Govind Singh Dotasra: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बाद महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और BJP सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा का दावा है कि जिन निकायों में BJP को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलीय और कांग्रेस समर्थित पार्षदों पर पुलिस-प्रशासन के जरिए दबाव बनाया जा रहा है। BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि निर्दलीय पार्षद अपनी इच्छा से उसके साथ आ रहे हैं।
डोटासरा ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यदि चुने हुए पार्षदों के फैसले को कथित दबाव के जरिए प्रभावित किया जाएगा, तो चुनाव कराने का औचित्य क्या रह जाएगा। उन्होंने अपने बयान में इसे जनता के जनादेश से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल में ऐसा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
Govind Singh Dotasra ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
Govind Singh Dotasra का आरोप है कि निकाय प्रमुखों के चुनाव से पहले कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने भरतपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, श्रीगंगानगर, कुचेरा, बहरोड़, बानसूर, दूनी, मंडावा, नीमराना, सीकर और अन्य क्षेत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि अलग-अलग जगहों पर पार्षदों या उनके परिजनों पर पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक दबाव की शिकायतें सामने आई हैं।
18 सितंबर को भी डोटासरा ने नागौर के कुचेरा में पुलिस की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित पार्षद निंबाराम को ले जाने के लिए भारी पुलिस बल पहुंचा। इसी तरह मंडावा, अलवर और सीकर से भी उन्होंने पुलिस हस्तक्षेप के आरोप लगाए। ये सभी कांग्रेस के आरोप हैं; पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियां प्रत्येक मामले में अलग हो सकती हैं।
Govind Singh Dotasra: ‘पर्ची मुख्यमंत्री’ कहकर साधा निशाना
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए अपनी पुरानी राजनीतिक टिप्पणी दोहराते हुए उन्हें कथित तौर पर “कमजोर” और “पर्ची मुख्यमंत्री” कहा। यह कांग्रेस नेता की राजनीतिक आलोचना है, कोई स्थापित तथ्य नहीं।
उनका दावा है कि निकाय बोर्ड बनाने से जुड़ी BJP की रणनीति में केंद्रीय और प्रदेश स्तर के नेता सक्रिय हैं तथा स्थानीय प्रशासन पर भी दबाव डाला जा रहा है।
इससे पहले भी डोटासरा आरोप लगा चुके हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय से अधिकारियों को ऐसे निर्दलीय और अन्य पार्षदों की पहचान करने के लिए कहा गया, जिनका समर्थन निकाय बोर्ड बनाने में निर्णायक हो सकता है। BJP इन आरोपों को नकारती रही है।
Govind Singh Dotasra: ‘गुजरात मॉडल’ का लगाया आरोप
Govind Singh Dotasra ने BJP की मौजूदा रणनीति को अपने शब्दों में “गुजरात मॉडल” बताया है।
उनका आरोप है कि इस कथित मॉडल में विपक्षी जनप्रतिनिधियों को डराने, दबाव बनाने और सत्ता के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई जाती है। यह डोटासरा और कांग्रेस की राजनीतिक व्याख्या है; BJP इसे स्वीकार नहीं करती।
डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस ऐसे कथित दबाव के मामलों का रिकॉर्ड तैयार करेगी और कार्यकर्ताओं से हर घटना की जानकारी पार्टी संगठन तक पहुंचाने को कहा है।
Govind Singh Dotasra: CM भजनलाल से डोटासरा का सीधा सवाल
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल किया कि अगर जनता द्वारा चुने गए पार्षदों के फैसले को कथित तौर पर पुलिस या प्रशासनिक दबाव से बदला जाए, तो लोकतांत्रिक चुनाव का मतलब क्या रह जाता है।
उन्होंने कहा कि अगर बोर्ड बनाने के लिए पार्षदों पर दबाव डालना ही है तो जनता से मतदान कराने की प्रक्रिया का सम्मान कैसे सुनिश्चित होगा।
इसी सिलसिले में उन्होंने मुख्यमंत्री को चेताते हुए कहा कि जनता ऐसे घटनाक्रम को याद रखेगी और “आपको कभी माफ नहीं करेगी।”
यह बयान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और उनके आरोपों की स्वतंत्र जांच या आधिकारिक पुष्टि अलग विषय है।
Govind Singh Dotasra: BJP ने आरोपों पर क्या जवाब दिया?
