Rajasthan Politics: vote जनता का, पहरा पार्टियों का—अपने ही Candidates पर Trust क्यों नहीं? | TNC |
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 की वोटिंग खत्म हुई और इसके साथ ही कई शहरों में ‘बाड़ेबंदी’ की राजनीति चर्चा में आ गई। जयपुर से अजमेर, उदयपुर, झुंझुनूं, बाड़मेर और हाड़ौती तक प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद सामने आ रही है। पार्टियां इसे रणनीति, प्रशिक्षण या जनादेश की सुरक्षा कह सकती हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है—अगर अपने ही प्रत्याशियों पर भरोसा नहीं है तो टिकट क्यों दिया गया? जनता वोट देकर प्रतिनिधि चुनती है, लेकिन नतीजों से पहले वही प्रतिनिधि पार्टी की निगरानी में क्यों पहुंच जाते हैं? क्या यह लोकतांत्रिक रणनीति है या खरीद-फरोख्त के डर से पैदा हुई सियासी मजबूरी?
