Uday Bhanu Chib: चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया है। दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान चिब ने कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि आगे उनके सामने “जेल जाने या देश छोड़ने” जैसे विकल्प होंगे और यूथ कांग्रेस उन्हें जवाबदेही से बचने नहीं देगी।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ कार्रवाई और SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किए हैं। 25 सितंबर को दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ, जम्मू, चंडीगढ़ और अन्य शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए।
Uday Bhanu Chib ने ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या कहा?
Uday Bhanu Chib ने अपने संबोधन में मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए कहा कि युवा कांग्रेस इस मामले को यहीं खत्म नहीं होने देगी। उन्होंने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग दोहराई और कहा कि संगठन इस मुद्दे पर आंदोलन जारी रखेगा।
चिब के बयान का एक हिस्सा खास तौर पर चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार “या तो जेल जाएंगे या देश छोड़ेंगे”। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर वह देश छोड़ने की कोशिश करते हैं तो युवा कांग्रेस कार्यकर्ता उनका विरोध करेंगे।
यह यूथ कांग्रेस नेता का राजनीतिक बयान और चेतावनी है; ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किसी अदालत ने इन आरोपों पर दोष तय नहीं किया है।
यूथ कांग्रेस ने इससे एक दिन पहले “Gyanesh, It’s Done Bro” नाम से ऑनलाइन अभियान भी शुरू किया था। संगठन ने CEC को पद से हटाने, गिरफ्तारी और prosecution, चुनावी प्रक्रियाओं की जांच तथा चुनाव आयोग के आंतरिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग रखी है।
Uday Bhanu Chib: SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
Uday Bhanu Chib और कांग्रेस का मौजूदा विरोध देशभर में चल रही मतदाता सूची की Special Intensive Revision प्रक्रिया से जुड़ा है।
विवाद 23 सितंबर को प्रकाशित Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता जोड़ने-हटाने, Form 6 में बदलाव और electoral-roll database के प्रबंधन से जुड़े विषय शामिल थे।
रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ मौकों पर दोनों आयुक्तों ने फैसलों को उनकी जानकारी के बिना आगे बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए।
हालांकि चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने आंतरिक मतभेद को अलग तरीके से पेश किया है। उनका कहना है कि drafting और विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग टिप्पणियां सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR सहित अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
Uday Bhanu Chib: 13 करोड़ मतदाताओं वाले दावे की क्या सच्चाई?
चिब ने आरोप लगाया कि करीब 13 करोड़ भारतीयों को उनके संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित किया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। Indian Express की जांच के मुताबिक SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की draft electoral rolls से 13 करोड़ से अधिक नाम हटे हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन सभी लोगों का मतदान अधिकार अंतिम रूप से और स्थायी तौर पर समाप्त हो चुका है। Draft roll से नाम हटने के बाद claims, objections, verification और appeal जैसी प्रक्रियाएं उपलब्ध होती हैं।
Election Commission का official voter portal भी SIR-2026 के तहत electoral rolls देखने, notice के खिलाफ documents जमा करने और registration से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।
इसलिए “13 करोड़ लोगों का वोट छीन लिया गया” कांग्रेस और उसके नेताओं की राजनीतिक व्याख्या है; उपलब्ध आंकड़ा draft voter lists में नामों के बदलाव से जुड़ा है।
Uday Bhanu Chib: चुनाव आयोग के भीतर 14 आपत्तियों पर सियासत तेज
Indian Express की रिपोर्ट में जिन 14 आपत्तियों का उल्लेख किया गया, उनमें Form 6 से जुड़ा मुद्दा भी शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार नए मतदाताओं के registration form में पिछले SIR के electoral roll से माता-पिता या दादा-दादी की जानकारी जोड़ने से संबंधित बदलाव पर संधू और जोशी ने आपत्ति जताई थी। एक आंतरिक टिप्पणी में बदलाव को “unauthorised” और “illegal” तक कहा गया था।
