Jyotiraditya Scindia Property Dispute को लेकर 14 अक्टूबर 2026 को ग्वालियर की अदालत में अहम सुनवाई निर्धारित है। सिंधिया राजघराने की लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच प्रस्तावित समझौते पर कानूनी पेच बना हुआ है। विवाद की मुख्य वजह प्रतिमा देवी की ओर से समझौते पर जताई गई आपत्ति है।
प्रतिमा देवी का आरोप है कि संपत्ति के बंटवारे से जुड़े दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर धोखे से कराए गए। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे तथा उषा राजे की ओर से समझौते को स्वीकार करते हुए अदालत से उस पर आदेश पारित करने की मांग की गई है। अब अदालत को तय करना है कि प्रतिमा देवी को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने का अवसर दिया जाए या समझौते के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया बढ़ाई जाए।
Jyotiraditya Scindia Property Dispute: क्या चाहते हैं सिंधिया?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ है। इस समझौते का उद्देश्य लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद को समाप्त करना बताया जा रहा है।
समझौते के तहत वर्तमान में परिवार के अलग-अलग सदस्यों के कब्जे या स्वामित्व में मौजूद संपत्तियों को उसी व्यवस्था के अनुसार मान्यता देने का प्रस्ताव बताया गया है। ग्वालियर का जयविलास पैलेस भी इस विवाद से जुड़ी प्रमुख संपत्तियों में शामिल है।
हालांकि, समझौते की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी। इसलिए यह कहना अभी उचित नहीं होगा कि सभी संपत्तियों का बंटवारा अंतिम रूप से हो चुका है।
Jyotiraditya Scindia Property Dispute: प्रतिमा देवी की आपत्ति से क्यों अटका मामला?
प्रतिमा देवी, दिवंगत पद्मावती राजे सिंधिया की बेटी हैं। उन्होंने अदालत में अतिरिक्त आवेदन देकर आरोप लगाया कि संपत्ति बंटवारे से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर उनकी पूरी जानकारी और सहमति के बिना कराए गए।
उनकी मांग है कि समझौते पर अंतिम आदेश देने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिले। दूसरी ओर, समझौते के पक्षकारों ने इन आरोपों का विरोध किया है और दस्तावेजों पर सहमति से हस्ताक्षर होने की दलील दी है।
अदालत में आज क्या हो सकता है?
14 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत प्रतिमा देवी के आवेदन पर फैसला सुना सकती है। इसके आधार पर आगे की प्रक्रिया के दो संभावित रास्ते हैं:
- अदालत प्रतिमा देवी को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने की अनुमति दे सकती है।
- अदालत आवेदन पर फैसला करते हुए समझौते से जुड़ी आगे की कानूनी प्रक्रिया निर्धारित कर सकती है।
इनमें से कौन-सा रास्ता अपनाया जाएगा, यह अदालत के आदेश से ही स्पष्ट होगा। सुनवाई की तारीख निर्धारित होने का अर्थ यह नहीं है कि संपत्ति का अंतिम बंटवारा भी उसी दिन हो जाएगा।
Jyotiraditya Scindia Property Dispute: 1989 से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि
सिंधिया परिवार की संपत्तियों को लेकर कानूनी विवाद कई वर्षों से चला आ रहा है। शुरुआती मुकदमे में उत्तराधिकार और संपत्ति पर अधिकार को लेकर अलग-अलग दावे किए गए थे। एक पक्ष ने ज्येष्ठाधिकार की परंपरा का हवाला दिया, जबकि परिवार की अन्य सदस्यों ने उत्तराधिकार कानून के तहत अपने हिस्से का दावा किया।
बाद में परिवार के सदस्यों के बीच समझौते की कोशिश हुई, लेकिन प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद मामला फिर अदालत के सामने आ गया। संपत्ति के मूल्यांकन और उत्तराधिकार के सवालों के कारण यह मामला कानूनी रूप से महत्वपूर्ण बना हुआ है।
जयविलास पैलेस समेत संपत्तियों पर नजर
ग्वालियर का जयविलास पैलेस सिंधिया राजघराने की सबसे चर्चित संपत्तियों में से एक है। इसके अलावा परिवार से जुड़ी अन्य संपत्तियां भी बंटवारे के विवाद का हिस्सा हैं। मीडिया रिपोर्टों में पूरे संपत्ति समूह का अनुमानित मूल्य करीब 40 हजार करोड़ रुपये बताया गया है।
हालांकि, यह आंकड़ा रिपोर्टों में बताया गया अनुमान है। सभी संपत्तियों के मूल्यांकन, कानूनी स्वामित्व और अंतिम हिस्सेदारी का निर्धारण अदालत में चल रही प्रक्रिया से जुड़ा है।
अब सबकी नजर ग्वालियर अदालत के आदेश पर है। प्रतिमा देवी की आपत्ति पर फैसला यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि सिंधिया परिवार के संपत्ति विवाद में आगे साक्ष्य दर्ज होंगे या समझौते के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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