Karnataka SIR Voter Deletion को लेकर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने नए सवाल उठाए हैं। खेड़ा ने दावा किया है कि कर्नाटक की बाबलेश्वर और भालकी विधानसभा सीटों में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए अंतिम 48 घंटों में 3,757 आवेदन दाखिल किए गए और ये आवेदन केवल 38 लोगों की ओर से किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन आवेदनों में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया गया। इन आंकड़ों और मतदाताओं की धार्मिक पहचान से जुड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि चुनाव आयोग के उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से नहीं हो सकी है।
कर्नाटक में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक विवाद जारी है। राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से मतदाता सूची संशोधन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं।
Karnataka SIR Voter Deletion पर पवन खेड़ा ने क्या कहा?
Karnataka SIR Voter Deletion को लेकर पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पोस्ट में बाबलेश्वर और भालकी विधानसभा क्षेत्रों का उदाहरण दिया। उनका दावा है कि SIR में आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम समय-सीमा से पहले सिर्फ 48 घंटों में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए 3,757 आवेदन आए।
खेड़ा के मुताबिक ये आवेदन केवल 38 व्यक्तियों ने दाखिल किए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दी गईं, उनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय से संबंधित लोगों की थी।
कांग्रेस नेता ने इन आवेदनों के पैटर्न पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से इसकी जांच और पारदर्शिता की मांग की है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से इन विशेष 3,757 आवेदनों को लेकर विस्तृत सार्वजनिक जवाब उपलब्ध नहीं मिला है।
भालकी में कांग्रेस नेताओं की ओर से इससे पहले भी Form 7 के कथित दुरुपयोग की शिकायतें सामने आई थीं। स्थानीय कांग्रेस नेता और विधायक ईश्वर खंड्रे ने भी आरोप लगाया था कि पात्र मतदाताओं के खिलाफ गलत आपत्तियां दाखिल की जा रही हैं। यह कांग्रेस की ओर से लगाया गया आरोप है।
Karnataka SIR Voter Deletion: Form 7 क्या है और इससे नाम कैसे हटता है?
Karnataka SIR Voter Deletion विवाद के केंद्र में Form 7 है। चुनाव आयोग के मुताबिक Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में मौजूद किसी व्यक्ति के नाम को हटाने की मांग या किसी प्रस्तावित नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने के लिए किया जा सकता है।
Karnataka SIR Voter Deletion, Form 7 में नाम हटाने के आधारों में मृत्यु, कम उम्र, स्थायी रूप से स्थान बदलना, एक से अधिक जगह पंजीकरण या भारतीय नागरिक नहीं होना शामिल है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ Form 7 दाखिल होने से किसी मतदाता का नाम अपने-आप नहीं हट जाता। चुनाव आयोग के Electoral Roll Manual के अनुसार आवेदन ERO के नोटिस बोर्ड पर निर्धारित सात दिन की अवधि के लिए प्रदर्शित किया जाता है।
यदि Electoral Registration Officer यानी ERO उपलब्ध रिकॉर्ड और आपत्ति की वैधता से संतुष्ट है तो सात दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद वह आगे की व्यक्तिगत जांच के बिना आवेदन स्वीकार कर सकता है। यदि ERO संतुष्ट नहीं है, तो आपत्ति करने वाले और जिस मतदाता के खिलाफ आपत्ति है, दोनों को सुनवाई का नोटिस दिए जाने का प्रावधान है।
इसलिए यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कोई व्यक्ति केवल आवेदन देकर सीधे किसी मतदाता का नाम सूची से हटवा सकता है।
Karnataka SIR Voter Deletion: व्यक्तिगत सुनवाई को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
पवन खेड़ा ने प्रक्रिया में व्यक्तिगत सुनवाई स्वतः अनिवार्य नहीं होने पर सवाल उठाया है। चुनाव आयोग की नियमावली के मुताबिक हर Form 7 मामले में व्यक्तिगत सुनवाई आवश्यक नहीं है, लेकिन आवेदन को निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होता है।
यही बिंदु अब राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। कांग्रेस का कहना है कि बड़ी संख्या में एक जैसे आवेदन आने की स्थिति में अतिरिक्त जांच होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे।
वहीं चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों में Form 7 के साथ संबंधित प्रमाण देने और ERO द्वारा आवेदन की वैधता जांचने का प्रावधान है। आयोग का मतदाता पोर्टल भी Form 7 को मौजूदा electoral roll से नाम हटाने या inclusion पर objection दर्ज करने के आधिकारिक माध्यम के रूप में सूचीबद्ध करता है।
Karnataka SIR Voter Deletion: प्रियंका गांधी ने भी चुनाव आयोग को घेरा
SIR को लेकर कांग्रेस के कई अन्य नेताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि अगर चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप साबित होते हैं और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी थी, तो मामले की जांच और जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के पद छोड़ने की मांग भी की है।
कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों की यह प्रतिक्रिया उन रिपोर्टों के बाद तेज हुई जिनमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर अंदरूनी आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने अपनी निर्णय प्रक्रिया का बचाव किया है, जबकि विपक्ष इन रिपोर्टों के आधार पर स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।
Karnataka SIR Voter Deletion पर अब आगे क्या?
Karnataka SIR Voter Deletion विवाद में अब सबसे अहम सवाल बाबलेश्वर और भालकी में दाखिल किए गए Form 7 आवेदनों की जांच का है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि 3,757 आवेदनों में से कितने वैध पाए गए, कितने खारिज हुए और क्या किसी पात्र मतदाता का नाम वास्तव में इन आपत्तियों के आधार पर हटाया गया।
यह फर्क महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी नाम के खिलाफ deletion application दाखिल होना और मतदाता सूची से उसका नाम वास्तव में हट जाना दो अलग प्रक्रियाएं हैं।
चुनाव आयोग के पोर्टल पर मतदाता अपने नाम की स्थिति देख सकते हैं और SIR से संबंधित electoral roll भी उपलब्ध है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग या कर्नाटक के चुनाव अधिकारियों की ओर से इन विशेष आवेदनों पर विस्तृत आंकड़े जारी किए जाते हैं तो 3,757 आवेदनों और उनसे प्रभावित मतदाताओं की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
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