Rajyavardhan Rathore Sainik School Chittorgarh: राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री और झोटवाड़ा विधायक कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने चित्तौड़गढ़ प्रवास के दौरान सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ का दौरा किया। उन्होंने स्कूल की शूटिंग रेंज का निरीक्षण किया और कैडेट्स के प्रशिक्षण, खेल सुविधाओं तथा उपलब्ध व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने अपने सैन्य जीवन से लेकर ओलंपिक पदक तक के सफर के अनुभव भी कैडेट्स के साथ साझा किए।
कर्नल राठौड़ ने युवाओं को संदेश दिया कि किसी व्यक्ति का भविष्य केवल परिस्थितियों से तय नहीं होता, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लिए गए फैसले भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने कैडेट्स को लक्ष्य के प्रति जिम्मेदारी लेने, मेहनत जारी रखने और सफलता-असफलता दोनों को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ने की सलाह दी।

Rajyavardhan Rathore ने शूटिंग रेंज का किया निरीक्षण
सैनिक स्कूल पहुंचने पर कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने विशेष रूप से शूटिंग रेंज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कैडेट्स के प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं की जानकारी ली।
खेल और सैनिक जीवन दोनों से जुड़े रहे राठौड़ ने कैडेट्स से कहा कि अच्छी सुविधाएं प्रतिभा को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं, लेकिन अंतिम सफलता खिलाड़ी की तैयारी, अनुशासन और फैसलों पर निर्भर करती है।
राजस्थान सरकार में राठौड़ के पास युवा मामले एवं खेल के साथ सैनिक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी भी है। इसके अलावा वे उद्योग एवं वाणिज्य, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार तथा कौशल-नियोजन एवं उद्यमिता जैसे विभाग संभाल रहे हैं।
Rajyavardhan Rathore: ‘परिस्थितियां नहीं, आपके फैसले भविष्य तय करते हैं’
कैडेट्स से बातचीत में राठौड़ ने अपने जीवन के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों को भविष्य का अंतिम फैसला नहीं मानना चाहिए।
उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति उन परिस्थितियों में क्या फैसला करता है और अपने लक्ष्य के लिए कितनी जिम्मेदारी लेता है, यही उसकी दिशा तय करता है।
राठौड़ ने कैडेट्स से कहा कि बड़े लक्ष्य की यात्रा लंबी हो सकती है और उसमें सफलता व असफलता दोनों आ सकती हैं, लेकिन फोकस अपने प्रयास और प्रक्रिया पर रहना चाहिए।

Rajyavardhan Rathore: कश्मीर के अनुभवों का भी किया जिक्र
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने भारतीय सेना में अपने कार्यकाल की यादें भी साझा कीं।
उन्होंने बताया कि सेना में रहते हुए उनकी खेलों में विशेष रुचि थी। उनके सार्वजनिक जीवन-वृत्त के मुताबिक उन्होंने भारतीय सेना में करीब 26 वर्ष सेवा दी और जम्मू-कश्मीर में counter-terrorism operations से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निभाईं।
कैडेट्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि कश्मीर में ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाते समय ओलंपिक उनके लिए बहुत दूर का लक्ष्य लगता था, लेकिन बाद में उन्होंने अपने sporting career पर पूरी तरह फोकस करने का निर्णय लिया।
ओलंपिक फाइनल का बताया मंत्र
Rajyavardhan Rathore Sainik School Chittorgarh संवाद में राठौड़ ने 2004 Athens Olympics की अपनी यात्रा का भी जिक्र किया।
उन्होंने कैडेट्स को बताया कि बड़े मुकाबले के दौरान पूरी प्रतियोगिता या परिणाम के बारे में सोचने के बजाय एक समय में केवल एक शॉट और अपनी प्रक्रिया पर फोकस करना जरूरी होता है।
राठौड़ ने Athens Olympics 2004 के men’s double trap event में सिल्वर मेडल जीता था। यह भारत का पहला individual Olympic silver medal था। उन्होंने फाइनल में 44/50 का स्कोर किया और कुल 179 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।
उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद जब ओलंपिक मंच पर तिरंगा ऊपर उठा, तो वह उनके जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक था।
Rajyavardhan Rathore: लंबे संघर्ष से नहीं घबराने की सलाह
राठौड़ ने कैडेट्स से कहा कि किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए लंबी तैयारी से घबराना नहीं चाहिए।
उनका संदेश था कि परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद यदि व्यक्ति का फैसला मजबूत है और वह लगातार मेहनत करता है तो लक्ष्य तक पहुंचने की संभावना बढ़ती है।
उन्होंने सफलता और असफलता दोनों की जिम्मेदारी लेने की बात कहते हुए युवाओं से अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।
Rajyavardhan Rathore: सेना और खेल दोनों में लंबा सफर
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का करियर सेना और खेल दोनों से जुड़ा रहा है।
उनके आधिकारिक परिचय के मुताबिक वह National Defence Academy और Indian Military Academy से प्रशिक्षित हैं। सेना में रहते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं और बाद में shooting में international level पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
2004 Athens Olympic silver के अलावा उन्होंने Commonwealth Games में भी कई पदक जीते। 2008 Beijing Olympics के उद्घाटन समारोह में वह भारतीय दल के flag-bearer भी रहे।
Rajyavardhan Rathore: शूटिंग सुविधाओं से प्रतिभाओं को मिलेगा मौका
सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में शूटिंग रेंज के निरीक्षण के दौरान खेल सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
बेहतर प्रशिक्षण और infrastructure से कैडेट्स को shooting समेत विभिन्न खेलों में अपनी क्षमता विकसित करने और आगे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के अवसर मिल सकते हैं।
कैडेट्स के साथ संवाद का केंद्रीय संदेश भी यही रहा कि उपलब्ध संसाधनों के साथ अनुशासन, स्पष्ट लक्ष्य और सही समय पर लिया गया फैसला किसी युवा के भविष्य की दिशा बदल सकता है।
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