BRICS Joint Statement: नई दिल्ली में शुरू हुए 18वें BRICS Summit से पहले भारत को एक अहम कूटनीतिक सफलता मिली है। पश्चिम एशिया संघर्ष समेत कई संवेदनशील मुद्दों पर सदस्य देशों के अलग-अलग रुख के बावजूद negotiators संयुक्त घोषणा के लिए साझा भाषा पर सहमत हो गए हैं। इस सहमति तक पहुंचने के लिए बातचीत शुक्रवार रात से शनिवार तड़के करीब 4 बजे तक चली।
इस बातचीत की सबसे बड़ी चुनौती ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर गहरे मतभेद थे। मई में भारत की अध्यक्षता में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक भी इन्हीं मतभेदों के कारण सर्वसम्मत joint statement जारी नहीं कर पाई थी। उस समय केवल Chair’s Statement जारी हो सका था।
अब Leaders’ Summit से ठीक पहले consensus बनना भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि BRICS का विस्तार होने के साथ उसके सदस्य देशों के रणनीतिक और विदेश नीति हित काफी अलग-अलग हो चुके हैं।
BRICS Joint Statement पर क्यों अटका था मामला?
BRICS Joint Statement तैयार करने में सबसे कठिन हिस्सा पश्चिम एशिया से जुड़ा शब्दांकन था।
रिपोर्टों के मुताबिक मई की BRICS Foreign Ministers Meeting में ईरान चाहता था कि अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की स्पष्ट निंदा की जाए। दूसरी तरफ UAE ईरान की ओर से हुए हमलों का उल्लेख चाहता था। इन विरोधी मांगों की वजह से उस बैठक में सर्वसम्मत communique जारी नहीं हो पाया था।
सितंबर के Leaders’ Summit से पहले भारत के सामने चुनौती थी कि ऐसा formulation तैयार किया जाए जो किसी एक पक्ष की भाषा न लगे और सभी देशों के लिए स्वीकार्य हो।
Reuters के मुताबिक प्रस्तावित declaration में किसी खास देश का नाम लिए बिना एकतरफा युद्ध या सैन्य कार्रवाई की आलोचना करने वाला व्यापक शब्दांकन शामिल किए जाने की संभावना है।
BRICS Joint Statement: तड़के 4 बजे तक चली बातचीत
सहमति आसानी से नहीं बनी।
सरकारी सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक negotiators ने कई contentious issues पर लगातार चर्चा की और बातचीत शनिवार सुबह करीब चार बजे तक चली।
भारत ने अलग-अलग पक्षों से लगातार consultations कीं ताकि मतभेद के बावजूद summit बिना joint declaration के खत्म न हो। दूसरे सदस्य देशों ने भी consensus बनाने के प्रयास का समर्थन किया।
यही वजह है कि इस घटनाक्रम को सिर्फ declaration तैयार होना नहीं, बल्कि BRICS जैसे तेजी से विस्तारित मंच के भीतर consensus-building की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
BRICS Joint Statement: ईरान-UAE मतभेद बने सबसे बड़ी चुनौती
इस बार सबसे स्पष्ट geopolitical divide Iran और UAE के बीच दिखाई दिया।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने BRICS के भीतर भी तनाव बढ़ाया है। Reuters के अनुसार ईरान और UAE मौजूदा Gulf conflict में अलग-अलग पक्षों पर हैं। इसी मतभेद ने मई में संयुक्त बयान को रोक दिया था।
भारत के लिए स्थिति और संवेदनशील इसलिए है क्योंकि नई दिल्ली के:
- ईरान के साथ रणनीतिक और connectivity संबंध हैं
- UAE और Saudi Arabia के साथ मजबूत व्यापारिक व रणनीतिक साझेदारी है
- अमेरिका और इजरायल के साथ भी गहरे संबंध हैं
- रूस के साथ दशकों पुरानी strategic partnership है
इस वजह से भारत का प्रयास किसी एक पक्ष की लाइन लेने के बजाय ऐसा common ground तैयार करने का रहा जिस पर समूह के अलग-अलग सदस्य सहमत हो सकें।
BRICS Joint Statement: Saudi Arabia का भी अहम रोल
Saudi Arabia की भागीदारी भी इस summit को महत्वपूर्ण बनाती है।
नई दिल्ली में Saudi Arabia का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan Al Saud कर रहे हैं। वहीं UAE delegation का नेतृत्व Abu Dhabi Crown Prince Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan कर रहे हैं।
Saudi Arabia की BRICS status को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्रोतों में कुछ अंतर है। भारत सरकार की BRICS 2026 background material उसे 11 सदस्य देशों की सूची में शामिल करती है, जबकि Reuters ने लिखा है कि Riyadh ने formal accession को लेकर अब तक ambiguity बनाए रखी है।
इसलिए खबर में Saudi Arabia को BRICS प्रक्रिया का हिस्सा कहना सुरक्षित है, लेकिन उसकी formal membership status को लेकर स्रोतों में अंतर मौजूद है।
BRICS Joint Statement: PM Modi की Iran और UAE से अलग-अलग बातचीत
सहमति की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अलग-अलग नेताओं से हुई बातचीत भी महत्वपूर्ण रही।
मोदी ने summit से पहले Iranian President Masoud Pezeshkian से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने Abu Dhabi Crown Prince Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan से भी मुलाकात की।
इन बैठकों के बीच भारत ने यह कोशिश जारी रखी कि bilateral मतभेद BRICS के संयुक्त दस्तावेज को बाधित न करें।
भारत के लिए यह balancing act इसलिए भी अहम है क्योंकि पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े संघर्ष का असर crude oil, shipping routes, भारतीय नागरिकों और व्यापार पर सीधे पड़ता है।
BRICS Joint Statement में किन मुद्दों पर रह सकती है नजर?
