TVF की चर्चित वेब सीरीज ‘ग्राम चिकित्सालय’ का दूसरा सीजन पहले से ज्यादा परिपक्व और प्रभावशाली नजर आता है। यह सिर्फ एक डॉक्टर की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था, अंधविश्वास और रोजमर्रा की चुनौतियों का सजीव चित्रण है।
ग्रामीण भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था पर आधारित वेब सीरीज ‘ग्राम चिकित्सालय’ का दूसरा सीजन एक बार फिर दर्शकों को भटकांडी गांव की दुनिया में ले जाता है। सीरीज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गंभीर सामाजिक मुद्दों को बिना भाषण दिए और बिना अतिनाटकीयता के बेहद सहज तरीके से सामने रखती है।
सीजन 2 की शुरुआत एक ऐसे दृश्य से होती है, जो हास्यपूर्ण जरूर लगता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की वास्तविकता को भी उजागर करता है। एक महिला को प्रसव पीड़ा होती है और स्थानीय झोलाछाप डॉक्टर इलाज के नाम पर हवन कराने की सलाह देता है। आखिरकार उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले जाया जाता है। यही वह क्षण है, जहां से सीरीज अपनी असली ताकत दिखाना शुरू करती है।
डॉ. प्रभात की नई चुनौती
पहले सीजन में डॉ. प्रभात सिन्हा (अमोल पाराशर) ने गांव के लोगों का थोड़ा-बहुत भरोसा जीतना शुरू किया था। दूसरे सीजन में भी वह उसी जिद और ईमानदारी के साथ स्वास्थ्य केंद्र को बेहतर बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
हालांकि PHC की कई शुरुआती समस्याएं अब सुलझ चुकी हैं, लेकिन एक बड़ी चुनौती अब भी सामने है। करीब 5,000 आबादी वाले गांव में भी डॉक्टर प्रभात के पास दिनभर में मुश्किल से 10-15 मरीज पहुंचते हैं। दूसरी ओर, सड़क के उस पार बैठे झोलाछाप डॉक्टर चेतक कुमार (विनय पाठक) के यहां मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है।
किडनी स्टोन के लिए ताड़ी और अन्य बीमारियों के लिए धार्मिक अनुष्ठानों जैसी सलाह देने वाले चेतक पर गांव वालों का भरोसा, आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरता है।
व्यवस्था बदलने की जिद
इस सीजन में प्रभात का लक्ष्य आदर्श PHC पुरस्कार हासिल करना है। लेकिन यह सिर्फ सम्मान पाने की इच्छा नहीं, बल्कि अस्पताल के लिए बेहतर सुविधाएं और दवाइयों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश भी है।
सीरीज दिखाती है कि कैसे ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में काम करने वाले डॉक्टरों को सिर्फ मरीजों की बीमारी ही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, संसाधनों की कमी और सामाजिक मान्यताओं से भी लड़ना पड़ता है।
कलाकारों का शानदार अभिनय
अमोल पाराशर ने डॉ. प्रभात के किरदार में ईमानदारी और संवेदनशीलता को प्रभावशाली ढंग से पेश किया है। उनका किरदार कई बार आदर्शवादी नजर आता है, लेकिन यही उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है।
वहीं विनय पाठक ने झोलाछाप डॉक्टर चेतक कुमार के रूप में शानदार काम किया है। उनका अभिनय एक साथ हास्य भी पैदा करता है और दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करता है।
कंपाउंडर भूतानी के किरदार में आनंदेश्वर द्विवेदी एक बार फिर अपने संवादों और कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। वहीं गोविंद के रूप में आकाश मखीजा का प्रदर्शन भी काफी प्रभावशाली है। उनका ट्रैक नौकरी, सिफारिश और रिश्वत जैसे मुद्दों को सामने लाता है।
गर्गी और प्रभात की दिलचस्प केमिस्ट्री
इस बार डॉ. गर्गी सिंह (आकांक्षा रंजन) के किरदार को भी ज्यादा महत्व दिया गया है। वह कई मौकों पर प्रभात की मदद करती नजर आती हैं और दोनों के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक भी देखने को मिलती है।
हालांकि सीरीज में फिलहाल कोई रोमांटिक ट्रैक नहीं है, लेकिन दोनों किरदारों के बीच बनता रिश्ता कहानी में एक अलग आकर्षण जोड़ता है।
कैमियो और ग्रामीण माहौल बनाते हैं सीरीज को खास
सीजन में भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ भी विशेष भूमिका में नजर आते हैं। इसके अलावा ‘पंचायत’ के लोकप्रिय किरदार बिनोद और भुषण उर्फ बनराकस की झलक भी दर्शकों को देखने को मिलती है।
निर्देशक ललितम आनंद ने गांव के माहौल को बेहद वास्तविक तरीके से पर्दे पर उतारा है। स्थानीय बोली, रीति-रिवाज, गोलगप्पे, गांव की शादियां और रोजमर्रा की हलचल सीरीज को और अधिक प्रामाणिक बनाती हैं।
कुछ कमियां भी हैं मौजूद
हालांकि सीरीज कई मामलों में मजबूत साबित होती है, लेकिन इसकी रफ्तार कुछ जगहों पर धीमी पड़ जाती है। कुछ घटनाओं और दृश्यों को जरूरत से ज्यादा समय दिया गया है, जिससे कहानी की गति प्रभावित होती है।
इसके अलावा कई बार डॉ. प्रभात का किरदार ‘पंचायत’ के सचिव जी की याद दिलाता है। हालांकि दोनों कहानियों का विषय अलग है, फिर भी दोनों में एक समान भावनात्मक टोन देखने को मिलता है।
देखनी चाहिए या नहीं?
‘ग्राम चिकित्सालय’ सीजन 2 कोई बड़ी या चौंकाने वाली कहानी पेश नहीं करता, लेकिन यह अपने विषय के साथ पूरी ईमानदारी बरतता है। सीरीज मनोरंजन के साथ-साथ यह सवाल भी उठाती है कि आखिर एक टूटी हुई व्यवस्था को भीतर से बदलना कितना मुश्किल होता है।
हास्य, संवेदनशीलता और सामाजिक यथार्थ का संतुलित मिश्रण इस सीजन को खास बनाता है। अगर आपको ‘पंचायत’ जैसी जमीन से जुड़ी कहानियां पसंद हैं, तो ‘ग्राम चिकित्सालय’ का दूसरा सीजन निश्चित रूप से आपकी वॉचलिस्ट में होना चाहिए।
रेटिंग: 3.5/5
जहां ग्रामीण भारत की सच्चाई और बेहतरीन अभिनय प्रभावित करते हैं, वहीं धीमी गति इसे एक बेहतरीन सीरीज बनने से थोड़ा रोक देती है।
‘ग्राम चिकित्सालय’ सीजन 2 फिलहाल Prime Video पर स्ट्रीम हो रहा है।
