धार्मिक आयोजनों में प्यासे को पानी पिलाना हमारी सनातन संस्कृति की महान परंपरा है। लेकिन जब वही आयोजन खत्म होने के बाद सड़कों पर प्लास्टिक के ग्लास और कचरे का ढेर छोड़ जाते हैं, तो यह सिर्फ गंदगी नहीं फैलाता, बल्कि बेजुबान पशुओं, पर्यावरण और पूरे शहर के लिए गंभीर खतरा बन जाता है। इस विशेष प्रस्तुति में देखिए कैसे एक छोटी-सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है और क्यों सेवा के साथ स्वच्छता भी उतनी ही जरूरी है। आइए, मिलकर संकल्प लें—पुण्य भी कमाएंगे और अपने शहर को भी स्वच्छ रखेंगे।