BRICS Joint Statement का अंतिम आधिकारिक टेक्स्ट जारी होने के बाद ही सभी बिंदु स्पष्ट होंगे, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों में कई प्रमुख विषयों का संकेत मिला है।
इनमें आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख, global governance institutions में सुधार, multilateralism को मजबूत करना, व्यापार और आर्थिक सहयोग तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे संस्थानों में reform शामिल हैं। Indian Express के मुताबिक declaration में भारत की UNSC reform की मांग को भी समर्थन मिलने की संभावना है।
इसके अलावा मौजूदा geopolitical conflicts और unilateral economic measures पर भी भाषा महत्वपूर्ण रहेगी।
BRICS Joint Statement: 12-13 सितंबर को दिल्ली में 18वां BRICS Summit
भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है। भारत की 2026 chairship की theme है “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability.”
Summit में दुनिया के कई बड़े नेता और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।
प्रमुख चेहरों में:
- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
- दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा
- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान
- मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी
- इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो
- इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद
शामिल हैं।
ब्राजील का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री Mauro Vieira कर रहे हैं। UAE की तरफ से Abu Dhabi Crown Prince और Saudi Arabia की तरफ से Foreign Minister summit में मौजूद हैं।
BRICS Joint Statement: 7 साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग
BRICS Summit का एक और बड़ा diplomatic development Chinese President Xi Jinping की भारत यात्रा है।
शी शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे। यह करीब सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा है। भारत-चीन संबंधों में 2020 के सीमा संघर्ष के बाद आई तनातनी को देखते हुए Xi की मौजूदगी पर खास नजर है।
Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी की द्विपक्षीय बातचीत भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
BRICS का विस्तार, consensus की चुनौती भी बढ़ी
BRICS कभी Brazil, Russia, India, China और South Africa के पांच देशों का मंच था। बाद में Egypt, Ethiopia, Iran, UAE और Indonesia जैसे देश इसमें शामिल हुए।
Expansion से BRICS की आर्थिक और राजनीतिक ताकत बढ़ी है, लेकिन साथ ही consensus बनाना कठिन भी हुआ है।
Reuters के मुताबिक अलग-अलग सदस्यों की geopolitical priorities और BRICS की भूमिका को लेकर सोच एक जैसी नहीं है। Russia और China इसे Western-dominated system के counterweight के रूप में अधिक देखते हैं, जबकि India जैसे देश आर्थिक सहयोग, Global South और multilateral institutional reform पर जोर देते हैं।
इसी वजह से joint declaration पर agreement अपने आप में महत्वपूर्ण है।
BRICS Joint Statement की बड़ी बातें
- BRICS joint declaration पर negotiators के बीच सहमति बनी है।
- बातचीत शनिवार तड़के करीब 4 बजे तक चली।
- सबसे बड़ी चुनौती Iran और UAE के बीच West Asia conflict पर मतभेद थे।
- मई की BRICS Foreign Ministers Meeting में इन्हीं मतभेदों के कारण संयुक्त बयान नहीं आ पाया था।
- भारत ने लगातार consultations के जरिए common ground तैयार करने की कोशिश की।
- proposed declaration में किसी खास देश का नाम लिए बिना unilateral war की आलोचना की भाषा हो सकती है।
- 18वां BRICS Summit 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में हो रहा है।
- Xi Jinping, Vladimir Putin, Masoud Pezeshkian और Cyril Ramaphosa समेत कई बड़े नेता मौजूद हैं।
- final declaration का पूरा आधिकारिक text जारी होने के बाद उसकी exact wording साफ होगी।
BRICS Joint Statement: भारत के लिए क्यों बड़ी है यह सहमति?
कुल मिलाकर BRICS Joint Statement पर consensus भारत के लिए एक अहम diplomatic outcome है। विस्तारित BRICS में ऐसे देश एक ही मेज पर बैठे हैं जिनके बीच युद्ध, sanctions, regional security और global institutions को लेकर कई बार बिल्कुल अलग रुख दिखाई देता है।
BRICS Joint Statement, ऐसे माहौल में तड़के चार बजे तक चली बातचीत के बाद joint declaration की भाषा पर सहमति बनना भारत की consensus-building भूमिका को रेखांकित करता है। हालांकि declaration की असली राजनीतिक अहमियत उसके final official text से तय होगी—खास तौर पर यह देखकर कि West Asia conflict, terrorism, sanctions और global governance reforms पर कौन-सी भाषा अपनाई गई है।
BRICS 2026 की आधिकारिक जानकारी के लिए भारत सरकार की BRICS 2026 जानकारी और PIB का BRICS 2026 Backgrounder देखा जा सकता है।
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