देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में संचार व्यवस्था और राष्ट्रीय प्रसारकों की पहुंच को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने डिजिटल माध्यम (वर्चुअली) से राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में 20-kW क्षमता के नए आकाशवाणी FM ट्रांसमीटर का उद्घाटन किया।
यह पहल भारत सरकार की उस रणनीतिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत देश की सीमाओं पर संचार तंत्र को अभेद्य और सुदृढ़ बनाया जा रहा है।
20,000 वर्ग किलोमीटर का इलाका होगा कवर
इस नए और शक्तिशाली ट्रांसमीटर की स्थापना से जैसलमेर और उसके आस-पास के सुदूर इलाकों में रेडियो कनेक्टिविटी की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
- लंबी रेंज: यह ट्रांसमीटर लगभग 80 किलोमीटर के दायरे (रेडियस) में अपनी सेवाएं देगा।
- विशाल कवरेज: इसके जरिए जैसलमेर जिले का लगभग 20,000 वर्ग किलोमीटर का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर कवर होगा।
- स्थानीय लोगों को लाभ: इस रेंज के भीतर आने वाले गांवों और ढाणियों के निवासियों तक अब स्पष्ट और गुणवत्तापूर्ण आवाज पहुंचेगी।
‘कश्मीर से कच्छ’ तक कनेक्टिविटी का विजन
इस उद्घाटन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने सरकार के उस बड़े विजन को रेखांकित किया, जो देश की पूरी सीमा को एक सूत्र में पिरोता है। सरकार का लक्ष्य “कश्मीर से कच्छ” तक एक ऐसा समर्पित ब्रॉडकास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जिससे पूरी सीमांत पट्टी पर व्यवस्थित रूप से प्रसार भारती का विस्तार किया जा सके।
मुख्य उद्देश्य: इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) और दूरदर्शन (DD) की पहुंच को देश के अंतिम छोर पर बैठे नागरिक तक सुनिश्चित करना है, ताकि उन्हें मनोरंजन के साथ-साथ देश-दुनिया की सही खबरें और महत्वपूर्ण सरकारी जानकारियां समय पर मिल सकें।
सीमा सुरक्षा और रणनीतिक महत्व
भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से जैसलमेर भारत का एक बेहद महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिला है। सीमा के पार से होने वाले किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार या प्रोपेगैंडा का मुकाबला करने के लिए भारत के अपने मजबूत प्रसारण तंत्र का होना बेहद जरूरी है।
यह नया एफएम ट्रांसमीटर न केवल स्थानीय संस्कृति और लोक संगीत को बढ़ावा देगा, बल्कि सुरक्षा बलों और सीमा पर रहने वाले नागरिकों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज कर बॉर्डर कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर में एक मील का पत्थर साबित होगा।