Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है, लेकिन जयपुर में मतदान के दौरान दिखाई दिया एक अनोखा नजारा अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। जगतपुरा क्षेत्र के वार्ड नंबर 66 में महात्मा गांधी स्कूल स्थित मतदान केंद्र के बाहर BJP और कांग्रेस के चुनावी काउंटरों के साथ एक अलग ‘NOTA की टेबल’ लगाई गई। यहां मौजूद लोग मतदाताओं से किसी उम्मीदवार को चुनने के बजाय EVM में ‘None of the Above’ यानी NOTA का विकल्प चुनने की अपील करते नजर आए। इस घटनाक्रम की स्थानीय रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट भी सामने आए हैं।
यह अभियान केवल स्थानीय प्रत्याशी को लेकर नाराजगी तक सीमित नहीं था। टेबल पर ‘UGC Rollback’ और NOTA से जुड़े संदेश भी दिखाई दिए। इससे यह संकेत मिला कि UGC के 2026 Equity Regulations को लेकर चल रहा विरोध अब नगर निकाय चुनाव के मतदान तक पहुंच चुका है। जयपुर के दूसरे इलाकों में भी मतदान के दौरान UGC Rollback के नारे सुनाई दिए।
Rajasthan Nikay Chunav 2026 में क्या है ‘NOTA की टेबल’?
आमतौर पर मतदान केंद्रों के आसपास राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं के जरिए मतदाताओं को voter list में नाम और बूथ संबंधी जानकारी उपलब्ध कराते हैं। लेकिन जगतपुरा के वार्ड 66 में इस बार BJP और कांग्रेस के साथ एक अलग टेबल ने लोगों का ध्यान खींचा।
इस टेबल पर मौजूद लोगों ने किसी उम्मीदवार का प्रचार करने की बजाय मतदाताओं से NOTA चुनने की अपील की। वहां लगाए गए संदेशों में UGC से जुड़े नियमों का विरोध भी दिखाई दिया।
यानी यह किसी तीसरे राजनीतिक दल की चुनावी टेबल नहीं थी, बल्कि चुनाव के जरिए असंतोष जाहिर करने की एक प्रतीकात्मक कोशिश थी।
Rajasthan Nikay Chunav 2026: UGC Rollback से चुनाव तक कैसे पहुंचा विरोध?
Rajasthan Nikay Chunav 2026 से पहले ही राजस्थान में UGC के 2026 Equity Regulations के खिलाफ कई संगठन प्रदर्शन कर चुके हैं।
इन नियमों का आधिकारिक नाम University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 है। नियमों को 13 जनवरी को notify किया गया था। इसके बाद इनके कुछ प्रावधानों को लेकर विरोध और कानूनी चुनौती सामने आई।
29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को फिलहाल लागू न करने का आदेश दिया और पुराने 2012 Regulations को जारी रखने को कहा। अगस्त में केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2026 के नियमों पर फिर से विचार किया जा रहा है।
राजस्थान में श्री राजपूत करणी सेना सहित कुछ संगठनों ने इन्हीं Regulations को वापस लेने की मांग पर प्रदर्शन किए हैं। अगस्त में जयपुर में इस मुद्दे पर बड़ा विरोध प्रदर्शन भी हुआ था।
चुनाव से पहले ही शुरू हो गया था NOTA अभियान
जगतपुरा में मतदान वाले दिन दिखाई दिया NOTA अभियान अचानक शुरू नहीं हुआ।
8 सितंबर को जयपुर में राष्ट्रीय आमजन मोर्चा और दूसरे संगठनों ने UGC Rollback की मांग को लेकर NOTA campaign चलाने की घोषणा की थी। संगठनों ने स्थानीय निकाय चुनाव में अपनी नाराजगी वोट के जरिए जाहिर करने की बात कही थी।
इससे पहले विद्याधर नगर क्षेत्र में भी ‘UGC Rollback’ के पोस्टर दिखाई दिए थे। वहां कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन वाले इलाकों में इन पोस्टरों को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई थी। BJP नेताओं ने हालांकि दावा किया था कि UGC का विषय स्थानीय निकाय चुनाव का मुद्दा नहीं है।
Rajasthan Nikay Chunav 2026: डिप्टी CM दीया कुमारी के सामने भी लगे नारे
UGC विरोध का असर मतदान के दिन सिर्फ वार्ड 66 तक सीमित नहीं रहा।
जयपुर के खातीपुरा इलाके में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी जब एक मतदान केंद्र के आसपास पहुंचीं तो कुछ लोगों ने उनके सामने ‘UGC Rollback’ के नारे लगाए। इससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए।
यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि विद्याधर नगर को लंबे समय से BJP का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता रहा है।
हालांकि किसी विरोध प्रदर्शन या नारेबाजी को पूरे क्षेत्र के मतदाताओं की राय मानना सही नहीं होगा। वास्तविक चुनावी असर 14 सितंबर की मतगणना में ही स्पष्ट होगा।
BJP से नाराजगी भी बनी वजह?
वार्ड 66 में NOTA की अपील कर रहे लोगों ने स्थानीय प्रत्याशी चयन और BJP की कार्यशैली को लेकर नाराजगी भी जाहिर की।
स्थानीय रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ मतदाता BJP से असंतुष्ट होने के बावजूद कांग्रेस या दूसरे प्रत्याशियों का समर्थन नहीं करना चाहते थे। ऐसे लोगों के लिए NOTA को विरोध दर्ज कराने का विकल्प बताया गया।
इससे चुनावी समीकरण में एक दिलचस्प स्थिति बन सकती है।
अगर किसी वार्ड में बड़ी संख्या में परंपरागत BJP समर्थक NOTA की तरफ जाते हैं तो उसका असर सीधे BJP प्रत्याशी के vote share पर पड़ सकता है। लेकिन इसका लाभ किस प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को मिलेगा, यह उस वार्ड के बाकी वोटों के बंटवारे पर निर्भर करेगा।
इसी वजह से केवल NOTA के कुल वोट देखकर पूरे जयपुर के चुनावी रुझान का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
Rajasthan Nikay Chunav 2026: NOTA से किसका बिगड़ सकता है गणित?
