केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 1.83 लाख से ज्यादा सरकारी पदों पर महा-भर्ती शुरू; रेलवे, SSC और UPSC में खुला नौकरियों का पिटारा!

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Image: TNC

नई दिल्ली: देश भर में सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) की तैयारी कर रहे करोड़ों युवाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी आ रही है। केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों, सशस्त्र बलों और तकनीकी विभागों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए एक बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया है। केंद्र सरकार की विभिन्न आधिकारिक एजेंसियों ने मिलकर 1.83 लाख (1,83,595) से अधिक रिक्त पदों (Vacancies) पर भर्ती की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। इस महा-भर्ती अभियान की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि कुल पदों में से अकेले 59 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी भारतीय रेलवे (Indian Railways) की है।

‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ (The Economic Times) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने संसद की एक उच्च स्तरीय समिति के सामने देश में चल रही इन नौकरियों का पूरा खाका और आंकड़े पेश किए हैं। अधिकारियों ने संसदीय स्थायी समिति को सूचित किया है कि केंद्रीय विभागों, रेलवे, पुलिस, रक्षा, इंजीनियरिंग और विभिन्न तकनीकी सेवाओं में कुल 1,83,595 रिक्तियों के लिए आवेदन, परीक्षा और स्क्रूटनी का काम अलग-अलग चरणों में शुरू हो चुका है।

भर्ती एजेंसियों ने कसी कमर: जानिए किस विभाग में हैं कितने पद?

इस विशाल भर्ती प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और गति से पूरा करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की तीन सबसे प्रमुख और मुख्य भर्ती एजेंसियों को सौंपी गई है। इनमें कर्मचारी चयन आयोग (SSC), संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) शामिल हैं। संसदीय समिति को सौंपे गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन पदों का वर्गीकरण इस प्रकार है:

  1. भारतीय रेलवे (RRB): हमेशा की तरह इस बार भी देश का सबसे बड़ा सिविलियन नियोक्ता (Civilian Employer) यानी भारतीय रेलवे नौकरियों के मामले में सबसे आगे है। रेलवे भर्ती बोर्ड देश भर के विभिन्न जोनों में कुल 1,08,129 खाली पदों को भरने के लिए परीक्षाओं का संचालन कर रहा है।
  2. कर्मचारी चयन आयोग (SSC): कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL), CHSL और अन्य केंद्रीय परीक्षाओं का आयोजन करने वाले स्टाफ सिलेक्शन कमीशन ने कुल 65,331 संभावित पदों (Tentative Vacancies) पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की है।
  3. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा और ए-ग्रेड परीक्षाओं का जिम्मा संभालने वाले यूपीएससी के माध्यम से इस बार 10,135 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जा रहा है।

समिति को यह भी बताया गया कि इनमें से कुछ स्तर की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाएं पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं, जबकि कई अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाएं इस समय देश भर के विभिन्न केंद्रों पर प्रक्रिया के अधीन (Underway) हैं।

पेपर लीक के दौर में पारदर्शिता और रिफॉर्म्स पर कड़ा मंथन

यह महत्वपूर्ण अपडेट कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस हाई-प्रोफाइल समिति की अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) बृज लाल कर रहे हैं। इस समिति में लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों के वरिष्ठ सांसद शामिल होते हैं, जो सीधे तौर पर यूपीएससी (UPSC) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) जैसी संस्थाओं के कामकाज की निगरानी करते हैं।

हाल के वर्षों में देश भर में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, धांधली और पेपर लीक (Paper Leak Controversy) की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार को विपक्ष और युवाओं की ओर से भारी आलोचना का सामना करना पड़ा है। इस पृष्ठभूमि में, संसदीय पैनल की इस बैठक में केवल खाली पदों को भरने पर ही बात नहीं हुई, बल्कि परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए गंभीर रिफॉर्म्स (सुधारों) पर चर्चा की गई। समिति के सदस्यों ने मुख्य रूप से तीन अहम सुझाव दिए:

  • कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT): मानवीय हस्तक्षेप और धांधली की गुंजाइश को खत्म करने के लिए आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा परीक्षाओं को ऑनलाइन (कंप्यूटर बेस्ड) कराया जाए।
  • त्वरित आंसर-की (Fast Answer Keys): परीक्षा संपन्न होने के चंद दिनों के भीतर ही पारदर्शी तरीके से आंसर-की जारी की जाए ताकि छात्र अपने प्रदर्शन का सटीक आकलन कर सकें।
  • मूल्यांकन शीट तक पहुंच: इसके अलावा एक क्रांतिकारी सुझाव यह भी दिया गया कि उम्मीदवारों को उनकी जांची गई मुख्य आंसर-शीट (Evaluated Answer Sheets) देखने या एक्सेस करने की अनुमति दी जानी चाहिए, जिससे परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा दोबारा बहाल हो सके।

देश के युवाओं के लिए क्यों बेहद महत्वपूर्ण है यह आंकड़ा?

भारत में सरकारी नौकरियों में खाली पड़े स्वीकृत पदों (Sanctioned Posts) का मुद्दा हमेशा से एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहा है। संसद में पिछले वर्षों के दौरान समय-समय पर सरकार द्वारा दिए गए जवाबों से यह स्पष्ट होता रहा है कि विभिन्न मंत्रालयों, केंद्रीय पुलिस बलों और रेलवे में सालों से लाखों पद प्रशासनिक देरी, कानूनी मुकदमों (Litigation), और वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं के चलते खाली पड़े रहते हैं।

इस सुस्ती को तोड़ने के लिए मौजूदा 1.83 लाख पदों की यह सक्रिय भर्ती प्रक्रिया बेहद मायने रखती है। अगर पुराने इतिहास पर नजर डालें, तो केंद्र सरकार द्वारा 2022 में संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2014-15 से लेकर 2021-22 के बीच विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कुल 7.22 लाख लोगों को स्थायी केंद्रीय नौकरियां दी गई थीं। वहीं, एक अन्य आंकड़े में बताया गया था कि यूपीएससी, एसएससी और रेलवे बोर्ड ने मिलकर पिछले एक पांच वर्षीय अवधि में लगभग 3.77 लाख उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया था।

ऐसे में, इस बार एक साथ 1.83 लाख से अधिक पदों को भरने का यह मिशन मोड युवाओं के लिए संजीवनी जैसा है। रेलवे में एक लाख से ज्यादा और एसएससी-यूपीएससी के तहत हजारों पदों के लिए जारी इस महा-मुहिम पर देश के कोने-कोने में दिन-रात लाइब्रेरी और कमरों में बैठकर तैयारी करने वाले करोड़ों अभ्यर्थियों की उम्मीदें टिकी हुई हैं।

(इनपुट: पीटीआई / द इकोनॉमिक टाइम्स)

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