शिक्षक दिवस पर यह दिल छू लेने वाली सच्ची कहानी है एक साधारण दूध बेचने वाले लड़के की, जिसने महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना, सिर्फ एक शिक्षक के निस्वार्थ मार्गदर्शन और अपनी लगन के दम पर JEE क्रैक किया। जहाँ एक तरफ सरकारी और प्राइवेट शिक्षक व्यवस्था के दबाव और जिम्मेदारियों में पिस रहे हैं, वहीं यह कहानी याद दिलाती है कि एक सच्चा शिक्षक किसी बड़े मंच का नहीं, बल्कि बच्चे के भरोसे का नाम है। सफलता के बाद कोचिंग संस्थानों से मिले पैसों में से जब उस लड़के ने ₹50,000 की गुरुदक्षिणा अपने शिक्षक के हाथ में रखी, तो उसने साबित कर दिया कि शिक्षक की सबसे बड़ी दौलत पैसा नहीं, अपने छात्र की कामयाबी होती है।