Rajasthan Nikay Chunav 2026 में Jaipur Municipal Corporation के कई वार्डों में BJP, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला है।
ऐसे में यदि जीत-हार का अंतर कुछ दर्जन या कुछ सौ वोटों का रहता है और उसी वार्ड में NOTA को बड़ी संख्या में वोट मिलते हैं तो राजनीतिक दल इसे अपने संभावित समर्थन में सेंध के तौर पर देख सकते हैं।
लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि NOTA को दिया गया वोट BJP से हटकर सीधे कांग्रेस, किसी निर्दलीय या किसी दूसरे उम्मीदवार को नहीं मिलता।
इसका राजनीतिक महत्व मुख्य तौर पर यह बताने में होता है कि मतदाताओं का एक हिस्सा उपलब्ध उम्मीदवारों में से किसी को भी पसंद नहीं कर रहा था।
इसलिए ‘NOTA की टेबल’ का सबसे बड़ा असर नतीजे से ज्यादा राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा सकता है।
Rajasthan Nikay Chunav 2026: जयपुर में 63.55% मतदान
जयपुर नगर निगम के सभी 150 वार्डों में 11 सितंबर को वोटिंग कराई गई।
अंतिम आंकड़ों के मुताबिक जयपुर नगर निगम में 63.55 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह पिछले निकाय चुनाव की तुलना में भी उल्लेखनीय turnout रहा।
इस बार Jaipur Municipal Corporation की 150 सीटों पर कुल 723 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। मतदान से पहले यहां 24.33 लाख से ज्यादा मतदाता registered थे।
उच्च मतदान और कई वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण BJP और कांग्रेस दोनों के लिए चुनावी गणित सीधा नहीं माना जा रहा है।
Rajasthan Nikay Chunav 2026: 14 सितंबर को खुलेगा EVM का राज
अब सभी उम्मीदवारों की किस्मत EVM में बंद है।
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक सभी 309 नगरीय निकायों के पार्षद पदों की मतगणना 14 सितंबर को सुबह 8 बजे शुरू होगी।
इसके बाद 21 सितंबर को महापौर और अन्य निकाय प्रमुखों का चुनाव होगा, जबकि 22 सितंबर को उपमहापौर और उपाध्यक्ष पदों की प्रक्रिया होगी।
इसलिए जयपुर में कौन-सा दल बहुमत के करीब पहुंचता है और निर्दलीय या छोटे अंतर वाले वार्ड क्या भूमिका निभाते हैं, इसका फैसला 14 सितंबर को साफ होगा।

Rajasthan Nikay Chunav 2026 की बड़ी बातें
- जयपुर नगर निगम के वार्ड 66 में मतदान केंद्र के बाहर ‘NOTA की टेबल’ लगाई गई।
- यहां मतदाताओं से NOTA चुनने की अपील की गई।
- अभियान में UGC Rollback की मांग भी प्रमुख रूप से दिखाई दी।
- राजस्थान में UGC Equity Regulations 2026 को लेकर पहले से विरोध चल रहा है।
- सुप्रीम कोर्ट ने इन Regulations को फिलहाल abeyance में रखा हुआ है।
- केंद्र सरकार भी नियमों पर पुनर्विचार कर रही है।
- मतदान के दौरान जयपुर के दूसरे इलाके में दीया कुमारी के सामने भी UGC Rollback के नारे लगे।
- जयपुर के 150 वार्डों में 63.55% मतदान दर्ज हुआ।
- चुनाव मैदान में कुल 723 प्रत्याशी हैं।
- मतगणना 14 सितंबर को सुबह 8 बजे शुरू होगी।
- निकाय प्रमुखों और महापौर का चुनाव 21 सितंबर को होगा।
क्या चुनाव में असर दिखाएगी ‘NOTA की टेबल’?
कुल मिलाकर Rajasthan Nikay Chunav 2026 में जगतपुरा की ‘NOTA की टेबल’ चुनावी दिन की सामान्य तस्वीर से बिल्कुल अलग रही। इसका सबसे अहम पहलू यह है कि UGC Rollback जैसे राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा नीति से जुड़े विवाद ने स्थानीय नगर निगम चुनाव में भी जगह बनाई।
इसे BJP के खिलाफ व्यापक जनादेश कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन यदि वार्ड 66 या दूसरे प्रभावित क्षेत्रों में NOTA का आंकड़ा सामान्य से काफी ऊपर रहता है और जीत का अंतर कम होता है तो राजनीतिक दलों के लिए यह महत्वपूर्ण संकेत जरूर होगा।
Rajasthan Nikay Chunav 2026, 14 सितंबर की मतगणना के बाद ही साफ होगा कि ‘NOTA की टेबल’ केवल प्रतीकात्मक विरोध रही या उसने वास्तव में किसी प्रत्याशी का चुनावी गणित भी बदला।
राजस्थान निकाय चुनाव की आधिकारिक जानकारी के लिए Rajasthan State Election Commission देख सकते हैं। UGC Regulations की कानूनी स्थिति के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार से जुड़ी आधिकारिक जानकारी भी उपयोगी रहेगी। राजस्थान की अन्य खबरों के लिए The News Canvas पढ़ें।

