बचपन की नोकझोंक, बहन की विदाई, शादी के बाद बदलती जिम्मेदारियां और बहन-पत्नी के बीच खामोश होता भाई—यह विशेष प्रस्तुति रिश्तों के उन्हीं भावों को सामने लाती है, जो अक्सर शब्दों में नहीं कहे जाते। भाई कभी पिता की तरह बहन की ढाल बनता है, तो बहन मां की तरह उसका हर दर्द पहचान लेती है। जिंदगी की मुश्किलों, मायके की दहलीज और परिवार की उलझनों के बीच राखी का धागा हर साल दोनों को उनके बचपन की याद दिलाता है। देखिए हास्य और भावनाओं से भरी यह खास कहानी।




