Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 सितंबर को प्रस्तावित क्षत्रिय करणी सेना के प्रदर्शन को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने के बाद संगठन ने हाई कोर्ट का रुख किया और मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। हालांकि बुधवार, 16 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे तुरंत सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पहले औपचारिक याचिका दाखिल की जाए, जिसके बाद मामला सामान्य प्रक्रिया के तहत अगले दिन सूचीबद्ध किया जाएगा।
क्षत्रिय करणी सेना ने आरक्षण नीतियों और University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को लेकर अपनी आपत्तियां जताने के लिए 20 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी।
Jantar Mantar Protest पर हाई कोर्ट में क्या हुआ?
Jantar Mantar Protest से जुड़ा मामला बुधवार को चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ के सामने urgent listing के लिए रखा गया।
क्षत्रिय करणी सेना ने दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती देने की तैयारी की है, जिसमें 20 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई।
हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध स्वीकार नहीं किया और याचिकाकर्ता से पहले नियमित प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करने को कहा। अदालत के मुताबिक याचिका दाखिल होने के बाद मामला 17 सितंबर को सूचीबद्ध किया जा सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हाई कोर्ट ने प्रदर्शन पर अंतिम रूप से रोक लगा दी है। फिलहाल विवाद दिल्ली पुलिस की अनुमति न मिलने को लेकर है और पुलिस के फैसले की वैधता पर अदालत को अभी सुनवाई करनी है।
Jantar Mantar Protest: पहले 6 सितंबर को होना था प्रदर्शन
करणी सेना ने शुरुआत में 6 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी।
दिल्ली पुलिस ने 28 अगस्त को उस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया था। उस समय राष्ट्रीय राजधानी में 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS Summit की तैयारियों का हवाला दिया गया था।
इसके बाद मामला 3 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा।
उस सुनवाई में जस्टिस अमित महाजन ने तत्काल अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा था कि पुलिस का पक्ष सुने बिना कोर्ट सीधे प्रदर्शन की इजाजत नहीं दे सकता। अदालत ने संगठन को प्रदर्शन की तारीख बदलने पर विचार करने का सुझाव भी दिया था।
इसके बाद क्षत्रिय करणी सेना ने प्रदर्शन की तारीख बदलकर 20 सितंबर कर दी।
Jantar Mantar Protest: पुलिस को 14 सितंबर तक फैसला लेने को कहा था
7 सितंबर को मामला फिर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने संगठन के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत को 20 सितंबर के Jantar Mantar Protest के लिए दिल्ली पुलिस के सामने नया आवेदन देने को कहा।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि वह नए आवेदन पर कानून और नियमों के अनुसार फैसला करे और अपना निर्णय 14 सितंबर तक संगठन को बता दे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि पुलिस प्रदर्शन की अनुमति देते समय कानून के मुताबिक उचित शर्तें लगा सकती है।
इसके बाद पुलिस ने 20 सितंबर के प्रदर्शन को भी अनुमति नहीं दी, जिसके खिलाफ अब करणी सेना ने फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
आखिर किस मुद्दे पर प्रदर्शन करना चाहती है करणी सेना?
करणी सेना की ओर से दाखिल पिछले मामले में कहा गया था कि संगठन आरक्षण नीतियों और UGC के नए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर अपने विचार और आपत्तियां रखना चाहता है।
संगठन ने इन regulations को वापस लेने की मांग भी उठाई है।
Jantar Mantar Protest हालांकि UGC के 2026 regulations की कानूनी स्थिति को समझना भी जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को इन regulations को फिलहाल लागू रहने से रोकते हुए “kept in abeyance” रखने का आदेश दिया था। इसके साथ 2012 के पुराने UGC regulations को अगले आदेश तक लागू रहने दिया गया। मामला तीन जजों की पीठ के सामने विचार के लिए भेजा गया।
Jantar Mantar Protest: केंद्र भी कर रहा UGC नियमों पर पुनर्विचार
इसके बाद 20 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि UGC Equity Regulations 2026 पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह जानकारी दी थी। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे के लिए स्थगित कर दी गई और UGC से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा गया।
इसलिए 20 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन ऐसे समय में रखा गया है जब 2026 के regulations पहले से सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं और वर्तमान में लागू नहीं हैं।
Jantar Mantar Protest की अनुमति पुलिस क्यों तय करती है?
दिल्ली में जंतर-मंतर पर कोई बड़ा धरना या प्रदर्शन करने के लिए आयोजकों को संबंधित पुलिस अधिकारियों से अनुमति लेनी होती है।
पुलिस भीड़ की अनुमानित संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात, समय, कानून-व्यवस्था और राजधानी में अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला कर सकती है।
इसी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी पहले स्पष्ट किया था कि पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र में कानून के अनुरूप conditions लगा सकती है।
इसलिए अदालत में अब मुख्य सवाल यह होगा कि 20 सितंबर की अनुमति खारिज करने का पुलिस का फैसला कानून और उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार उचित था या नहीं।
Jantar Mantar Protest: क्या 20 सितंबर को प्रदर्शन नहीं होगा?
फिलहाल इसे लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
16 सितंबर तक घटनाक्रम यह है:
- दिल्ली पुलिस ने 20 सितंबर के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है।
- क्षत्रिय करणी सेना उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे रही है।
- हाई कोर्ट ने सिर्फ urgent listing से इनकार किया है।
- अदालत ने याचिकाकर्ता से नियमित याचिका दाखिल करने को कहा है।
- याचिका दाखिल होने पर मामला 17 सितंबर को सूचीबद्ध होने की बात कही गई है।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि 20 सितंबर का प्रदर्शन निश्चित रूप से नहीं होगा। आगे की स्थिति हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और उसके आदेश पर निर्भर करेगी।
Jantar Mantar Protest की बड़ी बातें
- क्षत्रिय करणी सेना 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना चाहती है।
- प्रस्तावित समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक है।
- मुद्दे आरक्षण नीतियों और UGC Equity Regulations 2026 से जुड़े हैं।
- पहले प्रदर्शन 6 सितंबर को प्रस्तावित था।
- BRICS Summit की तैयारियों के बीच पुलिस ने उस तारीख की अनुमति नहीं दी थी।
- इसके बाद तारीख बदलकर 20 सितंबर की गई।
- हाई कोर्ट ने पुलिस से नए आवेदन पर 14 सितंबर तक फैसला लेने को कहा था।
- पुलिस ने 20 सितंबर की अनुमति भी नहीं दी।
- करणी सेना इस फैसले को फिर हाई कोर्ट में चुनौती दे रही है।
- 16 सितंबर को अदालत ने urgent listing की मांग स्वीकार नहीं की।
- नियमित याचिका दाखिल होने के बाद मामला अगले दिन सूचीबद्ध किया जाना है।
- UGC Regulations 2026 फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से abeyance में हैं।
- केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि इन regulations पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
Jantar Mantar Protest: अब 17 सितंबर की सुनवाई पर नजर
कुल मिलाकर Jantar Mantar Protest को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। दिल्ली पुलिस ने 20 सितंबर के कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी है, लेकिन क्षत्रिय करणी सेना ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 16 सितंबर को तत्काल लिस्टिंग से इनकार करते हुए संगठन को पहले औपचारिक याचिका दाखिल करने के लिए कहा। इसके बाद मामले को सामान्य प्रक्रिया में सूचीबद्ध किया जाना है।
अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि करणी सेना को 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मिलेगी या दिल्ली पुलिस का फैसला बरकरार रहेगा।
आधिकारिक न्यायिक जानकारी के लिए Delhi High Court और UGC से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए University Grants Commission देख सकते हैं।
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