Madan Rathore Apology: जयपुर की ऐतिहासिक बड़ी चौपड़ पर 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित भाजपा के ध्वजारोहण कार्यक्रम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर हुई चूक चर्चा का विषय बन गई। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ के तिरंगा फहराने के बाद जब वंदे मातरम की प्रस्तुति का समय आया तो उसका मूल स्वरूप नहीं बज पाया। घटना के बाद मदन राठौड़ ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और इसे अनजाने में हुई चूक बताया।
घटना स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर हुई, इसलिए मौके पर मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी असहज स्थिति बनी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ऑडियो व्यवस्था में हुई गड़बड़ी के कारण अपेक्षित वंदे मातरम के बजाय अलग ऑडियो या धुन बज गई। इसके बाद आयोजन से जुड़े लोगों ने इसे ठीक करने की कोशिश की।

Madan Rathore Apology: आखिर बड़ी चौपड़ पर क्या हुआ?
15 अगस्त 2026 की सुबह जयपुर की बड़ी चौपड़ पर भाजपा की ओर से स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। बड़ी संख्या में पार्टी नेता, पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग भी समारोह में मौजूद थे।
Madan Rathore Apology ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति होनी थी। इसी दौरान साउंड सिस्टम पर राष्ट्रगीत का अपेक्षित मूल स्वरूप नहीं बज सका। अलग-अलग रिपोर्टों में इसे ऑडियो या धुन से जुड़ी तकनीकी-मानवीय चूक बताया गया है।
घटना के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रगीत की प्रस्तुति से जुड़ी गलती होने के कारण भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने खुद सामने आकर इस पर प्रतिक्रिया दी।
मदन राठौड़ ने स्वीकार की गलती
Madan Rathore Apology की सबसे अहम बात यह रही कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने घटना से दूरी बनाने के बजाय चूक को स्वीकार किया।
दैनिक नवज्योति की रिपोर्ट के अनुसार मदन राठौड़ ने कहा कि राष्ट्रगीत को लेकर हुई चूक अनजाने में हुई और इसके लिए उन्होंने माफी मांगी।
वहीं अन्य रिपोर्ट के मुताबिक राठौड़ ने आयोजन व्यवस्था में हुई तकनीकी और मानवीय चूक पर खेद जताते हुए राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत के सम्मान को सर्वोपरि बताया।
इस तरह उन्होंने सार्वजनिक रूप से घटना की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए विवाद को शांत करने की कोशिश की।
‘वंदे मातरम’ का मूल स्वरूप नहीं बजने पर क्यों बढ़ी चर्चा?
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर राष्ट्र से जुड़े गीत, ध्वजारोहण और अन्य औपचारिक कार्यक्रम विशेष महत्व रखते हैं।
बड़ी चौपड़ का यह आयोजन भी दशकों पुरानी राजनीतिक और सामाजिक परंपरा का हिस्सा है। ऐसे में ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति में हुई चूक ने तत्काल लोगों का ध्यान खींचा। स्थानीय रिपोर्टों में भी साफ तौर पर कहा गया कि सत्ता पक्ष के आयोजन में राष्ट्रगीत का मूल स्वरूप नहीं बज पाया।
हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में इसे जानबूझकर किया गया कृत्य नहीं बताया गया है। मदन राठौड़ ने भी इसे अनजाने में हुई गलती बताते हुए माफी मांगी।
Madan Rathore Apology: 1947 से चली आ रही बड़ी चौपड़ की अनूठी परंपरा
जयपुर की बड़ी चौपड़ पर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस का ध्वजारोहण केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की पुरानी परंपरा भी है।
रिपोर्टों के मुताबिक 1947 से यहां सत्ता पक्ष और विपक्ष अलग-अलग दिशाओं में राष्ट्रीय ध्वज फहराते आए हैं। 15 अगस्त 1947 की शाम यहां पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने का उल्लेख मिलता है और इसके बाद यह परंपरा आगे बढ़ी।
बड़ी चौपड़ पर सत्ता पक्ष पूर्व दिशा की ओर और विपक्ष दूसरी ओर अपना ध्वजारोहण कार्यक्रम करता है। इस साल सत्ता पक्ष की ओर से मदन राठौड़ ने तिरंगा फहराया, जबकि विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने ध्वजारोहण किया।
यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इस कार्यक्रम को जयपुर के दूसरे स्वतंत्रता दिवस आयोजनों से अलग पहचान देती है।
कार्यक्रम में मौजूद रहे भाजपा नेता और कार्यकर्ता
भाजपा के ध्वजारोहण कार्यक्रम में पार्टी के कई नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। समारोह के दौरान एक अन्य घटना में एक व्यक्ति की तबीयत भी अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे एंबुलेंस से एसएमएस अस्पताल भेजा गया।
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Madan Rathore Apology के बाद क्या बोले प्रदेशाध्यक्ष?
