Ashok Gehlot Divyangjan Meeting: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर स्थित अपने निवास पर बड़ी संख्या में पहुंचे दिव्यांगजनों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। करीब डेढ़ घंटे से ज्यादा चले संवाद के दौरान पेंशन, रोजगार, आवास, स्वास्थ्य सुविधाओं, RGHS के तहत दवाओं की उपलब्धता और प्रशासनिक स्तर पर लंबित मामलों जैसे मुद्दे सामने आए।
इस दौरान गहलोत ने राज्य में दिव्यांगजन आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने को लेकर भजनलाल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सरकार दिव्यांगजनों के अधिकारों से जुड़े इतने अहम पद पर नियुक्ति नहीं कर पा रही, उससे इस वर्ग के लिए दूसरी बड़ी योजनाओं की कितनी उम्मीद की जा सकती है।
गहलोत ने कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आयुक्त की नियुक्ति और बैठक में सामने आई दूसरी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे।
Ashok Gehlot Divyangjan Meeting में आयुक्त पद पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन आयुक्त का पद केवल प्रशासनिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह दिव्यांग लोगों की शिकायतों, अधिकारों और सरकारी विभागों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण व्यवस्था है।
गहलोत ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान तीन बार निःशक्तजन आयुक्त की नियुक्ति की गई थी, लेकिन वर्तमान सरकार में यह पद लंबे समय से नहीं भरा गया है।
इस मुद्दे पर आधिकारिक रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण है। केंद्र के Office of Chief Commissioner for Persons with Disabilities की 3 जून 2026 की सूची में राजस्थान के State Commissioner for Persons with Disabilities का पद रिक्त दिखाया गया था।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि 29 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने Rajive Raturi vs Union of India मामले में राजस्थान सहित उन राज्यों को चार सप्ताह के भीतर स्वतंत्र State Commissioner नियुक्त करने को कहा था, जहां पद खाली था। अदालत ने साफ किया था कि आयुक्त को केवल अतिरिक्त प्रभार के रूप में नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।

‘जो सरकार आयुक्त नहीं बना सकती, उससे क्या उम्मीद करें’
दिव्यांगजनों से बातचीत के दौरान गहलोत ने सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि अगर सरकार आयुक्त की नियुक्ति ही नहीं कर सकती तो दिव्यांगजनों के लिए Housing Board जैसी अलग योजना की उम्मीद कैसे की जाए।
Ashok Gehlot Divyangjan Meeting, उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन की समस्याएं दूसरे वर्गों से कई मायनों में अलग होती हैं और इसलिए सरकार को इन्हें टॉप प्रायोरिटी में रखना चाहिए।
उनके मुताबिक एक सक्रिय दिव्यांगजन आयुक्त व्यक्तिगत शिकायतों की सुनवाई करने के साथ प्रशासन को जरूरी निर्देश देने और अधिकारों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करने की स्थिति में होता है।
दो दिव्यांग विश्वविद्यालयों का भी उठाया मुद्दा
Ashok Gehlot Divyangjan Meeting में पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में स्थापित दो दिव्यांग विश्वविद्यालयों का भी जिक्र किया।
राजस्थान में वर्ष 2023 में बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर और महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय, जोधपुर के लिए अलग-अलग कानून बनाए गए थे। India Code के रिकॉर्ड के अनुसार बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय अधिनियम अप्रैल 2023 और महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय अधिनियम सितंबर 2023 में अस्तित्व में आया।
गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद इन विश्वविद्यालयों को जिस रफ्तार से आगे बढ़ना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन पहले की सरकार द्वारा शुरू किए गए अच्छे जनहित के काम सिर्फ सत्ता परिवर्तन की वजह से बंद या धीमे नहीं होने चाहिए।

