Rajasthan Nikay Election: राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में उम्मीदवारों के टिकट तय करने की कवायद ने BJP और कांग्रेस के भीतर मौजूदा नेतृत्व की सक्रियता को लेकर नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। 27 अगस्त से नामांकन की अंतिम तारीख तक दोनों दलों में वार्डवार दावेदारों को लेकर लगातार बैठकों का दौर चला। इस पूरी प्रक्रिया में भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, जबकि कांग्रेस की ओर से प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आए।
हालांकि इसे औपचारिक रूप से दोनों दलों का नया ‘पावर सेंटर’ घोषित करना सही नहीं होगा। यह टिकट वितरण के दौरान इन नेताओं की दिखाई दी सक्रिय भूमिका के आधार पर राजनीतिक आकलन है। खासतौर पर कांग्रेस पहले कह चुकी थी कि उम्मीदवारों के पैनल तैयार करने में जिला इकाइयों को महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी।

Rajasthan Nikay Election में टिकटों पर चला लंबा मंथन
Rajasthan Nikay Election के लिए टिकट हासिल करने को लेकर दोनों प्रमुख पार्टियों में जबरदस्त खींचतान देखने को मिली। नामांकन के अंतिम दिन तक कई दावेदार पार्टी की आधिकारिक मंजूरी का इंतजार करते रहे।
कई शहरों में हालात ऐसे रहे कि संभावित उम्मीदवारों ने पार्टी टिकट की अंतिम घोषणा से पहले ही नामांकन दाखिल कर दिए। अंतिम समय तक जारी बैठकों के चलते BJP और कांग्रेस दोनों के कई दावेदारों की धड़कनें बढ़ी रहीं।
इसी प्रक्रिया के दौरान यह तस्वीर सामने आई कि प्रदेश स्तर पर दोनों दलों में दो-दो चेहरे लगातार बैठकों और उम्मीदवार चयन की कवायद में मौजूद रहे।
Rajasthan Nikay Election: BJP में भजनलाल शर्मा-मदन राठौड़ की सक्रियता
भारतीय जनता पार्टी में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ टिकट वितरण से जुड़ी बैठकों में प्रमुख रूप से सक्रिय रहे।
प्रदेश BJP कार्यालय में संभागवार बैठकों से लेकर अलग-अलग वार्डों के पैनल और दावेदारों के नामों पर चर्चा तक दोनों नेता लगातार प्रक्रिया में दिखाई दिए। टिकटों पर सहमति नहीं बनने वाली सीटों पर दोबारा मंथन भी किया गया।
निकाय चुनाव की तैयारियों की शुरुआत से ही दोनों नेता साथ दिखाई दे रहे थे। अगस्त में हुई BJP की चुनावी बैठक में भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ मौजूद थे, जहां संगठनात्मक रणनीति और टिकट वितरण के मापदंडों पर चर्चा हुई थी।
मदन राठौड़ ने पहले कहा था कि टिकट देते समय साफ छवि, जनता से संपर्क, जमीनी सक्रियता और जीतने की क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने सिफारिश और भाई-भतीजावाद के आधार पर टिकट नहीं देने की बात भी कही थी।
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वसुंधरा राजे और सतीश पूनियां बैठकों में नहीं दिखे
Rajasthan Nikay Election के टिकट वितरण के दौरान BJP के कुछ अन्य बड़े नेताओं की प्रदेश कार्यालय में चल रही अंतिम कवायद से दूरी भी चर्चा में रही।
रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश पूनियां प्रदेश कार्यालय में चल रही टिकट प्रक्रिया में प्रमुख रूप से नजर नहीं आए। पूनियां इस दौरान हरियाणा और पंजाब के कार्यक्रमों में व्यस्त बताए गए।
लेकिन केवल इन बैठकों में मौजूद नहीं रहने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पार्टी में इन नेताओं की राजनीतिक भूमिका या प्रभाव खत्म हो गया है। खबर का महत्वपूर्ण पहलू इतना है कि मौजूदा टिकट वितरण की प्रदेश स्तरीय प्रक्रिया में भजनलाल शर्मा और मदन राठौड़ की सक्रियता ज्यादा दिखाई दी।
Rajasthan Nikay Election: कांग्रेस में डोटासरा-जूली ने संभाला मोर्चा
कांग्रेस में भी Rajasthan Nikay Election के टिकट मंथन के दौरान दो चेहरे लगातार सामने रहे—प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली।
दोनों नेताओं ने जिलावार प्रभारियों और संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की। कई क्षेत्रों में दावेदार ज्यादा होने के कारण अंतिम फैसला लेने में खींचतान भी देखने को मिली।
इससे पहले कांग्रेस नेतृत्व ने प्रत्याशी चयन में जिला कांग्रेस कमेटियों को महत्वपूर्ण भूमिका देने की रणनीति घोषित की थी। डोटासरा ने कहा था कि जिला कमेटियां पैनल तैयार करेंगी और प्रदेश स्तर पर उन नामों पर मंथन होगा। इसलिए टिकट प्रक्रिया को केवल दो नेताओं द्वारा पूरी तरह नियंत्रित किया गया कहना सही नहीं होगा।
फिर भी अंतिम दौर की प्रदेश स्तरीय कवायद में डोटासरा और जूली की सक्रिय मौजूदगी राजनीतिक रूप से साफ दिखाई दी।

कांग्रेस के कई वरिष्ठ चेहरे अंतिम मंथन से दूर
कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं की अंतिम प्रदेश स्तरीय टिकट बैठकों में सीमित मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी।
रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी जयपुर में होने के बावजूद टिकट मंथन की प्रमुख बैठकों में नजर नहीं आए। अंतिम चरण के दौरान गहलोत प्रतापगढ़ में जन आक्रोश यात्रा की महारैली में मौजूद थे।
