में तीन दिवसीय smart policing training आयोजित हुई।
- कार्यक्रम 17 से 19 अगस्त 2026 तक चला।
- कोटा शहर पुलिस और IIIT Kota ने संयुक्त रूप से आयोजन किया।
- 75 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने training पूरी की।
- AI आधारित tools का practical training दिया गया।
- Cyber Security और cyber crime investigation पर focus रहा।
- OSINT techniques की जानकारी दी गई।
- Digital evidence के analysis पर training दी गई।
- practical exercises और simulations programme का हिस्सा रहे।
- DGP राजीव कुमार शर्मा ने 17 अगस्त को कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
- ADG वी.के. सिंह ने समापन पर certificates प्रदान किए।
- Kota Range IG Harendra Mahawar के मार्गदर्शन में कार्यक्रम हुआ।
- SP Tejaswini Gautam की पहल पर training आयोजित हुई।
- IIIT Kota के Professor Gyan Singh और उनकी team ने technical support दिया।
तकनीक से मजबूत होगी राजस्थान पुलिस
कुल मिलाकर Rajasthan Police Smart Policing initiative का मकसद पुलिसकर्मियों को बदलते crime pattern के मुताबिक तैयार करना है। Cyber fraud, online crime और digital evidence से जुड़े मामलों में technology की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
AI, Cyber Security और OSINT जैसी technologies की practical understanding मिलने से trained police personnel को digital investigations में नई मदद मिलने की उम्मीद है।
कोटा शहर पुलिस और IIIT Kota की यह partnership policing और technical education institutions के बीच collaboration का भी उदाहरण है। आने वाले समय में इस तरह के programmes का विस्तार होने पर अधिक police personnel को emerging technologies में trained किया जा सकता है।
राजस्थान पुलिस की आधिकारिक जानकारी के लिए Rajasthan Police की वेबसाइट देखी जा सकती है। साइबर फ्रॉड की स्थिति में राष्ट्रीय Cyber Crime Helpline 1930 पर संपर्क किया जा सकता है।
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