इसके अलावा voter database तक अधिकारियों की पहुंच और IT systems के centralisation को लेकर भी सवाल उठाए गए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि final institutional decisions सामूहिक रूप से लिए गए और draft-stage observations को final disagreement के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

Uday Bhanu Chib: कांग्रेस ने देशभर में शुरू किया प्रदर्शन
Uday Bhanu Chib का बयान उस समय आया है जब कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर फैलाने का फैसला किया है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों से 25 सितंबर को अपने-अपने राज्य के Election Commission offices तक मार्च करने को कहा था। पार्टी की मांगों में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना, गिरफ्तारी और उनके कार्यकाल में electoral rolls से संबंधित फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा शामिल है।
शुक्रवार को दिल्ली में Election Commission कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई। वहीं Youth Congress ने 5 रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक विरोध मार्च का कार्यक्रम बनाया।
देश के कई हिस्सों में कांग्रेस के प्रदर्शन भी शुरू हो चुके हैं।
Uday Bhanu Chib: यूथ कांग्रेस पहले भी कर चुकी है प्रदर्शन
यह विवाद केवल शुक्रवार के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है।
23 सितंबर को भी Indian Youth Congress ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए रायसीना रोड पर पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी।
24 सितंबर को यूथ कांग्रेस ने ऑनलाइन petition अभियान शुरू किया। संगठन का कहना है कि वह इस मुद्दे को colleges, universities, youth organisations और देश के दूसरे हिस्सों तक लेकर जाएगा।
इसी दौरान कांग्रेस ने अपने जिला संगठनों को 28 सितंबर को जिला कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन करने के निर्देश भी दिए हैं।
Uday Bhanu Chib के बयान के बीच क्या है EC का पक्ष?
विवाद के बीच चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है जिनमें तीन सदस्यीय आयोग को अंतिम फैसलों पर बंटा हुआ बताया गया।
EC से जुड़े सूत्रों के मुताबिक SIR समेत final decisions सर्वसम्मति से लिए गए। उनका कहना है कि internal file observations, suggestions और deliberations किसी multi-member constitutional body के कामकाज का हिस्सा होते हैं।
Election Commission की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक ज्ञानेश कुमार Chief Election Commissioner हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी Election Commissioners हैं।
इसलिए राजनीतिक दलों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों और चुनाव आयोग के जवाब—दोनों को अलग-अलग पक्ष के रूप में देखना जरूरी है।
Uday Bhanu Chib: मामले की बड़ी बातें
- Uday Bhanu Chib ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग दोहराते हुए बेहद कड़ा बयान दिया।
- Youth Congress ने CEC को हटाने और electoral process की जांच की मांग की है।
- कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए।
- Indian Express के मुताबिक संधू और जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आंतरिक आपत्तियां दर्ज कीं।
- रिपोर्ट के अनुसार SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की draft rolls से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटे हैं।
- इसका अर्थ सभी 13 करोड़ लोगों का मतदान अधिकार स्थायी रूप से समाप्त होना नहीं है।
- चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि SIR समेत final decisions सर्वसम्मति से लिए गए।
- कांग्रेस ने 28 सितंबर को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन की योजना बनाई है।
SIR विवाद पर बढ़ता राजनीतिक टकराव
कुल मिलाकर Uday Bhanu Chib के ताजा बयान ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। कांग्रेस और यूथ कांग्रेस जहां CEC को हटाने, गिरफ्तारी और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अंतिम फैसले सामूहिक सहमति से लिए गए।
Uday Bhanu Chib, 13 करोड़ मतदाताओं वाला आंकड़ा भी राजनीतिक बहस के केंद्र में है, लेकिन इसे draft rolls से हटे नामों और स्थायी disenfranchisement के बीच अंतर के साथ समझना जरूरी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर आगे कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं और कांग्रेस का आंदोलन आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है।
आधिकारिक voter information और SIR details के लिए Election Commission of India का portal देखा जा सकता है।