वहीं राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दिल्ली में थे। पायलट का आगे बाड़मेर-बालोतरा दौरा भी निर्धारित था।
इन नेताओं की मौजूदगी न होना अपने आप में किसी गुटबाजी या राजनीतिक प्रभाव कम होने का प्रमाण नहीं है। लेकिन चुनावी टिकटों के अंतिम मंथन में कौन नेता प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय था, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जरूर शुरू हुई।
दोनों पार्टियों में टिकट को लेकर असंतोष भी आया सामने
Rajasthan Nikay Election के टिकट वितरण की प्रक्रिया दोनों पार्टियों के लिए आसान नहीं रही।
BJP में कई जगह टिकट नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। जयपुर में भी टिकट के दावेदारों और समर्थकों की नाराजगी सामने आई, जबकि भीलवाड़ा समेत कुछ स्थानों पर इस्तीफे और विरोध तक की खबरें आईं।
कांग्रेस भी इससे अछूती नहीं रही। भीलवाड़ा के टिकटों को लेकर कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस की रिपोर्ट सामने आई। अलग-अलग जिलों में स्थानीय नेताओं और दावेदारों के बीच टिकट को लेकर खींचतान हुई।
अजमेर में भी टिकट वितरण को लेकर BJP कार्यकर्ताओं का विरोध सामने आया, जबकि कांग्रेस ने 80 में से 78 वार्डों के प्रत्याशियों की घोषणा की।
Rajasthan Nikay Election: जयपुर में दोनों दलों ने कई पुराने चेहरों के टिकट काटे
टिकट वितरण में केवल नेतृत्व ही नहीं, प्रत्याशी चयन का तरीका भी चर्चा में है।
जयपुर नगर निगम चुनाव में BJP और कांग्रेस ने बड़ी संख्या में मौजूदा पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों पर भरोसा जताया। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दलों ने मिलाकर करीब 83 प्रतिशत मौजूदा पार्षदों को दोबारा टिकट नहीं दिया।
इसके पीछे वार्ड परिसीमन, नए राजनीतिक समीकरण, महिलाओं-युवाओं को अवसर और स्थानीय स्तर पर जीत की संभावना जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं।
यानी Rajasthan Nikay Election में टिकटों की लड़ाई केवल वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रत्याशी चयन के पुराने फार्मूले में भी बदलाव दिखाई दिया।
Rajasthan Nikay Election: चार नेताओं के आसपास क्यों केंद्रित हुई चर्चा?
इस बार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ये चार नाम हैं:
- भजनलाल शर्मा – मुख्यमंत्री, राजस्थान
- मदन राठौड़ – BJP प्रदेशाध्यक्ष
- गोविंद सिंह डोटासरा – राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष
- टीकाराम जूली – नेता प्रतिपक्ष
BJP में भजनलाल शर्मा सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि मदन राठौड़ संगठन के प्रमुख हैं। इसलिए टिकट प्रक्रिया में सरकार और संगठन के दोनों शीर्ष पदों का एक साथ सक्रिय रहना स्वाभाविक भी है।
कांग्रेस सत्ता में नहीं है, इसलिए प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा और विधानसभा में विपक्ष के नेता जूली संगठन और विधायक दल के दो सबसे महत्वपूर्ण मौजूदा चेहरे हैं।
इसी वजह से टिकट वितरण के दौरान चारों नेताओं की लगातार सक्रियता को प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक power structure से जोड़कर देखा जा रहा है।
Rajasthan Nikay Election की बड़ी बातें
- BJP-कांग्रेस में नामांकन की अंतिम तारीख तक टिकटों पर मंथन चला।
- BJP में भजनलाल शर्मा और मदन राठौड़ लगातार बैठकों में सक्रिय रहे।
- कांग्रेस में गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली अंतिम मंथन में प्रमुखता से नजर आए।
- वसुंधरा राजे और सतीश पूनियां BJP की प्रदेश स्तरीय अंतिम टिकट कवायद में प्रमुख रूप से नजर नहीं आए।
- अशोक गहलोत और सीपी जोशी भी कांग्रेस की अंतिम टिकट बैठकों में प्रमुख भूमिका में नहीं दिखे।
- सचिन पायलट और जितेंद्र सिंह इस दौरान दिल्ली में थे।
- BJP ने टिकट के लिए साफ छवि और जीतने की क्षमता को प्राथमिकता देने की बात कही थी।
- कांग्रेस ने जिला कमेटियों को उम्मीदवार चयन में अहम भूमिका देने का फॉर्मूला बनाया था।
- दोनों दलों में टिकट वितरण को लेकर कई जगह असंतोष भी सामने आया।
अब चुनावी मैदान में होगी चारों नेताओं की परीक्षा
कुल मिलाकर Rajasthan Nikay Election में टिकट वितरण के दौर ने भाजपा और कांग्रेस के मौजूदा सक्रिय नेतृत्व की तस्वीर जरूर सामने रखी है। BJP में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मदन राठौड़ लगातार रणनीतिक बैठकों में दिखाई दिए, जबकि कांग्रेस में डोटासरा और जूली ने प्रदेश स्तर की टिकट कवायद में मोर्चा संभाला।
लेकिन इसे दूसरे वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव के खत्म होने या चार नेताओं के औपचारिक ‘पावर सेंटर’ बनने के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। असली राजनीतिक परीक्षा अब चुनाव नतीजों से होगी। टिकट चयन के बाद किस पार्टी में बगावत कितनी नियंत्रित होती है और चुने गए उम्मीदवार चुनाव मैदान में कैसा प्रदर्शन करते हैं, वही इस रणनीति की सफलता तय करेगा।