बाबा आमटे विश्वविद्यालय की अभी क्या स्थिति है?
इस मामले में वर्तमान आधिकारिक स्थिति भी जानना जरूरी है।
राजस्थान लोकभवन की 1 सितंबर 2026 तक अपडेट सूची के अनुसार बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर में प्रो. त्रिभुवन शर्मा के पास कुलगुरु का अतिरिक्त प्रभार है। यह व्यवस्था 29 मई 2026 से लागू है।
इससे पहले विश्वविद्यालय के प्रथम कुलगुरु प्रो. देवस्वरूप को 28 मई को राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पद से हटा दिया था। लोकभवन के मुताबिक उनके खिलाफ नियुक्तियों में अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों पर उच्चस्तरीय जांच के बाद यह कार्रवाई की गई थी।
इसलिए गहलोत का विश्वविद्यालयों को पर्याप्त रूप से आगे नहीं बढ़ाने वाला बयान राजनीतिक आकलन है; लेकिन यह कहना कि वर्तमान में वहां कोई कुलगुरु व्यवस्था नहीं है, सही नहीं होगा।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन ₹3,000 करने की मांग
दिव्यांगजनों से मुलाकात के दौरान अशोक गहलोत ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने केंद्र सरकार से बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर कम से कम ₹3,000 प्रतिमाह करने की मांग की।
गहलोत ने सुझाव दिया कि पेंशन की लागत केंद्र और राज्य सरकारें 50-50 प्रतिशत के अनुपात में वहन कर सकती हैं। 2 सितंबर को उन्होंने सार्वजनिक रूप से भी यही मांग रखी थी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा महंगाई में बेहद कम पेंशन राशि से जरूरतमंद परिवारों की दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल है।
सालाना 15% बढ़ोतरी का क्या है नियम?
Ashok Gehlot Divyangjan Meeting में पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में सामाजिक सुरक्षा पेंशन में हर साल 15 प्रतिशत वृद्धि का कानूनी प्रावधान करने का भी जिक्र किया।
यह दावा आधिकारिक विधानसभा रिकॉर्ड से पुष्ट होता है।
राजस्थान Minimum Guaranteed Income कानून के प्रावधान के मुताबिक पात्र वृद्ध, विशेष योग्यजन, विधवा और एकल महिला को मिलने वाली पेंशन के base rate में सालाना 15 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान किया गया था—5 प्रतिशत जुलाई और 10 प्रतिशत जनवरी में। यह व्यवस्था वित्त वर्ष 2024-25 से लागू होने के लिए बनाई गई थी।
गहलोत ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा को किसी सरकार की इच्छा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और न्यूनतम आर्थिक सहायता को समय के साथ बढ़ते रहना चाहिए।
Ashok Gehlot Divyangjan Meeting: कॉक्लियर इम्प्लांट योजना का किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान राजस्थान में बच्चों के लिए cochlear implant सुविधा निशुल्क शुरू करने का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सुनने में गंभीर समस्या वाले बच्चों और उनके परिवारों के लिए ऐसी महंगी चिकित्सा सुविधाओं को सरकारी सहायता के दायरे में लाना जरूरी है।
गहलोत के मुताबिक दिव्यांगजनों से जुड़ी योजनाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, rehabilitation और रोजगार को एक साथ जोड़कर नीति बनाई जानी चाहिए।

RGHS में दवा नहीं मिलने की शिकायत
बैठक में कई दिव्यांगजनों ने Rajasthan Government Health Scheme यानी RGHS के तहत जरूरी दवाएं समय पर नहीं मिलने की शिकायत भी रखी।
इस पर गहलोत ने कहा कि इलाज और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता में बाधा किसी भी मरीज के लिए परेशानी है, लेकिन दिव्यांग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए इसका असर और ज्यादा हो सकता है।
उन्होंने सरकार से ऐसी शिकायतों का प्राथमिकता से समाधान करने की मांग की।
रोजगार और आवास की मांग भी सामने आई
Ashok Gehlot Divyangjan Meeting में केवल पेंशन या स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं उठा। विभिन्न जिलों से आए लोगों ने सरकारी रोजगार, आरक्षण से संबंधित शिकायतें, आवास योजनाओं में प्राथमिकता और लंबित प्रशासनिक प्रकरण भी सामने रखे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इन सभी बिंदुओं को एकत्र कर दोबारा चर्चा करेंगे और इसके बाद राज्य सरकार को पत्र भेजेंगे।
उन्होंने दिव्यांगजनों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
Ashok Gehlot Divyangjan Meeting की बड़ी बातें
- अशोक गहलोत ने जयपुर स्थित निवास पर दिव्यांगजनों से संवाद किया।
- बैठक डेढ़ घंटे से ज्यादा चली।
- दिव्यांगजन आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने पर सरकार को घेरा।
- आधिकारिक केंद्रीय सूची में जून 2026 तक राजस्थान का आयुक्त पद रिक्त था।
- सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई को चार सप्ताह में स्वतंत्र आयुक्त नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
- गहलोत ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन ₹3,000 प्रतिमाह करने की मांग की।
- उन्होंने केंद्र और राज्य से 50-50 प्रतिशत राशि वहन करने का सुझाव दिया।
- राजस्थान के कानून में सामाजिक सुरक्षा पेंशन में सालाना 15% वृद्धि का प्रावधान किया गया था।
- बाबा आमटे और महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय दोनों 2023 के कानूनों से स्थापित हुए थे।
- बाबा आमटे विश्वविद्यालय का फिलहाल अतिरिक्त प्रभार प्रो. त्रिभुवन शर्मा के पास है।
- RGHS में दवाओं की उपलब्धता, रोजगार और आवास से जुड़ी समस्याएं भी बैठक में उठीं।
सरकार को पत्र लिखेंगे गहलोत
कुल मिलाकर Ashok Gehlot Divyangjan Meeting में सबसे बड़ा मुद्दा दिव्यांगजन आयुक्त की नियुक्ति का रहा। गहलोत ने इसे दिव्यांग लोगों के अधिकारों और शिकायत निवारण से सीधे जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि बैठक में सामने आए रोजगार, स्वास्थ्य, पेंशन, RGHS और आवास से जुड़े मामलों को भी राज्य सरकार के सामने रखा जाएगा।
दिव्यांगजन आयुक्त के मुद्दे की अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट जुलाई में राज्यों को नियुक्ति के लिए स्पष्ट समयसीमा दे चुका है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि राजस्थान सरकार स्वतंत्र State Commissioner की नियुक्ति को लेकर कब आधिकारिक आदेश जारी करती है।
आधिकारिक जानकारी के लिए Chief Commissioner for Persons with Disabilities और Rajasthan Social Justice & Empowerment Department देख सकते हैं। राजस्थान की दूसरी खबरों के लिए The News Canvas पढ़ें।