मदन राठौड़ का जोर इस बात पर रहा कि घटना किसी जानबूझकर किए गए कार्य का परिणाम नहीं थी। उन्होंने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और राष्ट्रगीत से जुड़े सम्मान को महत्वपूर्ण बताया।
उनकी प्रतिक्रिया के बाद मामला तकनीकी और आयोजन संबंधी चूक के रूप में सामने आया है। फिलहाल ऐसी कोई विश्वसनीय जानकारी सामने नहीं आई है कि घटना के संबंध में किसी प्रशासनिक या संगठनात्मक कार्रवाई की घोषणा की गई हो।
राजस्थान भाजपा के संगठन और गतिविधियों से संबंधित आधिकारिक जानकारी BJP Rajasthan की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
राष्ट्रीय पर्व के आयोजनों में सतर्कता की जरूरत
Madan Rathore Apology से जुड़ी यह घटना राष्ट्रीय पर्वों में आयोजन व्यवस्था की तैयारी को लेकर भी सवाल खड़े करती है।
बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, मंच संचालन और साउंड सिस्टम से जुड़ी सामग्री की पहले से जांच महत्वपूर्ण होती है। विशेष रूप से राष्ट्रीय पर्वों पर छोटी तकनीकी गलती भी तुरंत सार्वजनिक चर्चा का विषय बन सकती है।
बड़ी चौपड़ जैसे ऐतिहासिक आयोजन स्थल पर ऐसी व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वहां सत्ता पक्ष, विपक्ष, आम नागरिक और बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि एक साथ मौजूद रहते हैं। बड़ी चौपड़ की यह परंपरा 1947 से जुड़ी बताई जाती है।
Madan Rathore Apology: घटना की बड़ी बातें
- जयपुर की बड़ी चौपड़ पर 80वें स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
- भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
- ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति में चूक हुई।
- रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रगीत का मूल स्वरूप नहीं बज पाया।
- मदन राठौड़ ने गलती को स्वीकार किया।
- उन्होंने इसे अनजाने में हुई चूक बताते हुए माफी मांगी।
- बड़ी चौपड़ पर सत्ता और विपक्ष के ध्वजारोहण की परंपरा 1947 से चली आ रही है।
- इस साल भी सत्ता और विपक्ष ने अलग-अलग कार्यक्रमों में तिरंगा फहराया।
चूक के बाद माफी से शांत करने की कोशिश
कुल मिलाकर Madan Rathore Apology का मामला स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान हुई एक आयोजन संबंधी चूक से जुड़ा है। बड़ी चौपड़ पर तिरंगा फहराए जाने के बाद ‘वंदे मातरम’ का मूल स्वरूप नहीं बजने से विवाद पैदा हुआ, लेकिन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने तुरंत गलती स्वीकार कर माफी मांगी।
Madan Rathore Apology राष्ट्रीय पर्व और बड़ी चौपड़ की ऐतिहासिक परंपरा को देखते हुए घटना को लेकर चर्चा तेज हुई। अब यह आयोजन राष्ट्रीय प्रतीकों और गीतों से जुड़े कार्यक्रमों में तकनीकी तैयारियों को पहले से जांचने की जरूरत भी रेखांकित करता है।




