Yogi: कहा जाता है कि दिल्ली की गद्दी का रास्ता यूपी की 80 सीटों से होकर गुजरता है। साहब, यूपी में जो होता है, वो केवल एक राज्य की खबर नहीं होती, वो पूरे देश के लिए ‘ब्लूप्रिंट’ होता है। आज यूपी में जो ‘सिस्टम सेट’ हुआ है, उसका असर दिल्ली से लेकर कोलकाता तक की सत्ता के गलियारों में महसूस किया जा रहा है। आज की कहानी Yogi के ‘कानून’ और शुभेंदु के ‘एक्शन’ के इर्द-गिर्द घूमती है।

Yogi कैबिनेट की बैठक
आज Yogi कैबिनेट की बैठक हुई। लोकतंत्रीय सेनानियों के लिए कैशलेस इलाज, लखनऊ-आगरा मेट्रो का विस्तार और ओबीसी आयोग का गठन…….ये तो सरकारी फाइलें थीं, जिन पर मुहर लगी। लेकिन असली ‘मसाला’ तो तब आया, जब सीएम Yogi ने ‘अमर उजाला उत्तर प्रदेश’ संवाद में माइक संभाला। Yogi जी का अंदाज वही….. पुराना, सख्त और बिल्कुल स्पष्ट। सड़कों पर नमाज पढ़ने वालों को, उन्होंने सीधे शब्दों में ‘क्लास’ लगा दी। सीधा संदेश दिया : “सड़कें चलने के लिए हैं, चौराहे नमाज पढ़ने के लिए नहीं। आवागमन बाधित करना अधिकार नहीं, बाधा है।” ये भी कहा — प्यार से मानेंगे तो ठीक है वर्ना दूसरा तरीका अपनाएंगे। वैसे कहने की जरूरत नहीं है कि उनका दूसरा तरीका क्या होगा और कैसा होगा।
इसी मुद्दे पर जब किसी ने संख्या बल का तर्क दिया, तो Yogi ने ऐसा ‘सॉल्यूशन’ दिया, कि सुनने वाले भी चौंक गए! उन्होंने कहा : “संख्या ज्यादा है ? तो शिफ्ट में पढ़ो! घर में जगह कम है ? तो संख्या मैनेज करो! नियम सबके लिए हैं, कोई ‘वीआईपी’ नहीं है।” Yogi ने ये भी याद दिलाया कि जब 2017 में सत्ता संभाली थी, तो प्रदेश में माफियाओं की समानांतर सरकार चलती थी। उन्होंने चेतावनी दी — हमारा पहला मंत्र है संवाद। हम प्यार से समझाते हैं, लेकिन अगर कोई नियम तोड़ेगा, तो हमारे पास बरेली वाला ‘डेमो’ भी तैयार रहता है। संघर्ष की भाषा अगर किसी को पसंद है, तो वो भी देख ली जाए!
अब Yogi से चलते हैं जरा पूर्व की तरफ। पश्चिम बंगाल में, जहाँ कभी सड़क पर धार्मिक प्रदर्शनों को ‘सांस्कृतिक स्वतंत्रता’ का नाम देकर बढ़ावा दिया जाता था, वहाँ अब हवा बदल गई है। सड़क पर धार्मिक गतिविधियों की नो-एंट्री लगा दी गई है। कानून सबके लिए बराबर — चाहे मजहब कोई भी हो। और तो और, मदरसा फंडिंग और इमाम-मोअज्जिम के भत्ते पर ‘कैंची’ चलाकर, सरकार ने एक बड़ा स्पष्ट संदेश दे दिया है — सरकारी खजाना तुष्टिकरण के लिए नहीं, विकास के लिए है।

Yogi के यूपी से लेकर बंगाल तक, एक संदेश साफ है — दौर बदल गया है। जो लोग अब भी भीड़ के दम पर सिस्टम को झुकाने का सपना देख रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि अब कानून का ‘बुलडोजर’ और ‘ब्लूप्रिंट’ दोनों तैयार हैं। Yogi जी ने आज एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है—संवाद से मानोगे तो ‘नागरिक’ बने रहोगे, और अगर संघर्ष की जिद करोगे, तो फिर इतिहास गवाह है कि जो आज ‘वीर’ बन रहे थे, कल वो ‘हाशिए’ पर दिखेंगे। ये आज का भारत है, जहां सड़क पर इबादत नहीं, नियम चलते हैं। और जो इन नियमों के आड़े आएगा, उसे इतिहास के पन्नों में केवल एक ‘अराजक अध्याय’ बनकर रह जाना होगा।
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