इस विवाद में BJP का पक्ष भी सामने आया है।
प्रदेश BJP अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे खरीद-फरोख्त और दबाव के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि निर्दलीय पार्षद यदि BJP का समर्थन कर रहे हैं तो वे विकास के लिए ऐसा कर रहे हैं और उन्हें “बिकाऊ” कहना चुने हुए जनप्रतिनिधियों का अपमान है।
राज्य के गृह मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने भी कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के लापता होने या जबरन कहीं रखे जाने की शिकायत पुलिस के पास आती है तो उसकी जांच करना पुलिस की जिम्मेदारी है। बेढम के मुताबिक लोगों के BJP से जुड़ने को सरकारी दबाव कहना सही नहीं है।
इस तरह कांग्रेस जहां पुलिस-प्रशासन के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगा रही है, वहीं BJP का कहना है कि पुलिस शिकायतों के आधार पर अपना नियमित काम कर रही है।
Govind Singh Dotasra: निर्दलीय पार्षद क्यों बने अहम?
राजस्थान के हालिया शहरी निकाय चुनाव में BJP राज्य स्तर पर सबसे ज्यादा वार्ड जीतने वाली पार्टी बनी, लेकिन बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी भी निर्वाचित हुए। कई नगर निगम, परिषद और पालिकाओं में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिससे बोर्ड गठन में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
यही कारण है कि नतीजों के बाद BJP और कांग्रेस दोनों अपने पार्षदों को एकजुट रखने और निर्दलीयों का समर्थन हासिल करने की कोशिश में हैं। कई स्थानों पर पार्षदों को होटल या रिसॉर्ट में रखे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
Govind Singh Dotasra: 21 सितंबर के चुनाव पर सबकी नजर
राजस्थान के 305 शहरी निकायों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के चुनाव 21 सितंबर को निर्धारित हैं। हालांकि जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम तथा सुकेत नगरपालिका में EVM से जुड़े पुनर्मतदान के कारण निकाय प्रमुखों का कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया है। इन चार निकायों में महापौर/अध्यक्ष पद के लिए मतदान अब 25 सितंबर 2026 को होगा।
इसलिए 21 सितंबर का दिन अधिकांश नगर निकायों के लिए अहम होगा, जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे प्रमुख नगर निगमों का फैसला बाद में होगा।
Govind Singh Dotasra: निकाय चुनाव की मौजूदा राजनीतिक स्थिति
नगर निकाय नतीजों के बाद कई जगह सत्ता का गणित बेहद नजदीकी है। जोधपुर जैसे शहरों में निर्दलीय पार्षद निर्णायक बने हैं। BJP ने वहां सात निर्दलीयों के समर्थन से बहुमत का दावा किया है, जबकि मेयर चुनाव 25 सितंबर को होना है।
जयपुर में BJP के पास बहुमत है, लेकिन कांग्रेस ने भी मेयर प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है और दावा किया है कि कुछ BJP पार्षद उसके संपर्क में हैं। यह कांग्रेस का दावा है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यही राजनीतिक अनिश्चितता पूरे प्रदेश में आरोप-प्रत्यारोप और पार्षदों की बाड़ेबंदी की वजह बन रही है।
Govind Singh Dotasra के बयान की बड़ी बातें
- डोटासरा ने BJP पर कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया।
- उन्होंने पुलिस और प्रशासन के कथित इस्तेमाल पर सवाल उठाए।
- CM भजनलाल शर्मा से पूछा कि यदि जनादेश प्रभावित किया जाएगा तो चुनाव का क्या अर्थ रह जाएगा।
- कांग्रेस नेता ने इसे अपने शब्दों में राजस्थान में “गुजरात मॉडल” लागू करने की कोशिश बताया।
- BJP ने खरीद-फरोख्त और सरकारी दबाव के आरोपों को खारिज किया।
- गृह मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि पुलिस शिकायत मिलने पर जांच कर रही है।
- अधिकांश निकायों में प्रमुख पदों का चुनाव 21 सितंबर को होगा।
- जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत में चुनाव 25 सितंबर तक टाल दिए गए हैं।
Govind Singh Dotasra: निकाय बोर्ड बनाने को लेकर सियासत तेज
कुल मिलाकर Govind Singh Dotasra का ताजा बयान राजस्थान में निकाय चुनाव के बाद शुरू हुई बोर्ड गठन की सियासत का हिस्सा है। कांग्रेस पार्षदों पर कथित दबाव और पुलिस के इस्तेमाल का आरोप लगा रही है, जबकि BJP ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि निर्दलीय जनप्रतिनिधि स्वेच्छा से उसका समर्थन कर रहे हैं।
अब अधिकांश निकायों में 21 सितंबर और जयपुर-जोधपुर-कोटा जैसे स्थगित निकायों में 25 सितंबर को होने वाले चुनाव से यह साफ होगा कि किन शहरों में किस दल या गठबंधन का बोर्ड बनता है। इन आरोपों से अलग अंतिम राजनीतिक संख्या निर्वाचित पार्षदों के मतदान से तय होगी।
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट
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