Murli Manohar Joshi: BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन से निपटने के लिए पुलिस बल के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की शिकायतों और जायज मांगों को सहानुभूति से सुना जाना चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहिए। उनका कहना है कि “लाठी” किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती और सरकार को युवाओं से संवाद करना चाहिए।
जोशी ने इसके साथ ही Special Intensive Revision यानी SIR, चुनावी व्यवस्था, सरकार की जवाबदेही और नौकरशाही की पारदर्शिता पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने लोकतंत्र में भरोसे को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए निष्पक्ष चुनावों की जरूरत पर जोर दिया।
Murli Manohar Joshi ने छात्र आंदोलन पर क्या कहा?
जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में जोशी ने कहा कि नई पीढ़ी की आवाज दबाने के बजाय यह समझने की जरूरत है कि उसके भीतर नाराजगी क्यों है।
उन्होंने युवाओं की रोजगार संबंधी उम्मीदों का जिक्र करते हुए सवाल किया कि यदि उनसे नौकरियों या दूसरे अवसरों का वादा किया गया और वह पूरा नहीं हो पाया, तो सरकार को इसे स्वीकार करते हुए उनसे सीधे संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आखिरकार ये युवा “हमारे बच्चे” हैं और उनकी बात सुनना व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
जोशी ने तर्क दिया कि स्थापित व्यवस्थाएं अक्सर नई आवाजों को दबाने की कोशिश करती हैं, जबकि भारतीय परंपरा संवाद, सुधार और नई पीढ़ी की बात सुनने पर जोर देती है।
Murli Manohar Joshi: जुलाई में भी लाठीचार्ज पर जताई थी नाराजगी
यह पहली बार नहीं है जब Murli Manohar Joshi ने छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है।
23 जुलाई 2026 को भी उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की चिंताएं वास्तविक हैं और इसे केवल कानून-व्यवस्था की समस्या बनाकर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने खासतौर पर छात्राओं और महिलाओं के साथ कथित बल प्रयोग पर दुख जताया था और अधिकारियों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की थी।
Murli Manohar Joshi: ‘अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो छात्रों को बताइए’
जोशी ने सरकार और युवाओं के रिश्ते को समझाने के लिए परिवार का उदाहरण भी दिया।
उनका तर्क था कि यदि कोई अभिभावक किसी बच्चे से कोई चीज दिलाने का वादा करता है लेकिन आर्थिक या दूसरी वजह से उसे पूरा नहीं कर पाता, तो वह बच्चे को कारण समझाता है और आगे उसे पूरा करने का भरोसा देता है।
उसी तरह सरकारों को भी युवाओं के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि कोई वादा या काम क्यों पूरा नहीं हो पाया और आगे उसके लिए क्या किया जाएगा।

Murli Manohar Joshi: SIR पर क्या बोले मुरली मनोहर जोशी?
चुनावी मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR पर सवाल किए जाने पर जोशी ने कहा कि सत्ता में बने रहने की इच्छा हर सरकार में होती है।
उन्होंने इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के दौर का जिक्र करते हुए Census और delimitation से संबंधित फैसलों का उदाहरण दिया और कहा कि उनकी अपनी सरकार भी सत्ता में बने रहना चाहती थी।
हालांकि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को व्यक्तिगत रूप से निशाना नहीं बनाया।
इसलिए उनके बयान को “CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ BJP नेता का हमला” कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
उनकी टिप्पणी चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर व्यापक थी।
Murli Manohar Joshi: ‘चुनाव निष्पक्ष हों, सरकार जवाबदेह हो’
जोशी ने लोकतंत्र के लिए तीन प्रमुख बातों पर जोर दिया—निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार और पारदर्शी नौकरशाही।
उन्होंने यह भी कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए विपक्ष को भी जिम्मेदार और वैकल्पिक नीति के साथ तैयार रहना चाहिए।
उनका कहना था कि गणतंत्र का आधार लोगों का भरोसा है। यदि जनता का संस्थाओं और सरकार पर विश्वास कमजोर होता है तो अच्छी नीतियों को लेकर भी संदेह पैदा हो सकता है।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि लोगों की आवाज उठ रही है तो उसे सुनना चाहिए, न कि उसके सामने “लाठी लेकर खड़े” हो जाना चाहिए।
Murli Manohar Joshi: NEP और शिक्षा व्यवस्था पर भी उठा चुके हैं सवाल
पूर्व HRD मंत्री मुरली मनोहर जोशी हाल के महीनों में शिक्षा व्यवस्था पर भी खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं।
अगस्त में प्रकाशित एक अलग इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि शिक्षा को सरकार की प्राथमिकताओं में अधिक महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने उच्च शिक्षा के commercialization, शिक्षा बजट, रोजगार और examination system से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा था कि शिक्षा केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि रोजगार और समाज की जरूरतों के साथ उसका संबंध होना चाहिए।
हालांकि NEP के परिणामों को लेकर आपके मूल टेक्स्ट में दिया गया “इसे लागू हुए केवल दो से चार साल हुए हैं” वाला विशिष्ट बयान मुझे विश्वसनीय मूल स्रोत में इसी इंटरव्यू के हिस्से के रूप में पुष्ट नहीं मिला। इसलिए इसे सीधे quote के रूप में इस्तेमाल करने से बचना बेहतर होगा।
Murli Manohar Joshi: BJP के वरिष्ठ नेता की टिप्पणी क्यों अहम?
मुरली मनोहर जोशी BJP के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रह चुके हैं। इसलिए सरकार, छात्र आंदोलन, चुनावी व्यवस्था और शिक्षा पर उनकी टिप्पणियां राजनीतिक रूप से ध्यान खींचती हैं।
हालांकि उनके मौजूदा बयान को किसी पार्टी लाइन या BJP के आधिकारिक रुख के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं।
Murli Manohar Joshi, छात्र आंदोलनों पर उनका संदेश स्पष्ट है—युवाओं की नाराजगी को केवल law-and-order के नजरिए से देखने के बजाय उनकी शिकायतों को सुनना और बातचीत से समाधान निकालना चाहिए।
वहीं SIR और चुनावी प्रक्रिया पर उन्होंने किसी एक चुनाव अधिकारी को निशाना बनाने के बजाय लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेही, पारदर्शिता और जनता के भरोसे को केंद्र में रखा है।
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