SIR Voter List को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। तिवारी ने कहा कि Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम draft voter lists से बाहर हुए हैं और हर ऐसे मामले का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC गठित करने की मांग भी की है।
इसी दौरान तिवारी ने विदेश नीति से जुड़े एक अलग मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पाकिस्तान संबंधी बयान का समर्थन किया। उन्होंने पाकिस्तान पर भारत और दक्षिण एशिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी रहने चाहिए। यह पाकिस्तान को लेकर तिवारी का राजनीतिक और विदेश नीति संबंधी आकलन है।
SIR Voter List पर मनीष तिवारी ने क्या कहा?
SIR Voter List विवाद पर मनीष तिवारी ने कहा कि देश में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नाम draft electoral rolls से बाहर हुए हैं। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक ऐसे मतदाता की जानकारी और नाम शामिल नहीं किए जाने या हटाए जाने का कारण चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए।
तिवारी ने कहा कि जिन लोगों के नाम सूची में नहीं हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने और पात्र होने पर मतदाता सूची में वापस शामिल होने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
हालांकि यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि draft electoral roll से किसी नाम का बाहर होना और final electoral roll से अंतिम रूप से हटाया जाना एक ही बात नहीं है। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के दौरान 13 करोड़ से ज्यादा नाम draft rolls में शामिल नहीं हुए या हटाए गए। SIR प्रक्रिया में इसके बाद claims, objections, notice और verification के चरण भी होते हैं।
SIR Voter List: चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट पर विवाद
SIR Voter List पर राजनीतिक विवाद तब और बढ़ गया जब एक मीडिया जांच में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक इन आपत्तियों में SIR और मतदाता सूची से संबंधित कुछ प्रक्रियाएं भी शामिल थीं।
इसके जवाब में चुनाव आयोग ने कहा कि किसी प्रस्ताव या प्रक्रिया के मसौदा स्तर पर सवाल, सुझाव और अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग का कहना है कि उसके अंतिम आदेश कानूनी प्रक्रिया और आयोग की स्वीकृति के अनुसार जारी किए गए।
यानी आंतरिक नोटिंग को लेकर रिपोर्ट और चुनाव आयोग की व्याख्या अलग-अलग हैं। तिवारी ने इन्हीं रिपोर्टों का हवाला देते हुए JPC जांच की मांग की है।
SIR Voter List: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
मनीष तिवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पद छोड़ने को कहा। उन्होंने 1993 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग में निर्णय सहमति या बहुमत के आधार पर होने चाहिए।
तिवारी का तर्क है कि यदि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने कुछ फैसलों पर असहमति जताई थी तो यह जांच का विषय होना चाहिए कि अंतिम निर्णय किस प्रक्रिया से लिए गए। उन्होंने इसे आधार बनाकर CEC के इस्तीफे और संसदीय जांच की मांग की। यह तिवारी की कानूनी और राजनीतिक व्याख्या है; चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके अंतिम फैसलों को आवश्यक संस्थागत स्वीकृति प्राप्त थी।
चंडीगढ़ की वोटर लिस्ट पर भी उठाए सवाल
चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी अपने संसदीय क्षेत्र की SIR Voter List को लेकर भी लगातार सवाल उठा रहे हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव के समय चंडीगढ़ में 6,59,805 मतदाता दर्ज थे। सितंबर 2026 में प्रकाशित final electoral roll में यह संख्या 4,60,209 रही। यानी दोनों आंकड़ों के बीच 1,99,596 मतदाताओं का अंतर है।
तिवारी ने चंडीगढ़ की मुख्य निर्वाचन अधिकारी से हर हटाए गए या शामिल नहीं किए गए मतदाता का नाम, वार्ड, बूथ, EPIC नंबर और उसका कारण सार्वजनिक करने की मांग की है।
यह आंकड़ा अपने आप यह साबित नहीं करता कि सभी 1.99 लाख लोगों को गलत तरीके से हटाया गया। तिवारी ने इसी अंतर का विस्तृत reconciliation मांगा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने मतदाता स्थानांतरित हुए, कितने duplicate थे या किन अन्य कारणों से सूची बदली।
SIR Voter List में नोटिस मिलने का मतलब नाम कटना नहीं
चुनाव अधिकारियों ने SIR प्रक्रिया को लेकर यह भी स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता को verification notice मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसका नाम अपने आप voter list से हटा दिया गया है।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने हाल में कहा था कि नोटिस due diligence का हिस्सा हैं और संबंधित मतदाता दस्तावेज देकर अपनी पात्रता की पुष्टि कर सकता है।
Election Commission के आधिकारिक SIR schedule में भी draft roll के बाद claims and objections, notice और disposal की अवधि तथा उसके बाद final electoral roll प्रकाशित करने का अलग चरण निर्धारित है।
SIR Voter List: पाकिस्तान पर जयशंकर के बयान का किया समर्थन
SIR विवाद से अलग मनीष तिवारी ने 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पाकिस्तान से जुड़े घटनाक्रम पर भी प्रतिक्रिया दी।
न्यूयॉर्क में एक पाकिस्तानी पत्रकार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल पूछा था। जयशंकर ने उस आरोप को खारिज करते हुए पाकिस्तान पर पलटवार किया। इसके बाद तिवारी ने जयशंकर की प्रतिक्रिया का समर्थन किया।
तिवारी ने पाकिस्तान पर लंबे समय से भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया और कहा कि भारत को इस मुद्दे पर दूसरे देशों के साथ कूटनीतिक स्तर पर काम करना चाहिए। पाकिस्तान भारत के ऐसे आरोपों को अलग-अलग मौकों पर खारिज करता रहा है।
SIR Voter List पर आगे क्या?
SIR Voter List विवाद में अब तीन अलग मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं—draft rolls से बाहर हुए मतदाताओं की अंतिम स्थिति, चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद और राजनीतिक दलों की ओर से उठाई जा रही पारदर्शिता की मांग।
SIR Voter List अभी अलग-अलग राज्यों में अलग चरणों में है। चुनाव आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक कई राज्यों में claims, objections और verification की प्रक्रिया draft list जारी होने के बाद भी जारी रहती है। इसलिए किसी राज्य की final voter list प्रकाशित होने से पहले draft आंकड़ों को अंतिम deletion के रूप में देखना सही नहीं होगा।
मनीष तिवारी और कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे तथा JPC जांच की मांग की है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को कानूनी और संस्थागत नियमों के अनुरूप बता रहा है। आगे इस विवाद में आयोग की ओर से जारी डेटा, final electoral rolls और किसी न्यायिक या संसदीय कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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