DK Shivakumar FIR Demand: कर्नाटक में Special Intensive Revision यानी SIR और Form-7 को लेकर कांग्रेस और BJP का टकराव और तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों द्वारा बेंगलुरु स्थित Chief Electoral Officer कार्यालय के सामने धरना देने के एक दिन बाद BJP नेता शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। BJP ने मुख्यमंत्री और धरने में शामिल अन्य नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
BJP का आरोप है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने Bengaluru में protest को लेकर लागू न्यायिक और पुलिस संबंधी नियमों का उल्लंघन किया। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि जब आम प्रदर्शनकारियों पर निर्धारित स्थान से बाहर धरना देने पर कार्रवाई होती है तो सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के लिए अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। यह BJP का आरोप है; पुलिस ने खबर लिखे जाने तक शिवकुमार के खिलाफ इस आधार पर FIR दर्ज करने की कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं की थी।
DK Shivakumar FIR Demand: BJP नेता पहुंचे पुलिस कमिश्नर कार्यालय
बेंगलुरु में BJP प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोका और विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी समेत पार्टी नेताओं ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की।
BJP नेताओं ने ज्ञापन देकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके साथ Chief Electoral Officer के कार्यालय में धरना देने वाले मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस मुद्दे पर पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर BJP कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन भी किया।
BJP नेताओं का तर्क है कि कानून का पालन मुख्यमंत्री और आम नागरिक दोनों के लिए समान होना चाहिए।
DK Shivakumar FIR Demand: किस कोर्ट आदेश का हवाला दे रही BJP?
इस विवाद में Karnataka High Court का पुराना आदेश महत्वपूर्ण है।
मार्च 2022 में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि Bengaluru में political या non-political organisations के protest, meeting और procession Freedom Park के अलावा अन्य स्थान पर आयोजित न किए जाएं और traffic व public movement प्रभावित न हो। अगस्त 2022 के आदेश में भी अदालत ने सरकार से protests और dharnas को Freedom Park तक सीमित रखने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने को कहा था।
मार्च 2026 में Karnataka High Court ने एक अन्य मामले में भी कहा कि protest करने का अधिकार absolute नहीं है और शहर में demonstrations के लिए निर्धारित स्थान Freedom Park है।
इसी आधार पर BJP यह सवाल उठा रही है कि CEO कार्यालय के बाहर हुए धरने पर पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की।
हालांकि किसी विशेष protest ने अदालत के निर्देशों का कानूनी रूप से उल्लंघन किया या नहीं, इसका निर्धारण परिस्थितियों, अनुमति और पुलिस रिकॉर्ड को देखकर ही किया जा सकता है।
DK Shivakumar FIR Demand: एक दिन पहले CEO ऑफिस पर बैठे थे शिवकुमार
विवाद की शुरुआत गुरुवार, 1 अक्टूबर को हुई थी।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अपने कई मंत्रियों और कांग्रेस नेताओं के साथ Karnataka Chief Electoral Officer वी. अनबुकुमार के कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने राज्य में SIR के दौरान bulk Form-7 applications के जरिए कथित तौर पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप लगाया।
शिवकुमार ने BJP और JD(S) पर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कथित साजिश का आरोप लगाया और आपराधिक जांच तथा FIR की मांग की।
BJP ने इन आरोपों को खारिज किया है। प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र का कहना है कि Form-7 चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराया गया वैधानिक माध्यम है और इसके जरिए objections अलग-अलग राजनीतिक दलों तथा नागरिकों की ओर से भी दाखिल किए गए हैं।
DK Shivakumar FIR Demand: क्या होता है Form-7?
Form-7 का इस्तेमाल electoral roll में किसी व्यक्ति के नाम को शामिल करने पर objection दर्ज करने या मौजूदा मतदाता का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।
कर्नाटक में मौजूदा विवाद bulk में Form-7 जमा किए जाने और कुछ applications के कथित तौर पर pre-filled होने को लेकर है। शिवकुमार ने आरोप लगाया कि इसके जरिए minority, Dalit, OBC और अन्य मतदाताओं के नाम निशाना बनाए जा रहे हैं। BJP ने इन आरोपों से इनकार किया है।
DK Shivakumar FIR Demand: CEO ने false Form-7 पर कार्रवाई का दिया आदेश
शिवकुमार और मंत्रियों का धरना कई घंटे चला। इसके बाद Karnataka Chief Electoral Officer ने राज्य के सभी 224 Assembly constituencies के Electoral Registration Officers को निर्देश जारी किए।
CEO ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति Form-6, 6A, 7 या 8 में जानबूझकर गलत statement या declaration देता पाया जाता है तो उसके खिलाफ Representation of the People Act, 1950 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।
इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने धरना समाप्त कर दिया।
इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि BJP या कांग्रेस के सभी Form-7 applications गलत पाए गए हैं। हर संदिग्ध आवेदन की जांच और verification के बाद ही कार्रवाई की जानी है।
DK Shivakumar FIR Demand: तीन मामलों में FIR पहले ही दर्ज
Form-7 विवाद के बीच Karnataka में कुछ specific मामलों में FIR भी दर्ज हो चुकी हैं।
Indian Express के मुताबिक Mysuru, Bidar और Belagavi से जुड़े तीन मामलों में bulk voter-deletion applications को लेकर पुलिस केस दर्ज किए गए। Belagavi में BJP नेता Ravi Patil और अन्य के खिलाफ भी कथित रूप से minority voters के नाम हटवाने के लिए Form-7 जमा करने के मामले में FIR दर्ज होने की रिपोर्ट है।
इन FIRs में आरोपों की जांच जारी है और FIR दर्ज होना अपने-आप दोषसिद्धि नहीं है।
DK Shivakumar FIR Demand: शिवकुमार और विजयेंद्र आमने-सामने
शुक्रवार को भी दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी जारी रही।
बीवाई विजयेंद्र ने शिवकुमार के CEO office protest को राजनीतिक “drama” करार दिया और कांग्रेस पर पहले से voter rolls में कथित गड़बड़ी कराने के आरोप लगाए। शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि BJP नेताओं के बयानों से ही Form-7 मामले की जांच की जरूरत स्पष्ट होती है।
इस तरह SIR का विवाद अब दो समानांतर मुद्दों पर पहुंच गया है—एक तरफ Form-7 applications की genuineness और voter deletion की जांच, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री और मंत्रियों के CEO कार्यालय के सामने protest की वैधानिकता।
DK Shivakumar FIR Demand: अब आगे क्या?
DK Shivakumar FIR Demand मामले में BJP ने पुलिस से मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है, लेकिन अंतिम फैसला Bengaluru Police को उपलब्ध तथ्यों और लागू कानून के आधार पर करना है।
दूसरी ओर Election Commission ने false Form-7 applications की जांच और जानबूझकर गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में दो बातों पर नजर रहेगी—क्या Bengaluru Police CEO office protest को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई करती है और bulk Form-7 applications की जांच में किन व्यक्तियों या संगठनों की जिम्मेदारी सामने आती है।
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