शिलान्यास के 2.5 साल बाद भी काम ठप
30 करोड़ की परियोजना पर उठे कई राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल
जयपुर। राजधानी जयपुर के Hawa Mahal विधानसभा क्षेत्र में मानबाग से 2 नंबर बस स्टैंड तक सड़क चौड़ीकरण और मरम्मत की करीब 30 करोड़ रुपये की परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। वजह यह है कि 26 सितम्बर 2023 को तत्कालीन हवामहल विधायक महेश जोशी द्वारा इस परियोजना का विधिवत शिलान्यास किया गया था, लेकिन करीब पौने तीन साल बीत जाने के बाद भी जमीन पर काम शुरू नहीं हो पाया। ऐसे में अब इस परियोजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिलान्यास के बाद भी नहीं बढ़ा काम
26 सितम्बर 2023 को आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन विधायक महेश जोशी ने मानबाग से 2 नंबर बस स्टैंड तक सड़क चौड़ीकरण और मरम्मत कार्य का शिलान्यास किया था। उस समय इस परियोजना के लिए लगभग 30 करोड़ रुपये की स्वीकृति की जानकारी दी गई थी।

Hawa Mahal: आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी थी परियोजना
कार्यक्रम की फोटो और वीडियो आज भी उपलब्ध हैं, वहीं मौके पर लगी शिलान्यास पट्टिका भी इस बात की पुष्टि करती है कि परियोजना आधिकारिक रूप से शुरू की जा चुकी थी। इसके बावजूद इतने लंबे समय बाद भी सड़क चौड़ीकरण का वास्तविक कार्य शुरू नहीं हो पाया, जिससे स्थानीय लोगों और व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

Hawa Mahal: व्यापारियों का था विरोध, फिर बनी थी सहमति
Hawa Mahal: परियोजना की शुरुआत में स्थानीय व्यापारियों ने सड़क चौड़ीकरण को लेकर विरोध जताया था, क्योंकि इससे कई दुकानों और मकानों के प्रभावित होने की आशंका थी। हालांकि बाद में व्यापारी मंडल अध्यक्ष किशन बना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई, जिसमें तत्कालीन विधायक महेश जोशी ने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि जिन व्यापारियों की दुकान या मकान प्रभावित होंगे, उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद व्यापारियों ने सहमति भी दे दी थी, जिससे परियोजना के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा उसी समय दूर हो गई थी।

Hawa Mahal: वर्तमान विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा
दिलचस्प बात यह है कि अब वर्तमान Hawa Mahal विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने इसी सड़क चौड़ीकरण परियोजना को विधानसभा में मुद्दे के रूप में उठाया है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा तेज है कि जिस परियोजना का शिलान्यास पहले ही हो चुका है, उसे दोबारा मुद्दा बनाकर उठाने के पीछे क्या वजह है।
क्या श्रेय की राजनीति बन गया विकास कार्य ?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं विकास कार्य को जानबूझकर रोककर बाद में उसका श्रेय लेने की रणनीति तो नहीं बनाई गई।
अगर परियोजना पहले ही स्वीकृत होकर शुरू हो चुकी थी, तो फिर दोबारा उद्घाटन या नई शुरुआत की चर्चा क्यों हो रही है, यह भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
जनता का सीधा सवाल
स्थानीय नागरिकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि…
30 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि का क्या हुआ?
काम रुकने के पीछे किसका दबाव या कारण था?
क्या विकास कार्य राजनीति की भेंट चढ़ गया ?
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