Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान में अब गांवों की सत्ता के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है और इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। BJP और कांग्रेस दोनों ने अपनी संगठनात्मक मशीनरी को मैदान में उतार दिया है, लेकिन मतदान से पहले यह तय कर देना कि कौन बाजी मारेगा, तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं है। फैसला प्रदेश के 4.03 करोड़ से ज्यादा मतदाता करेंगे।
निकाय चुनाव के बाद BJP अपनी बढ़त को पंचायत स्तर तक ले जाने की कोशिश कर रही है। वहीं कांग्रेस निकाय चुनाव में सामने आई टिकट वितरण, क्रॉस-वोटिंग और संगठनात्मक तालमेल की कमजोरियों को दूर कर गांवों में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है।
Rajasthan Panchayat Election: कब-कब होगी वोटिंग?
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव चार चरणों में कराने का कार्यक्रम जारी किया है।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को होगा। इन पदों की मतगणना 20 नवंबर को होगी।
वहीं पंच और सरपंच चुनाव 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को कराए जाएंगे। इनकी मतगणना संबंधित ग्राम पंचायत मुख्यालय पर मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन होगी।
प्रदेश में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियां और 14,403 ग्राम पंचायतें चुनाव प्रक्रिया के दायरे में हैं। कुल 1,403 जिला परिषद सदस्य और 8,245 पंचायत समिति सदस्य चुने जाने हैं।
सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव मतपेटी और ballot paper से होगा, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए EVM का इस्तेमाल किया जाएगा।
Rajasthan Panchayat Election: BJP की रणनीति: 23 जिलों में उतारे बड़े नेता
Rajasthan Panchayat Election के लिए BJP ने चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले ही जिला स्तर पर संगठनात्मक बैठकों का बड़ा अभियान शुरू कर दिया था।
30 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच पार्टी के पांच वरिष्ठ पदाधिकारियों को 23 जिलों में भेजा गया। राजस्थान प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री संजय भाटिया ने खैरथल-तिजारा, अलवर, भरतपुर और दौसा में संगठनात्मक बैठकें कीं।
राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी को चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और उदयपुर की जिम्मेदारी दी गई।
प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ टोंक, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा और राजसमंद पहुंचे।
प्रदेश सह-प्रभारी कुलजीत सिंह चहल ने झुंझुनूं, सीकर और कोटपूतली-बहरोड़ में बैठकों के जरिए संगठन की तैयारी देखी।
वहीं प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार को जयपुर उत्तर-दक्षिण, चूरू, बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में कार्यकर्ताओं से संवाद की जिम्मेदारी दी गई।
इस अभियान का फोकस सिर्फ सार्वजनिक सभाओं पर नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन, संभावित उम्मीदवार, बूथ नेटवर्क और निकाय चुनाव के दौरान सामने आई कमजोरियों की समीक्षा पर भी रहा।
Rajasthan Panchayat Election: निकाय चुनाव की गलतियां भी देख रही BJP
BJP ने हाल के नगर निकाय चुनावों के बाद अपने संगठन की समीक्षा भी की है।
पार्टी की बैठकों में टिकट वितरण, बागी प्रत्याशियों, स्थानीय विधायकों की भूमिका और कुछ क्षेत्रों में मिली शिकायतों पर चर्चा हुई। जिला अध्यक्षों को विधानसभा क्षेत्रवार रिपोर्ट तैयार करने के लिए भी कहा गया। इन रिपोर्टों में voting pattern, cross-voting की शिकायतों और बागियों की भूमिका जैसे मुद्दों को शामिल किया जा रहा है।
इसका मतलब है कि BJP पंचायत चुनाव में केवल निकाय चुनाव की जीत के भरोसे नहीं उतर रही, बल्कि जिन जगहों पर संगठनात्मक कमजोरी सामने आई थी, उन पर भी काम कर रही है।
Rajasthan Panchayat Election: अब संभाग स्तर पर भी बनाई टीम
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद BJP ने संभाग स्तर पर भी वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंप दी है।
3 अक्टूबर को जारी व्यवस्था में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भरतपुर और अजमेर संभाग के लिए अलग-अलग प्रभारी बनाए गए हैं। इनमें राजेंद्र राठौड़, ओंकार सिंह लखावत, सीआर चौधरी, कैलाश चौधरी, अशोक परनामी और अरुण चतुर्वेदी जैसे वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है।
इससे संकेत मिलता है कि BJP चुनाव अभियान को जिला बैठकों से आगे अब संभाग और पंचायत स्तर तक ले जा रही है।
Rajasthan Panchayat Election: मुख्यमंत्री भजनलाल का गांवों पर फोकस
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी पिछले दिनों लगातार कार्यकर्ता और पंचायती राज प्रतिनिधि संवाद कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं।
2 अक्टूबर को जयपुर के तक्षशिला ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री ने पंचायती राज प्रतिनिधियों से संवाद किया। उन्होंने सरपंचों से सरकारी योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया और ग्राम पंचायत को ग्रामीण प्रशासन की महत्वपूर्ण इकाई बताया।
इससे पहले कोटा समेत अन्य क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटने का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने बूथ संगठन, महिलाओं और नए मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने की बात कही थी।
BJP के लिए राज्य और केंद्र सरकार की योजनाएं चुनावी अभियान का प्रमुख हिस्सा रहने वाली हैं।
Rajasthan Panchayat Election: Congress की रणनीति: स्थानीय चेहरे और जल्दी टिकट
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी Rajasthan Panchayat Election के लिए अपनी रणनीति में बदलाव शुरू किया है।
पार्टी ने नागौर जिले के डेगाना में Panchayat Raj Workers Conference से चुनाव अभियान शुरू किया। कांग्रेस की रणनीति स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने, टिकट समय पर तय करने और प्रदेश से लेकर ब्लॉक स्तर तक coordinated campaign चलाने की है।
निकाय चुनाव में सामने आई बगावत और cross-voting को देखते हुए कांग्रेस संगठन ऐसे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहा है जो लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हों, संगठन में काम कर चुके हों या पहले पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी निभा चुके हों।
Rajasthan Panchayat Election: निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती इस समय केवल BJP नहीं, बल्कि अपनी अंदरूनी खींचतान भी है।
हालिया निकाय चुनावों में कथित cross-voting और संगठनात्मक गड़बड़ियों की जांच के लिए प्रदेश कांग्रेस ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय कमेटी बनाई है। 400 से ज्यादा कांग्रेस पार्षदों की भूमिका जांच के दायरे में बताई गई है और कमेटी को सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
भरतपुर-डीग में विश्वेंद्र सिंह और प्रदेश नेतृत्व के बीच हुआ सार्वजनिक विवाद भी पार्टी की आंतरिक चुनौती को सामने ला चुका है।
ऐसे में कांग्रेस के लिए पंचायत चुनाव से पहले टिकट वितरण और स्थानीय गुटबाजी को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण होगा।
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