MP OBC Reservation: मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को वर्ष 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाले कानूनी प्रावधान को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत रखने और लंबे समय से रुकी 13 प्रतिशत पदों की भर्ती प्रक्रिया तीन महीने में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार की कानूनी तैयारी और आरक्षण को लेकर उसकी भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
MP OBC Reservation पर हाईकोर्ट ने क्यों दिया फैसला?
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद करीब सात वर्षों से चल रहा था। मार्च 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। इसके बाद इस व्यवस्था को अदालत में चुनौती दी गई।
मामले की सुनवाई के दौरान सवाल उठा कि क्या राज्य सरकार निर्धारित आरक्षण सीमा से आगे जाकर अतिरिक्त आरक्षण देने के लिए पर्याप्त संवैधानिक आधार प्रस्तुत कर सकती है।
हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि 50 प्रतिशत की सामान्य आरक्षण सीमा पार करने के लिए असाधारण परिस्थितियों का प्रमाण आवश्यक है। अदालत के अनुसार, प्रस्तुत तथ्यों से ऐसी परिस्थितियां सिद्ध नहीं हो सकीं।
MP OBC Reservation: 27 प्रतिशत आरक्षण पर हरीश चौधरी ने उठाए सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने शनिवार, 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुद्दे को उठाया।
चौधरी ने कहा कि ओबीसी आरक्षण से जुड़ा न्यायिक फैसला पिछड़े वर्ग के युवाओं के भविष्य और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि लंबे समय से नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के सामने अब नई अनिश्चितता पैदा हुई है।
उन्होंने भाजपा सरकार से पूछा कि कई वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद 27 प्रतिशत आरक्षण का मजबूत कानूनी आधार तैयार क्यों नहीं किया जा सका।
हरीश चौधरी ने अगस्त 2025 में हुई सर्वदलीय बैठक का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, उस बैठक में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के समर्थन में सहमति बनी थी। उन्होंने सवाल किया कि उस सहमति को कानूनी रूप देने के लिए सरकार ने कौन-से ठोस कदम उठाए।
MP OBC Reservation: 13 प्रतिशत रुकी भर्तियों का क्या होगा?
ओबीसी आरक्षण विवाद का असर मध्य प्रदेश की सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ा है।
कानूनी विवाद के कारण सितंबर 2022 से कई भर्तियों में 87 प्रतिशत पदों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों को रोककर रखा गया। इसे 87:13 फॉर्मूले के रूप में जाना गया।
अब हाईकोर्ट ने संबंधित भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि लंबित 13 प्रतिशत पदों पर अनारक्षित श्रेणी की पात्रता सूची के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया तीन महीने में पूरी की जाए।
अदालत ने मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच बढ़े हुए आरक्षण के तहत नियुक्त ओबीसी अभ्यर्थियों की नौकरियों को संरक्षण भी दिया है।
इस निर्णय से उन अभ्यर्थियों के लिए आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हुई है, जो लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। हालांकि विभिन्न भर्तियों पर फैसले के व्यावहारिक प्रभाव और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा जारी है।
MP OBC Reservation: जीतू पटवारी ने सरकार की पैरवी पर सवाल उठाए
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी MP OBC Reservation मामले को लेकर राज्य सरकार को घेरा है। कांग्रेस का आरोप है कि अदालत में ओबीसी आरक्षण का पक्ष पर्याप्त मजबूती से नहीं रखा गया।
MP OBC Reservation, मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कहा कि जीतू पटवारी ने 8 अक्टूबर 2025 को दिल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से मुलाकात कर इस मामले में कानूनी तैयारी की जरूरत बताई थी।
पार्टी का दावा है कि सरकार को पहले ही संभावित कानूनी चुनौतियों के बारे में आगाह किया गया था। इसके बावजूद आरक्षण बढ़ोतरी को न्यायिक जांच में बरकरार नहीं रखा जा सका।
हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए कमजोर पैरवी के आरोप को अदालत के फैसले का घोषित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने अपना निर्णय संवैधानिक सीमाओं और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दिया है।
MP OBC Reservation: कांग्रेस ने सरकार से मांगी समयबद्ध कार्ययोजना
हरीश चौधरी ने कहा कि ओबीसी आरक्षण केवल राजनीतिक घोषणा का विषय नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़ा सवाल है।
उन्होंने सरकार से फैसले के कानूनी पहलुओं की समीक्षा करने, उपलब्ध वैधानिक विकल्पों पर विचार करने और प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत करने की मांग की।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि वर्षों से भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार क्या कदम उठाएगी।

MP OBC Reservation पर अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर अगली कानूनी लड़ाई की संभावना बढ़ गई है। कांग्रेस ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
फिलहाल राज्य में ओबीसी आरक्षण की सीमा 14 प्रतिशत रखी गई है। दूसरी ओर, भर्ती एजेंसियों को लंबित पदों पर अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार फैसले को लेकर क्या कानूनी रुख अपनाती है और लंबित नियुक्तियों की प्रक्रिया किस तरह पूरी होती है।
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